झांसी। जिस उम्र में युवा खेलने-कूदने और मोबाइल चलाने में अपना समय बरबाद करते हैं। उस उम्र में शहर की होनहार छात्रा सलोनी संगीत विधा में पारंगत होकर झांसी का नाम रोशन कर रही है। मात्र ढाई वर्ष की उम्र से अपनी कला का लोहा मनवा रहीं सलोनी कई संगीत समारोह में एवार्ड हासिल कर चुकी हैं।
शहर की पुरानी तहसील के पीछे रहने वाली सलोनी को कथक नृत्य, तबला और गायन में महारथ हासिल है। नृत्य में तत्कार हो या तबले की थाप, सलोनी की तालबद्धता का कोई जोड़ नहीं है। सलोनी के पिता आलोक कुमार शहर के पीडब्ल्यूडी में ठेकेदार हैं। इनकी मां गीता झा कुशल गृहिणी हैं। एक छोटा भाई है जो अभी 9वीं कक्षा का छात्र है। अपने गुरु एवं दादा से संगीत की शिक्षा हासिल करने वाली सलोनी बताती हैं कि उन्होंने मात्र ढाई वर्ष की उम्र से संगीत सीखना शुरू किया था। उनके दादा पंडित कृष्णकांत द्वारा आयोजित समारोह में उन्होंने अपनी परफारमेंस दी थी तो लोग वाह-वाह कर उठे थे। सलोनी बताती हैं कि उस वक्त रियाज करने नृत्य करते समय गलत तरह से नृत्य कर रहे थे तो वह उन्हें बताने पहुंच गईं थीं, यह देख लोग चकित हो गए थे कि इतनी छोटी सी बच्ची कैसे लोगों को नृत्य की सही दिशा बता रही है। बस यही से उनक ी संगीत साधना शुरू हो गई थी। मात्र 17 वर्ष की उम्र में सलोनी अभी तक 25 से अधिक एवार्ड और प्रमाणपत्र हासिल कर चुकी हैं। सलोनी ने तलबा, कथक नृत्य और शास्त्रीय संगीत गायन में प्रभाकर की डिग्री भी हासिल की है। अब वह पढ़ाई और अपनी संगीत साधना के साथ बच्चों को संगीत की शिक्षा भी दे रही हैं। सलोनी 12वीं कर चुकी हैं, अब बीए ऑनर्स करने की तैयारी कर रही हैं।