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Jhansi News: खाल उतारने से लेकर टुकड़े-टुकड़े करने तक की ख्वाहिशें जताते हैं मनोरोगी

Sat, 10 Jun 2023 12:07 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 10 Jun 2023 12:07 AM IST
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Psychopaths express desires ranging from skinning to dismemberment
प्रशांत शर्मा
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झांसी। पहले दिल्ली में श्रद्धा और फिर मुंबई में सरस्वती की हत्या कर शव के टुकड़े-टुकड़े करने की वारदात ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। हत्यारोपी किसी मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं या नहीं या फिर इन्होंने नशे की हालत में वारदात को अंजाम दिया। यह बता पाना तो मनोचिकित्सकों के लिए अभी मुश्किल है। मगर उनका कहना है कि एंटी सोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर यानी असामाजिक व्यक्तित्व विकार और सिजोफ्रेनिया के मरीज ऐसी घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं।
डॉक्टरों के पास हर महीने चार से पांच इन बीमारियों के मरीज आते हैं। झांसी और आसपास के जिलों के मरीजों से बातचीत के दौरान कई चौंकाने वाले मामले सामने आ चुके हैं। इसमें कोई अपनी प्रेमिका को कुल्हाड़ी से मारकर टुकड़े-टुकड़े करने की इच्छा जता चुका है तो कोई जानवर को मारकर उसकी खाल निकाल चुका है। जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. शिकाफा जाफरीन का कहना है कि असामाजिक व्यक्तित्व विकार का शिकार वे लोग हो जाते हैं, जिन्हें बचपन से प्यार न मिला हो या फिर बचपन में वो शोषण का शिकार हुए हों। इनकी मानवीय संवेदना शून्य हो जाती है। दूसरों को नुकसान पहुंचाने में इन्हें मजा आता है। ऐसे लोग दूसरों पर विश्वास भी नहीं करते हैं। बड़ी से बड़ी घटना को अंजाम देने के बाद भी इन्हें पश्चाताप तक नहीं होता है। ऐसे लोगों की पहचान तब हो पाती है, जब वे किसी घटना को अंजाम दे देते हैं। वहीं, मनोचिकित्सक डॉ. अमन किशाेर ने बताया कि सिजोफ्रेनिया के मरीज के कान में आवाजें सुनाई देती हैं। उसे अपने खिलाफ साजिश होने का डर रहता है। ऐसे में वो कातिल तक बन जाता है। समय पर इलाज शुरू हो जाए तो असामाजिक व्यक्तित्व विकार से पीड़ित या फिर सिजोफ्रेनिया के मरीज ठीक हो सकते हैं। इसलिए परिजनों को अपने बच्चे या किसी परिजन के बदलते स्वभाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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इन बातों का रखें ध्यान
- बचपन में बच्चे से दुर्व्यवहार न करें।
- उसकी गलत हरकतों को नजरअंदाज न करें।
- चोरी या किसी को मारकर आया तो बचाव न करें।
- ध्यान दें कि बच्चा नशे का लती तो नहीं हो गया है।
- कहीं छोटी उम्र में ही वो पैसे के लिए फ्रॉड तो नहीं कर रहा।

केस-1
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टूथ ब्रश, पेंच से लेकर कील तक खा गया
मनोचिकित्सकों के पास एक हैरान कर देने वाला मामला पहुंचा, जिसमें युवक टूथ ब्रश, पेंच से लेकर कील तक खा जाता था। परिजन उसे मनोचिकित्सक के पास लेकर पहुंचे और डॉक्टर को पूरी जानकारी दी। अल्ट्रासाउंड कराने पर युवक के पेट में कई तरह की चीजें होने की पुष्टि हुई। उसका भोपाल में ऑपरेशन किया गया। इसके बाद मनोचिकित्सक के पास इलाज शुरू हुआ तो फिर उसने कील आदि खाना छोड़ दिया। डॉक्टर ने बताया कि वो सिजोफ्रेनिया का मरीज था।
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केस-2
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बिल्ली को मारकर उसकी खाल निकाल दी
ललितपुर निवासी युवक का स्वभाव दो-तीन साल से बदल गया था। उसने जानवरों को मारना शुरू कर दिया। एक दिन घर में आई बिल्ली को उसने पकड़कर मार डाला। फिर उसकी खाल निकालने लगा। ऐसा करते उसकी मां ने देख लिया। वो इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल लेकर आईं। बताया कि उनका बेटा तंत्र-मंत्र के चक्कर में फंस गया। श्मशान चला जाता है। डॉक्टरों ने इंजेक्शन और दवाओं के जरिए इलाज शुरू किया। अब मरीज पहले से काफी ठीक है।


केस-3
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प्रेमिका को मारने के लिए कुल्हाड़ी को देता रहा धार
झांसी के किशोर का अपनी प्रेमिका से विवाद हो गया। किशोर ने जान से मारने की धमकी दी तो प्रेमिका ने पिता से शिकायत कर दी। इस पर पुलिस ने उसे जेल भेज दिया। जब किशोर जेल से छूटकर आया तो उसने प्रेमिका को मारने का मन बना लिया। एक दिन वह कुल्हाड़ी को धार दे रहा था तो मां ने देख लिया। पूछताछ की तो कहा वह इसी कुल्हाड़ी से प्रेमिका के टुकड़े-टुकड़े कर देगा। मां घबराकर उसे किसी तरह मनोचिकित्सक के पास लाई और उसका इलाज कराया।
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