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सुरक्षित नहीं सड़क पर सफर: जान गंवाने वाले 40 प्रतिशत बढ़े, सर्वाधिक हादसों वाले जनपद में आठवें स्थान पर झांसी
Sat, 25 Oct 2025 07:59 AM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Sat, 25 Oct 2025 07:59 AM IST
सार
हादसों में कमी लाने के लिए सरकार दो माह से मुहिम में जुटी थी। नए सिरे से ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए जाने से लेकर परिवहन विभाग एवं ट्रैफिक पुलिस को जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका कोई असर होता नहीं दिखता।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सरकार के सड़क सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले साल नौ माह के दौरान 196 लोगों ने जान गंवाई थी, जबकि इस साल अभी तक 275 लोग सड़कों पर जान गवां चुके हैं। यह पिछली बार के मुकाबले करीब चालीस फीसदी अधिक है।
हादसों में कमी लाने के लिए सरकार दो माह से मुहिम में जुटी थी। नए सिरे से ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए जाने से लेकर परिवहन विभाग एवं ट्रैफिक पुलिस को जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका कोई असर होता नहीं दिखता। इसकी तस्दीक हालिया आंकड़े करते हैं। झांसी में जनवरी से सितंबर के बीच कुल 481 दुर्घटनाएं दर्ज हुईं, इनमें 272 लोग अपनी जान गवां बैठे जबकि पिछले साल (सितंबर तक) 439 सड़क हादसों में 196 लोगों ने जान गंवाई थी।
पिछले वर्ष के मुकाबले 76 लोगों की हादसों में अधिक जान गई। वहीं, माहवार आंकड़ों के लिहाज से भी झांसी पूरे प्रदेश में सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाओं वाले जनपदों में आठवें स्थान पर रहा। पिछले साल सितंबर में 12 लोगों की सड़क हादसे में जान गई थी जबकि इस माह 2025 में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 20 हो गई। यह करीब 66.7 फीसद अधिक है।
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सड़क सुरक्षा के नाम पर 11 करोड़ खर्च
सड़कों को ट्रैफिक के लिहाज से सुरक्षित बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग, परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग, एनएचएआई, सेतु निगम, नगर निगम ने अभी तक करीब 11 करोड़ रुपये खर्च कर चुका। इनके जरिये ब्लैक स्पॉट दुरुस्त कराया गया, इसके बावजूद हादसों की संख्या में कोई कमी नहीं आई। सबसे अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग पर हादसे हो रहे हैं।
इन वजहों से हो रहे सर्वाधिक हादसे
सड़कों की खराब दशा, जगह-जगह गहरे गड्ढे
तयशुदा सीमा से अधिक रफ्तार पर वाहनों का दौड़ना
राष्ट्रीय राजमार्ग पर जगह-जगह बने अवैध कट
उल्टी दिशा में वाहन चलाना
एनएचएआई एवं मुख्य मार्गों की पटरी पर वाहनों को खड़ा रखना
जान गंवाने वालों में हेलमेट न लगाने वाले सर्वाधिक
सड़क हादसे में जान गंवाने वालों में सर्वाधिक संख्या दो पहिया वाहन चालकों की है। आंकड़े बताते हैं कि हादसों के शिकार हर तीसरे व्यक्ति की मौत सीधे सिर में चोट लगने की वजह से हुई। इन चालकों ने हेलमेट नहीं लगाए थे। इस वजह से इनको अस्पताल तक पहुंचने का भी समय नहीं मिल सका। पिछले तीन साल के दौरान 227 लोगों की मौत सिर में चोट लगने से हुई। चिकित्सकों का भी कहना है कि सिर में चोट लगने से जान जाने का सर्वाधिक खतरा रहता है।
ट्रैफिक सीओ रामवीर सिंह का कहना है कि ओवर स्पीड समेत ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाती है। महानगर के इंट्री प्वॉइंट पर भी निगरानी रखी जाती है। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जाएंगे।
आरटीओ प्रवर्तन राजेश कुमार ने बताया कि दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सभी विभागों की मदद से नया प्लान तैयार किया जा रहा है। दुर्घटनाओं की वजह तलाशी जा रही है।
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हादसों में कमी लाने के लिए सरकार दो माह से मुहिम में जुटी थी। नए सिरे से ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए जाने से लेकर परिवहन विभाग एवं ट्रैफिक पुलिस को जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका कोई असर होता नहीं दिखता। इसकी तस्दीक हालिया आंकड़े करते हैं। झांसी में जनवरी से सितंबर के बीच कुल 481 दुर्घटनाएं दर्ज हुईं, इनमें 272 लोग अपनी जान गवां बैठे जबकि पिछले साल (सितंबर तक) 439 सड़क हादसों में 196 लोगों ने जान गंवाई थी।
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पिछले वर्ष के मुकाबले 76 लोगों की हादसों में अधिक जान गई। वहीं, माहवार आंकड़ों के लिहाज से भी झांसी पूरे प्रदेश में सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाओं वाले जनपदों में आठवें स्थान पर रहा। पिछले साल सितंबर में 12 लोगों की सड़क हादसे में जान गई थी जबकि इस माह 2025 में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 20 हो गई। यह करीब 66.7 फीसद अधिक है।
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सड़क सुरक्षा के नाम पर 11 करोड़ खर्च
सड़कों को ट्रैफिक के लिहाज से सुरक्षित बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग, परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग, एनएचएआई, सेतु निगम, नगर निगम ने अभी तक करीब 11 करोड़ रुपये खर्च कर चुका। इनके जरिये ब्लैक स्पॉट दुरुस्त कराया गया, इसके बावजूद हादसों की संख्या में कोई कमी नहीं आई। सबसे अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग पर हादसे हो रहे हैं।
इन वजहों से हो रहे सर्वाधिक हादसे
सड़कों की खराब दशा, जगह-जगह गहरे गड्ढे
तयशुदा सीमा से अधिक रफ्तार पर वाहनों का दौड़ना
राष्ट्रीय राजमार्ग पर जगह-जगह बने अवैध कट
उल्टी दिशा में वाहन चलाना
एनएचएआई एवं मुख्य मार्गों की पटरी पर वाहनों को खड़ा रखना
जान गंवाने वालों में हेलमेट न लगाने वाले सर्वाधिक
सड़क हादसे में जान गंवाने वालों में सर्वाधिक संख्या दो पहिया वाहन चालकों की है। आंकड़े बताते हैं कि हादसों के शिकार हर तीसरे व्यक्ति की मौत सीधे सिर में चोट लगने की वजह से हुई। इन चालकों ने हेलमेट नहीं लगाए थे। इस वजह से इनको अस्पताल तक पहुंचने का भी समय नहीं मिल सका। पिछले तीन साल के दौरान 227 लोगों की मौत सिर में चोट लगने से हुई। चिकित्सकों का भी कहना है कि सिर में चोट लगने से जान जाने का सर्वाधिक खतरा रहता है।
ट्रैफिक सीओ रामवीर सिंह का कहना है कि ओवर स्पीड समेत ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाती है। महानगर के इंट्री प्वॉइंट पर भी निगरानी रखी जाती है। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जाएंगे।
आरटीओ प्रवर्तन राजेश कुमार ने बताया कि दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सभी विभागों की मदद से नया प्लान तैयार किया जा रहा है। दुर्घटनाओं की वजह तलाशी जा रही है।