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सपा नहीं बसपा थी भाजपा के निशाने पर

Thu, 16 Mar 2017 12:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 16 Mar 2017 12:33 AM IST
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SP was not BSP on target of BJP
सपा नहीं बसपा थी भाजपा के निशाने पर - फोटो : demo
विधानसभा चुनाव में भाजपा के निशाने पर सपा नहीं बसपा थी। अखिलेश सरकार की नाकामियों को सामने रखकर भाजपा ने बसपा के वोट बैंक पर बैक डोर से निशाना साधा। इसका असर भी नजर आया। दलितों को अपनी ओर मोड़ने में संघ की रणनीति काम आई। मोदी के चेहरे को आगे रखकर दलित युवा और महिला वोटर पर तीर चलाया जो निशाने पर जाकर लगा। कहा जा रहा है कि अगले विधानसभा चुनाव तक बसपा को शून्य करने की योजना है। जो कैडर वोट बसपा का कहा जाता है, उसे अब भाजपा का वोट कहलाने की योजना है। संघ और भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच होने वाली चर्चाओं में यह बात निकलकर आ रही है।
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बताया जा रहा है कि  दलित वोटों को भाजपा के साथ जोड़ने का चक्रव्यूह दो साल पहले से ही तैयार कर लिया गया था। इस पर करीब डेढ़ साल पहले काम करना शुरू हो गया था। जैसे-जैसे चुनाव का वक्त नजदीक आया, इसमें तेजी आती गई। संघ पदाधिकारियों की बातचीत में यह भी सामने आया है कि वाराणसी में शहर की चार विधानसभा सीटों में सिर्फ एक ही सीट ऐसी थी, जिस पर भाजपा को जीत का पूरा भरोसा था। बाकी तीन सीटें असमंजस में थीं। तीनों सीटों पर भाजपा का जादू रातों रात चल गया। कहा जा रहा है कि इसके पीछे संघ और मोदी की तरफ से अचानक बदली गई रणनीति काम आई। दरअसल इन तीनों विधानसभा सीटों (रोहनिया, साउथ और नार्थ सीट) पर पार्टी को जीत में कुछ कमी नजर आ रही थी। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इन सीटों से जुड़े युवाओं को टारगेट किया और उनको लेकर वाराणसी में दूसरे दिन का रोड शो निकाला। इसी तरह बुंदेलखंड की 19, पूर्वांचल  की करीब 150 सीट और कानपुर मंडल के ग्रामीण क्षेत्रों की विधानसभा सीटों पर रणनीति के तहत काम किया गया। संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुसार दलितों में मोदी के चेहरे को उनके मसीहा की तैयार बैठाया गया।
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यह थी रणनीति
पिछले डेढ़ साल से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले दलित समुदायों के बीच संवेदनात्मक तौर पर युवाओं और महिलाओं को मोदी के चेहरे से जोड़ना
हर छोटे, बड़े धार्मिक स्थल और महापुरुषों की मूर्तियों के सामने बैठकर स्थानीय लोगों से बातचीत करना
दलितों के महापुरुषों के जीवन से जुड़ी कहानियों पर चर्चा करना
नोटबंदी का वास्तविक लाभ किस तरह से आगे दलितों को होगा, इसकी सटीक जानकारी देना
2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा जिन सीटों पर हारी थी, उन सीटों पर सीटों पर भी टारगेट किया गया
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