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कोरोना से मौतों में झांसी से बड़े-बड़े शहर पीछे, अब सातवें पायदान पर
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झांसी। कोरोना की दूसरी लहर में मची तबाही से अब तक कई परिवार नहीं उबर पाए हैं। झांसी में इस लहर ने कितना आतंक ढाया, इसका अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोरोना से हुई मौतों में जिला अब प्रदेश में सातवें स्थान पर पहुंच गया है। जबकि, आबादी के मामले में झांसी से कई बड़े जिले हैं।
कोरोना की पहली लहर में सरकार की तरफ से लॉकडाउन लग गया था, इस कारण काफी हद तक स्थिति संभली रही। मगर दूसरी लहर में हालात बेकाबू हो गए। जिले के अफसर भी स्थिति को संभालने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए। हाल ये रहा कि कई दिनों तक तो 10-10 से ज्यादा मौतें होती रहीं। हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल रहा। स्वास्थ्य संसाधन बौने साबित हो गए। अब कोरोना की दूसरी लहर थमने से हालत नियंत्रण में हैं। वहीं, झांसी के मौतों के आंकड़ों पर गौर करें तो ये प्रदेश में सातवें पायदान पर काबिज है। झांसी से आगे लखनऊ में 2637, कानपुर नगर में 1899, प्रयागराज में 1060, वाराणसी में 970, मेरठ में 896, गोरखपुर में 842 जिले हैं।
झांसी से दोगुनी आबादी वाले जिलों में भी मौतें कम
गाजियाबाद, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, मुरादाबाद, गाजीपुर, बलिया, मुजफ्फरनगर, बरेली, आजमगढ़, उन्नाव, जौनपुर, बाराबंकी, सीतापुर, हरदोई, सुल्तानपुर, बिजनौर, गाजीपुर, कुशीनगर, बुलंदशहर, बहराइच, सहारनपुर, गोंडा, प्रतापगढ़, देवरिया, शाहजहांपुर, महाराजगंज, फतेहपुर, सिद्धार्थनगर, फिरोजाबाद, मिर्जापुर, फैजाबाद, बस्ती, रामपुर, मऊ, बलरामपुर, पीलीभीत ऐसे जिले हैं, जिनकी आबादी झांसी से ज्यादा है। इनमें कुछ जिलों में तो झांसी की तुलना में दोगुनी आबादी है। इसके बावजूद वहां के अधिकारियों की कुशल रणनीति से यहां की तुलना में हालात काफी सुधरे रहे।
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कोरोना का एक संक्रमित मिला, एक की मौत
कोरोना के केस भले ही इक्का-दुक्का सामने आ रहे हों, मगर इससे होने वाली मौतें अभी भी थमने का नाम नहीं ले रही हैं। मंगलवार को जिले में 4669 सैंपलों की जांच की गई। इसमें एक केस मिला, जबकि एक की मौत भी हो गई। अब जिले में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 36506 पहुंच गई है, जबकि, मरने वालों का आंकड़ा 662 हो गया है। मौजूदा समय में 19 एक्टिव केस बचे हैं। रिकवरी रेट 98.13 प्रतिशत और मृत्युदर 98.13 प्रतिशत है। तीन लक्षण वाले मरीजों में एक ही हालत गंभीर बनी हुई है।
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कोरोना की पहली लहर में सरकार की तरफ से लॉकडाउन लग गया था, इस कारण काफी हद तक स्थिति संभली रही। मगर दूसरी लहर में हालात बेकाबू हो गए। जिले के अफसर भी स्थिति को संभालने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए। हाल ये रहा कि कई दिनों तक तो 10-10 से ज्यादा मौतें होती रहीं। हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल रहा। स्वास्थ्य संसाधन बौने साबित हो गए। अब कोरोना की दूसरी लहर थमने से हालत नियंत्रण में हैं। वहीं, झांसी के मौतों के आंकड़ों पर गौर करें तो ये प्रदेश में सातवें पायदान पर काबिज है। झांसी से आगे लखनऊ में 2637, कानपुर नगर में 1899, प्रयागराज में 1060, वाराणसी में 970, मेरठ में 896, गोरखपुर में 842 जिले हैं।
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झांसी से दोगुनी आबादी वाले जिलों में भी मौतें कम
गाजियाबाद, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, मुरादाबाद, गाजीपुर, बलिया, मुजफ्फरनगर, बरेली, आजमगढ़, उन्नाव, जौनपुर, बाराबंकी, सीतापुर, हरदोई, सुल्तानपुर, बिजनौर, गाजीपुर, कुशीनगर, बुलंदशहर, बहराइच, सहारनपुर, गोंडा, प्रतापगढ़, देवरिया, शाहजहांपुर, महाराजगंज, फतेहपुर, सिद्धार्थनगर, फिरोजाबाद, मिर्जापुर, फैजाबाद, बस्ती, रामपुर, मऊ, बलरामपुर, पीलीभीत ऐसे जिले हैं, जिनकी आबादी झांसी से ज्यादा है। इनमें कुछ जिलों में तो झांसी की तुलना में दोगुनी आबादी है। इसके बावजूद वहां के अधिकारियों की कुशल रणनीति से यहां की तुलना में हालात काफी सुधरे रहे।
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कोरोना का एक संक्रमित मिला, एक की मौत
कोरोना के केस भले ही इक्का-दुक्का सामने आ रहे हों, मगर इससे होने वाली मौतें अभी भी थमने का नाम नहीं ले रही हैं। मंगलवार को जिले में 4669 सैंपलों की जांच की गई। इसमें एक केस मिला, जबकि एक की मौत भी हो गई। अब जिले में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 36506 पहुंच गई है, जबकि, मरने वालों का आंकड़ा 662 हो गया है। मौजूदा समय में 19 एक्टिव केस बचे हैं। रिकवरी रेट 98.13 प्रतिशत और मृत्युदर 98.13 प्रतिशत है। तीन लक्षण वाले मरीजों में एक ही हालत गंभीर बनी हुई है।