{"_id":"608b179e8ebc3e8dc314be54","slug":"remidisivir-ke-liye-jewar-girvi-rakhe-reporters-news-jhs1941213193","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेमडेसिविर खरीदने को किसी ने जेवर गिरवी रखे, किसी ने उधार लिए पैसे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेमडेसिविर खरीदने को किसी ने जेवर गिरवी रखे, किसी ने उधार लिए पैसे
विज्ञापन
झांसी। कोरोना काल में ऑक्सीजन पर अटकी अपनों की सांसें बचाने के लिए किसी ने रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदने के लिए जेवर गिरवी रख दिए तो किसी ने साहूकार से उधार लिए। इसके बावजूद कई लोग अपनों की जान नहीं बचा पाए। झांसी में सांसों के सौदागर लूट मचा रहे हैं तो जिम्मेदार चैन की नींद सो रहे हैं। ये हाल तब है, जब प्रदेश के मुखिया इंजेक्शन की कालाबाजारी पर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए हैं।
कोरोना संक्रमण काल में रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर हो-हल्ला मचा है। इंजेक्शन का जबरदस्त टोटा है। वहीं, मांग खूब हो रही है। महामारी के इस दौर में जहां लगातार मौतें हो रही हैं, वहीं सांसों के सौदागर कालाबाजारी कर झांसी की जनता को लूटने में लगे हुए हैं। जिले के बयान बहादुर अफसर अपनी आंखों पर पर्दा डाले हुए हैं। अब तक एक भी ऐसी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे लगे कि प्रशासन कालाबाजारी रोकने का प्रयास कर रहा है। हां, प्रदेश के मुख्यमंत्री जरूर सख्त हैं। उन्होंने सीधे एनएसए की कार्रवाई करने के आदेश कर दिए हैं। मगर जब जिले के अफसर ही नाकाम होंगे, तो कालाबाजारी कैसे रुकेगी।
केस-1
कहां से लाता एक लाख, रख दिए जेवर गिरवी
महानगर के एक व्यक्ति को अपनी बहन के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत पड़ गई। बहन की सांसें ऑक्सीजन पर टिकी हुई थीं। इंजेक्शन से उसके ठीक होने की उम्मीद जगी तो ढूंढने लगा। एक व्यक्ति से संपर्क हुआ तो उसने एक लाख रुपये मांगे। भाई बोला इतने पैसे नहीं है, तो व्यक्ति ने कहीं से ले आओ। जेवर गिरवी रख शाम तक पैसे का इंतजाम किया। तब इंजेक्शन मिला।
विज्ञापन
केस-2
एक-एक लाख का इंजेक्शन खरीदा पर नहीं बची पत्नी
सिविल लाइन निवासी शिक्षक के पुत्र ने कोरोना पॉजिटिव अपनी पत्नी को बचाने के लिए पानी की तरह पैसा बहा दिया। डॉक्टर ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत बताई तो वो चारों तरफ से प्रयास करने लगा। इसी बीच, उसके संपर्क में एक व्यक्ति आया। उसने एक-एक लाख के दो इंजेक्शन उसे दिए। फिर एक इंजेक्शन सीएमओ ऑफिस से मिला। फिर भी उसकी पत्नी की जान नहीं बच सकी।
केस-3
डॉक्टर ने भी 50 हजार में खरीदा रेमडेसिविर
अंसल कॉलोनी में रहने वाले डॉक्टर ने ससुर को कोरोना संक्रमित होने पर अस्पताल में भर्ती किया। इलाज करने वाले चिकित्सक ने उनसे रेमडेसिविर इंजेक्शन मंगवाने के लिए कहा। डॉक्टर को कहीं पर भी इंजेक्शन नहीं मिला तो थक-हारकर उन्होंने दलाल से संपर्क किया। डॉक्टर होने के बावजूद दलाल ने उन्हें पहला इंजेक्शन 50 हजार, दूसरा 45 और बाकी 40-40 हजार रुपये में दिया।
केस-4
झांसी के ही एक युवक को अपनी भाई के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत पड़ गई। मेडिकल स्टोरों के चक्कर काटे, तो सबने कहा इंजेक्शन खत्म हो गया है। इसी बीच, किसी ने उसे एक दलाल का नंबर दिया। उसने दलाल से संपर्क साधा तो एक इंजेक्शन के 75 हजार रुपये मांगे। युवक ने कुछ पैसे कम करने को कहा तो मना कर दिया। बाद में उसने पैसे उधार लेकर इंजेक्शन खरीदा।
इतनी मारामारी फिर दलालों के पास कहां से आ रहे इंजेक्शन
रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर देशभर में मारामारी है। शासन की तरफ से भी मांग के अनुसार काफी कम इंजेक्शन स्वास्थ्य विभागा को उपलब्ध कराए जा पा रहे हैं। बड़ा सवाल ये है कि फिर दलालों के पास कहां से इतने इंजेक्शन आ जा रहे हैं। क्या ये नर्सिंगहोम और मेडिकल स्टोरों की सांठगांठ का नतीजा है। जानकारों ने बताया कि मरीज से इंजेक्शन मंगवाने के बावजूद कई बार लगाया ही नहीं जाता है। फिर यही इंजेक्शन वापस दलाल के पास पहुंचा जाता है, वो इसे दूसरे को बेच देता है। यही चेन चलती रहती है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव ने शासन-प्रशासन को घेरा
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव डॉ. सुधांशु त्रिपाठी ने झांसी में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी पर शासन-प्रशासन को घेरा। उन्होंने अमर उजाला में 29 अप्रैल को प्रकाशित खबर को ट्विट करते हुए लिखा कि लखनऊ से लेकर झांसी तक पूरे प्रदेश में यही हाल है। सीएम कह रहे हैं कि प्रदेश में हालात सुधर रहे हैं। प्रशासन को ऐसे लुटेरों पर तुरंत कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
औषधि प्रशासन विभाग में आकर सीधे शिकायत दर्ज कराएं। यदि किसी के पास कोई जानकारी है तो भी बताएं। ऐसे लोगों को चिह्नित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। - उमेश भारती, औषधि निरीक्षक।
झांसी में मार्च से अब तक 785 वॉयल रेमडेसिविर की आई हैं। जिनका समस्त लेखाजोखा औषधि प्रशासन विभाग को रोज दिया जाता है। जहां तक मेरे संज्ञान में है, इंजेक्शन निर्धारित मूल्य पर ही बेचा जा रहा है। यदि कोई इस कालाबाजारी में लिप्त है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। जिला केमिस्ट एसोसिसएशन भी ऐसे लोगों के खिलाफ है। - नितिन मोदी, सचिव, जिला केमिस्ट एसोसिएशन।
विज्ञापन
कोरोना संक्रमण काल में रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर हो-हल्ला मचा है। इंजेक्शन का जबरदस्त टोटा है। वहीं, मांग खूब हो रही है। महामारी के इस दौर में जहां लगातार मौतें हो रही हैं, वहीं सांसों के सौदागर कालाबाजारी कर झांसी की जनता को लूटने में लगे हुए हैं। जिले के बयान बहादुर अफसर अपनी आंखों पर पर्दा डाले हुए हैं। अब तक एक भी ऐसी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे लगे कि प्रशासन कालाबाजारी रोकने का प्रयास कर रहा है। हां, प्रदेश के मुख्यमंत्री जरूर सख्त हैं। उन्होंने सीधे एनएसए की कार्रवाई करने के आदेश कर दिए हैं। मगर जब जिले के अफसर ही नाकाम होंगे, तो कालाबाजारी कैसे रुकेगी।
विज्ञापन
केस-1
कहां से लाता एक लाख, रख दिए जेवर गिरवी
महानगर के एक व्यक्ति को अपनी बहन के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत पड़ गई। बहन की सांसें ऑक्सीजन पर टिकी हुई थीं। इंजेक्शन से उसके ठीक होने की उम्मीद जगी तो ढूंढने लगा। एक व्यक्ति से संपर्क हुआ तो उसने एक लाख रुपये मांगे। भाई बोला इतने पैसे नहीं है, तो व्यक्ति ने कहीं से ले आओ। जेवर गिरवी रख शाम तक पैसे का इंतजाम किया। तब इंजेक्शन मिला।
विज्ञापन
केस-2
एक-एक लाख का इंजेक्शन खरीदा पर नहीं बची पत्नी
सिविल लाइन निवासी शिक्षक के पुत्र ने कोरोना पॉजिटिव अपनी पत्नी को बचाने के लिए पानी की तरह पैसा बहा दिया। डॉक्टर ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत बताई तो वो चारों तरफ से प्रयास करने लगा। इसी बीच, उसके संपर्क में एक व्यक्ति आया। उसने एक-एक लाख के दो इंजेक्शन उसे दिए। फिर एक इंजेक्शन सीएमओ ऑफिस से मिला। फिर भी उसकी पत्नी की जान नहीं बच सकी।
केस-3
डॉक्टर ने भी 50 हजार में खरीदा रेमडेसिविर
अंसल कॉलोनी में रहने वाले डॉक्टर ने ससुर को कोरोना संक्रमित होने पर अस्पताल में भर्ती किया। इलाज करने वाले चिकित्सक ने उनसे रेमडेसिविर इंजेक्शन मंगवाने के लिए कहा। डॉक्टर को कहीं पर भी इंजेक्शन नहीं मिला तो थक-हारकर उन्होंने दलाल से संपर्क किया। डॉक्टर होने के बावजूद दलाल ने उन्हें पहला इंजेक्शन 50 हजार, दूसरा 45 और बाकी 40-40 हजार रुपये में दिया।
केस-4
झांसी के ही एक युवक को अपनी भाई के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत पड़ गई। मेडिकल स्टोरों के चक्कर काटे, तो सबने कहा इंजेक्शन खत्म हो गया है। इसी बीच, किसी ने उसे एक दलाल का नंबर दिया। उसने दलाल से संपर्क साधा तो एक इंजेक्शन के 75 हजार रुपये मांगे। युवक ने कुछ पैसे कम करने को कहा तो मना कर दिया। बाद में उसने पैसे उधार लेकर इंजेक्शन खरीदा।
इतनी मारामारी फिर दलालों के पास कहां से आ रहे इंजेक्शन
रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर देशभर में मारामारी है। शासन की तरफ से भी मांग के अनुसार काफी कम इंजेक्शन स्वास्थ्य विभागा को उपलब्ध कराए जा पा रहे हैं। बड़ा सवाल ये है कि फिर दलालों के पास कहां से इतने इंजेक्शन आ जा रहे हैं। क्या ये नर्सिंगहोम और मेडिकल स्टोरों की सांठगांठ का नतीजा है। जानकारों ने बताया कि मरीज से इंजेक्शन मंगवाने के बावजूद कई बार लगाया ही नहीं जाता है। फिर यही इंजेक्शन वापस दलाल के पास पहुंचा जाता है, वो इसे दूसरे को बेच देता है। यही चेन चलती रहती है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव ने शासन-प्रशासन को घेरा
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव डॉ. सुधांशु त्रिपाठी ने झांसी में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी पर शासन-प्रशासन को घेरा। उन्होंने अमर उजाला में 29 अप्रैल को प्रकाशित खबर को ट्विट करते हुए लिखा कि लखनऊ से लेकर झांसी तक पूरे प्रदेश में यही हाल है। सीएम कह रहे हैं कि प्रदेश में हालात सुधर रहे हैं। प्रशासन को ऐसे लुटेरों पर तुरंत कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
औषधि प्रशासन विभाग में आकर सीधे शिकायत दर्ज कराएं। यदि किसी के पास कोई जानकारी है तो भी बताएं। ऐसे लोगों को चिह्नित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। - उमेश भारती, औषधि निरीक्षक।
झांसी में मार्च से अब तक 785 वॉयल रेमडेसिविर की आई हैं। जिनका समस्त लेखाजोखा औषधि प्रशासन विभाग को रोज दिया जाता है। जहां तक मेरे संज्ञान में है, इंजेक्शन निर्धारित मूल्य पर ही बेचा जा रहा है। यदि कोई इस कालाबाजारी में लिप्त है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। जिला केमिस्ट एसोसिसएशन भी ऐसे लोगों के खिलाफ है। - नितिन मोदी, सचिव, जिला केमिस्ट एसोसिएशन।