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Jhansi News: सफाई को कम पड़े एक करोड़, मेडिकल कॉलेज के ड्रेसिंग रूम बने सफाई कर्मियों की आरामगाह
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन हर माह 99 लाख रुपये साफ-सफाई पर खर्च कर रहा है, लेकिन उसका असर फिलहाल नजर नहीं आ रहा है। इस वजह से उपचार के लिए आने वाले रोगियों में गंभीर संक्रमण का डर रहता है। वार्डों के शौचालयों की सफाई होना तो दूर की बात मेडिकल वेस्ट के ढेर लगे रहते हैं। इससे वार्डों में दुर्गंध की वजह से रोगी और तीमारदारों को उबकाई आती रहती है। लोग इसकी शिकायत करते हैं मगर कोई कार्रवाई नहीं होती। खास बात यह कि ड्रेसिंग रूम को सफाई कर्मियों ने आरामगाह बना रखा है। इसलिए रोगियों को ड्रेसिंग कराने के लिए इमरजेंसी में जाना पड़ता है।
मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू में 15 नवंबर को आग लगने से मौके पर ही 10 नवजात की की जलकर मौत हो गई थी। बाद में आग से बचाए गए आठ शिशुओं की उपचार के दौरान मौत हो गई। इतने बड़े हादसे के बाद भी मेडिकल कॉलेज प्रशासन चेता नहीं है और खामियां दूर होने का नाम नहीं ले रहीं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन हर माह साफ-सफाई के नाम पर 99 लाख रुपये खर्च कर रहा है और वार्डों की गंदगी दूर होने का नाम नहीं ले रही हैं। वार्डों से सटे शौचालय पूरी तरह से खस्ताहाल हैं। सफाई कर्मी वार्डों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट (खून और पेशाब की थैली, ग्लव्स आदि) को शौचालय में फेंक देते हैं। जिसकी वजह से चिंताजनक हालत में भर्ती रोगियों में संक्रमण का भय बना रहता है। ऐसा नहीं कि जिम्मेदारों को इसकी खबर नहीं मगर अपनी-अपनी मजबूरी गिनाकर कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं।
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इतना ही नहीं वार्ड के ड्रेसिंग रूम को सफाईकर्मियों ने आरामगाह बना लिया है। वार्ड में तैनात नर्सिंग कर्मी रोगियों को ड्रेसिंग के लिए इमरजेंसी भेजते हैं। इससे न सिर्फ रोगी बल्कि तीमारदारों को भी काफी परेशान होना पड़ता है।
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0- रोगियों को ले जाना पड़ता है सुलभ शौचालय
वार्डों के शौचालयों की साफ-सफाई नहीं होने से तीमारदार ही नहीं रोगियों को पहली, दूसरी अथवा तीसरी मंजिल से लघुशंका अथवा दीर्घ शंका के लिए पैदल सुलभ शौचालय तक जाना पड़ता है, जहां 10 रुपये का भुगतान करना पड़ता है।
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वार्डों के शौचालयों की सफाई नहीं होना और मेडिकल वेस्ट फेंकना काफी गंभीर है। वार्डों की सिस्टर इंचार्ज को समुचित व्यवस्थाएं बनानी चाहिए। निश्चित ही नोटिस देकर जवाब तलब किया जाएगा और कार्रवाई होगी। - डाॅ. सचिन माहुर, सीएमएस मेडिकल कॉलेज