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रावण की कृपा से जल रहा रामकली और राजकुमारी का चूल्हा
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रावण का पुतला बनातीं ऐवट मार्केट की बच्चियां। अमर उजाला
झांसी। लंकापति रावण महाप्रकांड पंडित था, पर उसने माता सीता का हरण किया, इस कारण से प्रभु श्रीराम ने उसे मारा और इसी वजह से हम हर साल दशहरा पर रावण का पुतला जलाते हैं। ये बात तो हम सभी जानते हैं, लेकिन झांसी में रावण की कृपा से ही रामकली और राजकुमारी के घर का चूल्हा जल रहा है, दोनों को दो वक्त की रोटी मिल रही है। असल में पति की मौत के बाद ये दोनों महिलाएं छप्पर और मिट्टी के घर में रहकर रावण के पुतले बना रही हैं। इससे जो भी पैसा मिलता है उसी से इनका परिवार पल रहा है। बच्चों के स्कूल की फीस जा रही। दोनों महिलाएं झांसी में अलग-अलग तीन पीढ़ियों से रावण के पुतले बना रहे शहर के नामी कारीगरों की पत्नियां हैं। ये महिलाएं इस बार आर्डर पर 400 रुपये से लकर 25 हजार रुपये तक के पुतले बना रही हैं।
मां-बेटी मिलकर बना रहीं रावण का पुतला, मिल रहे आर्डर
झांसी के चतुरयाना मोहल्ले में रहने वाले बल्लू पुतलेबाज का नाम काफी मशहूर है। वह तीन-चार पीढ़ियों से अपने पिता व परदादा के साथ रावण के पुतले बनाने का काम करते थे। उनके हाथ की कारीगरी पूरी झांसी में मशहूर थी। कारोबार अच्छा चल रहा था, लेकिन कुछ वर्ष पहले उनकी मौत हो गई तो पत्नी राजकुमारी और उनकी इकलौती बेटी दीक्षा पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। राजकुमारी ने बताया कि पति बहुत अच्छे कारीगर थे। झांसी में उनके बनाए पुतले कई रामलीलाओं में जलाए जाते थे। बड़े-बड़े हजारों के आर्डर मिलते थे, लेकिन उनकी मौत के बाद घर का चूल्हा जलना और बेटी की पढ़ाई के लाले पड़ गए। ऐसे में उन्होंने पुश्तैनी काम को करने की हिम्मत जुटाई। इधर, दो साल कोरोना के कारण पुतले बनाने का आर्डर ही नहीं मिला, तो फूलमाला बनाकर किसी तरह गृहस्थी खींची, लेकिन इस वर्ष प्रभु श्रीराम की कृपा कहें या रावण की, पुतले बनाने का आर्डर मिल रहा है। वह और बेटी मिलकर रावण के पुतले तैयार कर रही हैं। इससे मिलने वाले पैसे से बेटी के स्कूल की फीस जा पा रही है और मां-बेटी को खाना मिल पा रहा। राजकुमारी ने बताया कि बेटी 7वीं कक्षा में पढ़ रही है। वह दोनों बड़े पुतलों के अलावा बच्चों व गलियों के लिए 400-500 रुपये के पुतले भी बना रही हैं।
पति और बेटे की मौत के बाद नाती संग तैयार कर रहीं 40 फुट तक का पुतला
झांसी के मशहूर पुतला बनाने वाले काशीराम और उनके बेटे कालीचरण की मौत के बाद काशीराम की बुजुर्ग पत्नी रामकली शहर में पारीछा के लिए 40 फुट का रावण का पुतला बना रहीं। रामकली बताती हैं कि पति और बेटे की मौत के बाद वह और उनकी बहू अकेली हो गई थीं। नाती मोहित कुशवाहा ने होश संभाला तो उसे यह हुनर सिखाया। अब दादी और नाती मिलकर लोगों की मांग के अनुसार पुतले तैयार कर रहे हैं। बेतवा क्लब, पारीछा और कई मोहल्लों के लिए रावण के छोटे-बड़े
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पुतले बना रहे हैं। इसमें 4 फुट से लेकर 40 फुट तक के पुतले तैयार किए जा रहे हैं। इनकी कीमत 500 से 22 से 25 हजार रुपये तक है।
गलियों के छोटू और बच्चियां गुल्लक के पैसों से बना रहे पुतले
एवट मार्केट और गणेश मढ़िया के साथ शहर में कई जगह बच्चे अपनी गुल्लक के पैसे से चंदाकर रावण के छोटे-छोटे पुतले बनाकर उसे सजा रहे हैं। इसमें लड़कियां भी पीछे नहीं हैं। वह भी अपनी सहेलियों के साथ पुतले सजाने में जुटीं हैं।
गणेश मढ़िया में शिव जी के प्राचीन मंदिर के पास मोहल्ले के बच्चे आलिक वर्मा, लकी रायकवार, तरुण, कार्तिक, मुकु न यादव, विवान, यश और क्रिश समेत कई बच्चे रावण का पुतला बना रहे हैं। इन बच्चों ने बताया कि सबने मिलकर 70-80 रुपये जोड़े हैं। पुतले के लिए घास फल मार्केट से दुकानदारों से लेकर मांग कर लाए और लकड़ी व पटाखे खरीदकर पुतला बना रहे। वहीं इलाके की छोटी-छोटी बच्चियों में सपना यादव, वर्षा और खुशबू ने बताया कि गुल्लक के पैसे बाजार से फोम और पन्नी खरीदकर छोटा सा पुतला तैयार कर रही हैं, इसमें पटाखे लगाकर दशहरा पर मैदान में जलाएंगे।
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मां-बेटी मिलकर बना रहीं रावण का पुतला, मिल रहे आर्डर
झांसी के चतुरयाना मोहल्ले में रहने वाले बल्लू पुतलेबाज का नाम काफी मशहूर है। वह तीन-चार पीढ़ियों से अपने पिता व परदादा के साथ रावण के पुतले बनाने का काम करते थे। उनके हाथ की कारीगरी पूरी झांसी में मशहूर थी। कारोबार अच्छा चल रहा था, लेकिन कुछ वर्ष पहले उनकी मौत हो गई तो पत्नी राजकुमारी और उनकी इकलौती बेटी दीक्षा पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। राजकुमारी ने बताया कि पति बहुत अच्छे कारीगर थे। झांसी में उनके बनाए पुतले कई रामलीलाओं में जलाए जाते थे। बड़े-बड़े हजारों के आर्डर मिलते थे, लेकिन उनकी मौत के बाद घर का चूल्हा जलना और बेटी की पढ़ाई के लाले पड़ गए। ऐसे में उन्होंने पुश्तैनी काम को करने की हिम्मत जुटाई। इधर, दो साल कोरोना के कारण पुतले बनाने का आर्डर ही नहीं मिला, तो फूलमाला बनाकर किसी तरह गृहस्थी खींची, लेकिन इस वर्ष प्रभु श्रीराम की कृपा कहें या रावण की, पुतले बनाने का आर्डर मिल रहा है। वह और बेटी मिलकर रावण के पुतले तैयार कर रही हैं। इससे मिलने वाले पैसे से बेटी के स्कूल की फीस जा पा रही है और मां-बेटी को खाना मिल पा रहा। राजकुमारी ने बताया कि बेटी 7वीं कक्षा में पढ़ रही है। वह दोनों बड़े पुतलों के अलावा बच्चों व गलियों के लिए 400-500 रुपये के पुतले भी बना रही हैं।
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पति और बेटे की मौत के बाद नाती संग तैयार कर रहीं 40 फुट तक का पुतला
झांसी के मशहूर पुतला बनाने वाले काशीराम और उनके बेटे कालीचरण की मौत के बाद काशीराम की बुजुर्ग पत्नी रामकली शहर में पारीछा के लिए 40 फुट का रावण का पुतला बना रहीं। रामकली बताती हैं कि पति और बेटे की मौत के बाद वह और उनकी बहू अकेली हो गई थीं। नाती मोहित कुशवाहा ने होश संभाला तो उसे यह हुनर सिखाया। अब दादी और नाती मिलकर लोगों की मांग के अनुसार पुतले तैयार कर रहे हैं। बेतवा क्लब, पारीछा और कई मोहल्लों के लिए रावण के छोटे-बड़े
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पुतले बना रहे हैं। इसमें 4 फुट से लेकर 40 फुट तक के पुतले तैयार किए जा रहे हैं। इनकी कीमत 500 से 22 से 25 हजार रुपये तक है।
गलियों के छोटू और बच्चियां गुल्लक के पैसों से बना रहे पुतले
एवट मार्केट और गणेश मढ़िया के साथ शहर में कई जगह बच्चे अपनी गुल्लक के पैसे से चंदाकर रावण के छोटे-छोटे पुतले बनाकर उसे सजा रहे हैं। इसमें लड़कियां भी पीछे नहीं हैं। वह भी अपनी सहेलियों के साथ पुतले सजाने में जुटीं हैं।
गणेश मढ़िया में शिव जी के प्राचीन मंदिर के पास मोहल्ले के बच्चे आलिक वर्मा, लकी रायकवार, तरुण, कार्तिक, मुकु न यादव, विवान, यश और क्रिश समेत कई बच्चे रावण का पुतला बना रहे हैं। इन बच्चों ने बताया कि सबने मिलकर 70-80 रुपये जोड़े हैं। पुतले के लिए घास फल मार्केट से दुकानदारों से लेकर मांग कर लाए और लकड़ी व पटाखे खरीदकर पुतला बना रहे। वहीं इलाके की छोटी-छोटी बच्चियों में सपना यादव, वर्षा और खुशबू ने बताया कि गुल्लक के पैसे बाजार से फोम और पन्नी खरीदकर छोटा सा पुतला तैयार कर रही हैं, इसमें पटाखे लगाकर दशहरा पर मैदान में जलाएंगे।

गणेश मढ़िया में रावण के पुतले बनाते बच्चे। अमर उजाला

पुतलेबाज काशीराम की पत्नी रामकली और नाति मोहित। अमर उजाला

रावण की खबर में....रावण का पुतला बनातीं बल्लू पुतलेबाज की पत्नी राजकुमारी और बेटी दीक्षा। अमर उजाल?