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युवक ने आत्महत्या की
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फांसी- ज्ञानेश कुमार फाइल फोटो
- फोटो : REPORTERS
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झांसी। कोतवाली क्षेत्र के बाहर उनाव गेट शिव परिवार कॉलोनी में रहने वाले ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार की सुबह फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह पत्नी की क्लेश से परेशान था। उसकी पत्नी परिवार से अलग होकर रहने की जिद कर रही थी। इससे क्षुब्ध होकर उसने यह कदम उठा लिया। सुसाइड में उसने ससुराल के लोगों को भी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
कोतवाली क्षेत्र के बाहर उनाव गेट अंजनी माता मंदिर के पास शिव परिवार कॉलोनी में राजकुमार चंचलानी अपने तीन पुत्रों समेत परिवार के साथ रहते हैं। उनके बड़े पुत्र ज्ञानेश कुमार (31) की शादी छह साल पहले दतिया गेट निवासी एक महिला के साथ हुई थी। शादी के एक साल बाद ही वह पत्नी के साथ जयपुर चले गए और वहां एक मॉल में काम करने लगे। एक साल बाद बेटी दिव्यांशी ने जन्म लिया। कुछ महीने पहले ही राजकुमार चंचलानी ने शिवपरिवार कॉलोनी में घर बनवाया था, जिसका गृह प्रवेश 29 जून को हुआ था। ज्ञानेश भी परिवार के साथ घर आए थे। गृह प्रवेश के बाद परिजनों ने उन्हें समझाया कि वह झांसी में ही रहकर धंधा करने लगे। इस पर वह राजी हो गए। वह धंधे की तलाश में थे। मगर, इस बीच उनकी पत्नी से आए दिन खटपट (क्लेश) हो रही थी। पत्नी जिद कर रही थी कि वह परिवार से अलग होकर रहे। दोनों में झगड़ा होने पर तीन दिन पहले ही वह मायके चली गई। इस बात को लेकर ज्ञानेश क्षुब्ध थे। 23 सितंबर को उनका जन्मदिन भी था।
मंगलवार की सुबह उन्होेंने घर के एक कमरे में पंखे पर चादर से फंदा बनाकर फांसी लगा ली। परिजनों ने जब उनको पंखे से लटका देखा तो कोहराम मच गया। शोर गुल सुनकर मुहल्ले वाले एकत्रित हो गए। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने शव को फंदे से नीचे उतारा। घटनास्थल का निरीक्षण करने पर पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें ज्ञानेश ने अपनी मौत के लिए ससुराल जनों को जिम्मेदार ठहराया। पुलिस ने पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं, कोतवाली पुलिस ने ज्ञानेश कुमार के भाई मनीष चंचलानी की तहरीर पर पत्नी दिव्या सिंघवानी, सांस मंजू, मामा जीतू चावलानी व अशोक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। कोतवाली प्रभारी ने बताया कि सुसाइड नोट के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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जयपुर में की थी जान देने की कोशिश
पोस्टमार्टम हाउस पर भाई आकाश ने बताया कि ज्ञानेश की जयपुर में भी पत्नी से नहीं बनती थी। झांसी आने से पहले ज्ञानेश ने जयपुर में जहर पीकर भी जान देने की कोशिश की थी। ईश्वर की कृपा से जान बच गई। इसी कारण झांसी आने पर परिजनों ने उसे झांसी में ही धंधा करने के लिए राजी किया था।
सुसाइड नोट में लिखा
ज्ञानेश ने सुसाइड नोट में लिखा कि मेरी पत्नी परिवार से अलग रहने के लिए दबाव बना रही है। इसके लिए पत्नी की मां और मामा जिम्मेदार हैं। वह अलग न होने पर मुकदमे में फंसाने की धमकी दे रहे हैं। साथ ही पांच लाख रुपये की मांग कर रहे हैं। मुझे अकेले में बुलाकर कहा कि पैसे दो नहीं तो तुम्हें और तुम्हारे परिवार को दहेज उत्पीड़न के मुकदमे में फंसा देंगे। मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की। सुसाइड नोट में 23 सितंबर की तारीख लिखी थी।
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कोतवाली क्षेत्र के बाहर उनाव गेट अंजनी माता मंदिर के पास शिव परिवार कॉलोनी में राजकुमार चंचलानी अपने तीन पुत्रों समेत परिवार के साथ रहते हैं। उनके बड़े पुत्र ज्ञानेश कुमार (31) की शादी छह साल पहले दतिया गेट निवासी एक महिला के साथ हुई थी। शादी के एक साल बाद ही वह पत्नी के साथ जयपुर चले गए और वहां एक मॉल में काम करने लगे। एक साल बाद बेटी दिव्यांशी ने जन्म लिया। कुछ महीने पहले ही राजकुमार चंचलानी ने शिवपरिवार कॉलोनी में घर बनवाया था, जिसका गृह प्रवेश 29 जून को हुआ था। ज्ञानेश भी परिवार के साथ घर आए थे। गृह प्रवेश के बाद परिजनों ने उन्हें समझाया कि वह झांसी में ही रहकर धंधा करने लगे। इस पर वह राजी हो गए। वह धंधे की तलाश में थे। मगर, इस बीच उनकी पत्नी से आए दिन खटपट (क्लेश) हो रही थी। पत्नी जिद कर रही थी कि वह परिवार से अलग होकर रहे। दोनों में झगड़ा होने पर तीन दिन पहले ही वह मायके चली गई। इस बात को लेकर ज्ञानेश क्षुब्ध थे। 23 सितंबर को उनका जन्मदिन भी था।
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मंगलवार की सुबह उन्होेंने घर के एक कमरे में पंखे पर चादर से फंदा बनाकर फांसी लगा ली। परिजनों ने जब उनको पंखे से लटका देखा तो कोहराम मच गया। शोर गुल सुनकर मुहल्ले वाले एकत्रित हो गए। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने शव को फंदे से नीचे उतारा। घटनास्थल का निरीक्षण करने पर पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें ज्ञानेश ने अपनी मौत के लिए ससुराल जनों को जिम्मेदार ठहराया। पुलिस ने पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं, कोतवाली पुलिस ने ज्ञानेश कुमार के भाई मनीष चंचलानी की तहरीर पर पत्नी दिव्या सिंघवानी, सांस मंजू, मामा जीतू चावलानी व अशोक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। कोतवाली प्रभारी ने बताया कि सुसाइड नोट के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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जयपुर में की थी जान देने की कोशिश
पोस्टमार्टम हाउस पर भाई आकाश ने बताया कि ज्ञानेश की जयपुर में भी पत्नी से नहीं बनती थी। झांसी आने से पहले ज्ञानेश ने जयपुर में जहर पीकर भी जान देने की कोशिश की थी। ईश्वर की कृपा से जान बच गई। इसी कारण झांसी आने पर परिजनों ने उसे झांसी में ही धंधा करने के लिए राजी किया था।
सुसाइड नोट में लिखा
ज्ञानेश ने सुसाइड नोट में लिखा कि मेरी पत्नी परिवार से अलग रहने के लिए दबाव बना रही है। इसके लिए पत्नी की मां और मामा जिम्मेदार हैं। वह अलग न होने पर मुकदमे में फंसाने की धमकी दे रहे हैं। साथ ही पांच लाख रुपये की मांग कर रहे हैं। मुझे अकेले में बुलाकर कहा कि पैसे दो नहीं तो तुम्हें और तुम्हारे परिवार को दहेज उत्पीड़न के मुकदमे में फंसा देंगे। मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की। सुसाइड नोट में 23 सितंबर की तारीख लिखी थी।