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खेती छोड़ शुरू किया मछली पालन, सालाना 20 लाख की हो रही आय
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झांसी। बुंदेलखंड में एक ओर जहां सूखे के कारण हर साल फसलें बर्बाद होती हैं। कभी सूखा, तो कभी ओलावृष्टि की मार से किसान परेशान रहते हैं वहीं, दूसरी तरफ झांसी के कई युवा ऐसे हैं, जिन्होंने परंपरागत खेती छोड़कर कुछ अलग कर मछली का पालन करके आज सालाना 15 से 20 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं। इन्हीं में से एक झांसी निवासी मुहल्ला डडियांपुरा में रहने वाले गुलाब सिंह रायकवार हैं, जिन्होंने बैंगन, टमाटर और गेहूं की फसल को छोड़कर मछली पालन का काम कर रहे हैं। मछली पालन करके आज झांसी ही नहीं पूरे बुंदेलखंड में बीजों की बिक्री कर रहे हैं।
सालाना 15 से 20 लाख होती है आय
पहली बार में उन्हें कुछ हजार रुपये की इनकम हुई, जो लागत की अपेक्षा ज्यादा थी। इससे उनमें और हौसला बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने धीरे- धीरे काम को आगे बढ़ाया। आज वह 15 से 20 लाख रुपये सालाना की कमाई करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने मोंठ के गांव रेव में भी करीब 12 बीघा में 25 लाख का प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसके लिए भारत सरकार ने 2018-19 में उनको 10 लाख रुपये का अनुदान दिया है।
दूसरे प्रदेशों में सप्लाई हो रहा मछली का बीज
जहां पहले बुंदेलखंड में मछली पालन के लिए लोग दूसरे प्रदेशों से मछली के बीज मंगाते थे। वहीं, आज गुलाब सिंह ने प्रजनन कराकर मछलियों का बीज महोबा, हमीरपुर, बांदा, चरखारी, जालौन, उरई, एट, भिंड (मप्र), भांडेर, दतिया, शिवपुरी, झालाबाड़ (राजस्थान), बारा, कोटा, जयपुर आदि जगहों पर बीजों का निर्यात करते हैं।
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मछलियों की प्रजातियां
कतला, रेहू मछलियों का प्रजनन कराते हैं। वहीं, विदेशी मछलियों में सिल्वर, ग्रास, कामन, पंगेसियस आदि मछलियों का प्रजनन कराकर बेचते हैं।
प्रजनन के लिए बनवाया ब्रीडिंग पूल
गुलाब सिंह ने बताया कि प्रजनन के लिए उन्होंने ब्रीडिंग पूल और सर्कुलर चाइना हेचरी बनवाया है। इसमें बोर से पानी लाकर ओवर हेड टैंक से ऑक्सीजन के लिए फिल्टर करते हैं। साथ ही कॉटेक्ट टूल (जिसमें ब्रीडिंग पूल में प्रजनन करने वाली मछलियों के अंडे रखे जाते हैं) बनाया। यहीं हेचिंग पूल भी है, जिसमें अंडे के बीज (मछली के बहुत छोटे बच्चे) रखे जाते हैं। इन मछलियों को इन पूल में रखने के लिए पानी को तीन चरणों में साफ करते हैं। पानी की गुणवत्ता मछलियों के हिसाब से ही रखी जाती है। बीज जैसी ही बड़ा होता है, उसे स्टॉक के लिए बनी 9 नर्सरी (छोटे- छोटे 9 तालाब) में रखते हैं। गुलाब सिंह इसके लिए आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे प्रदेशों में प्रशिक्षण लेने भी जा चुके हैं।
बेस्ट फिश फार्मर अवार्ड भी मिला
कलकत्ता में 2018 में गुलाब सिंह को बेस्ट फिश फार्मर अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा कई पुरस्कार भी प्राप्त किए।
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सालाना 15 से 20 लाख होती है आय
पहली बार में उन्हें कुछ हजार रुपये की इनकम हुई, जो लागत की अपेक्षा ज्यादा थी। इससे उनमें और हौसला बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने धीरे- धीरे काम को आगे बढ़ाया। आज वह 15 से 20 लाख रुपये सालाना की कमाई करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने मोंठ के गांव रेव में भी करीब 12 बीघा में 25 लाख का प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसके लिए भारत सरकार ने 2018-19 में उनको 10 लाख रुपये का अनुदान दिया है।
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दूसरे प्रदेशों में सप्लाई हो रहा मछली का बीज
जहां पहले बुंदेलखंड में मछली पालन के लिए लोग दूसरे प्रदेशों से मछली के बीज मंगाते थे। वहीं, आज गुलाब सिंह ने प्रजनन कराकर मछलियों का बीज महोबा, हमीरपुर, बांदा, चरखारी, जालौन, उरई, एट, भिंड (मप्र), भांडेर, दतिया, शिवपुरी, झालाबाड़ (राजस्थान), बारा, कोटा, जयपुर आदि जगहों पर बीजों का निर्यात करते हैं।
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मछलियों की प्रजातियां
कतला, रेहू मछलियों का प्रजनन कराते हैं। वहीं, विदेशी मछलियों में सिल्वर, ग्रास, कामन, पंगेसियस आदि मछलियों का प्रजनन कराकर बेचते हैं।
प्रजनन के लिए बनवाया ब्रीडिंग पूल
गुलाब सिंह ने बताया कि प्रजनन के लिए उन्होंने ब्रीडिंग पूल और सर्कुलर चाइना हेचरी बनवाया है। इसमें बोर से पानी लाकर ओवर हेड टैंक से ऑक्सीजन के लिए फिल्टर करते हैं। साथ ही कॉटेक्ट टूल (जिसमें ब्रीडिंग पूल में प्रजनन करने वाली मछलियों के अंडे रखे जाते हैं) बनाया। यहीं हेचिंग पूल भी है, जिसमें अंडे के बीज (मछली के बहुत छोटे बच्चे) रखे जाते हैं। इन मछलियों को इन पूल में रखने के लिए पानी को तीन चरणों में साफ करते हैं। पानी की गुणवत्ता मछलियों के हिसाब से ही रखी जाती है। बीज जैसी ही बड़ा होता है, उसे स्टॉक के लिए बनी 9 नर्सरी (छोटे- छोटे 9 तालाब) में रखते हैं। गुलाब सिंह इसके लिए आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे प्रदेशों में प्रशिक्षण लेने भी जा चुके हैं।
बेस्ट फिश फार्मर अवार्ड भी मिला
कलकत्ता में 2018 में गुलाब सिंह को बेस्ट फिश फार्मर अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा कई पुरस्कार भी प्राप्त किए।