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दशकों से डायबिटीज से लड़ रहे और जीत रहे झांसी वासी

Sun, 14 Nov 2021 01:15 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 14 Nov 2021 01:15 AM IST
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Residents of Jhansi fighting and winning diabetes for decades
झांसी। दशकों से डायबिटीज से लड़ रहे झांसी के बुजुर्ग युवाओं के लिए मिसाल हैं। 30-40 साल से मधुमेह के साथ जीवन गुजार लिया लेकिन दिनचर्या और खानपान में बदलाव करके कभी भी मर्ज को खुद पर हावी नहीं होने दिया। कुछ बुजुर्ग तो ऐसे भी हैं, जिन्हें इंसुलिन तक की जरूरत नहीं पड़ी। उनका कहना है कि मर्ज होने के बाद घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उसके कारणों का पता लगाकर नियंत्रण में रखने के बारे में सोचना चाहिए। पेश है ये रिपोर्ट।
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डॉ. कुसुम रोज सुबह करतीं योग, 40 मिनट साइकिलिंग भी
बीकेडी के हिंदी विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. कुसुम गुप्ता पिछले 30 साल से मधुमेह से ग्रसित हैं। बीमारी का पता चलते ही उन्होंने जीवनशैली में बदलाव कर दिया। इसी वजह से अब वो बीमारी नहीं, बल्कि बीमारी उनके नियंत्रण में है। बजरंग कॉलोनी निवासी 71 वर्षीय डॉ. कुसुम ने बताया कि वह रोज सुबह छह बजे उठती हैं। फिर योग करती हैं। 40 मिनट तक घर पर ही एक्सरसाइज मशीन पर साइकिलिंग करती हैं। खानपान में संतुलित आहार लेती हैं। फास्ट फूड, घी तेल, गरिष्ठ भोजन बिल्कुल बंद कर दिया है। मीठा भी बहुत कम खाती हैं। उन्होंने बताया कि बीमारी होने पर खुद को बीमार नहीं समझना चाहिए। बल्कि, उन कारणों का पता लगाकर दूर करने का प्रयास करना चाहिए, जिससे मर्ज बढ़ सकता है। दिनचर्या और खानपान सुधारने की वजह से ही उन्हें पिछले तीन दशक में कभी भी इंसुलिन की जरूरत नहीं पड़ी।
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42 साल से भगवत मर्ज से लड़ रहे, कभी दवा लेने नहीं भूले
शिक्षक पद से सेवानिवृत्त बामौर के सिंघार निवासी 78 वर्षीय भगवत शरण वर्मा पिछले 42 साल से डायबिटीज से लड़ रहे हैं। उन्होंने कभी भी खानपान में परहेज नहीं किया। शुरू में व्यायाम आदि पर भी ज्यादा ध्यान नहीं देते थे। मगर जब उन्हें मधुमेह होने की जानकारी हुई तो दिनचर्या में काफी बदलाव ला दिया। चार दशक पहले ग्वालियर में जांच के दौरान उन्हें बीमारी का पता हुआ था, बस तभी से ठान लिया था कि इसे नियंत्रण में रखना है। ऐसे में सबसे पहले खानपान में बदलाव किया। अब वह खाने में शुगर बढ़ाने वाली चीजों से परहेज करते हैं। एलोपैथ के साथ आयुर्वेदिक दवाओं का भी सेवन किया। काढ़ा से लेकर करेला का जूस तक पीना शुरू कर दिया। बुजुर्ग होने के कारण अब वो घर पर ही टहलते हैं। इन्हीं वजहों से मधुमेह रोग कभी भी अनियंत्रित नहीं हुआ। जबकि, 1995 से वो इंसुलिन का सहारा ले रहे हैं।
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