{"_id":"612008528ebc3e79d76179cb","slug":"protection-and-burning-system-will-increase-the-speed-of-the-train-jhansi-news-jhs2023729106","type":"story","status":"publish","title_hn":"ट्रेन की गति बांधेगा प्रोटेक्शन एंड बर्निंग सिस्टम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ट्रेन की गति बांधेगा प्रोटेक्शन एंड बर्निंग सिस्टम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। भोपाल-दिल्ली मुख्य ट्रैक पर धौलपुर-झांसी-बीना के बीच पटरियों पर जल्द ही रेल सुरक्षा और चेतावनी प्रणाली (ट्रेन प्रोटेक्शन एंड बर्निंग सिस्टम) लगने जा रही है। इस प्रणाली की मदद से चालक को गति पर नियंत्रण करने में मदद मिलेगी। अगर सेक्शन में आगे लाल सिग्नल है और ट्रेन की गति तेज है तो इस प्रणाली की मदद से स्थितियों के हिसाब से अपने आप ही गाड़ी के ब्रेक लग जाएंगे। रेलटेल इस काम को पूरा कराएगा।
रेलवे ने लाल सिग्नल पार करने जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए अब ट्रेन प्रोटेक्शन एंड बर्निंग सिस्टम को अलग- अलग मंडलों में लगाना शुरू कर दिया है। इसमें पटरियों के बीच लोहे की पट्टियों की एक जाली को लगाया जाता है, जो जीपीएस सॉफ्टवेयर की तरह काम करती है। उसके ऊपर से ट्रेन के गुजरते ही इंजन के कैब में (चालक व परिचालकों के गाड़ी चलाने का स्थान) में लगे मॉनीटर से उसका संपर्क हो जाता है। मॉनीटर पर चालक को पता लग जाता है कि वह कितनी गति से मौके से निकल रहा है।
अगर आगे लाल सिग्नल है और चालक ओवर स्पीड चल रहा है तो इस सिस्टम की मदद से अपने आप ब्रेक लगना शुरू हो जाएंगे। ट्रेन लाल सिग्नल के पहले रुक जाएगी। इमरजेंसी ब्रेक अपने आप काम करने लगते हैं। चाहे उस समय ट्रेन की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा ही क्यों न हो। इस प्रणाली का उपयोग यूनाइटेड किंगडम व आस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी किया जा रहा है। इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि रेलटेल इस प्रणाली को लगाने का काम कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
रेलवे ने लाल सिग्नल पार करने जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए अब ट्रेन प्रोटेक्शन एंड बर्निंग सिस्टम को अलग- अलग मंडलों में लगाना शुरू कर दिया है। इसमें पटरियों के बीच लोहे की पट्टियों की एक जाली को लगाया जाता है, जो जीपीएस सॉफ्टवेयर की तरह काम करती है। उसके ऊपर से ट्रेन के गुजरते ही इंजन के कैब में (चालक व परिचालकों के गाड़ी चलाने का स्थान) में लगे मॉनीटर से उसका संपर्क हो जाता है। मॉनीटर पर चालक को पता लग जाता है कि वह कितनी गति से मौके से निकल रहा है।
विज्ञापन
अगर आगे लाल सिग्नल है और चालक ओवर स्पीड चल रहा है तो इस सिस्टम की मदद से अपने आप ब्रेक लगना शुरू हो जाएंगे। ट्रेन लाल सिग्नल के पहले रुक जाएगी। इमरजेंसी ब्रेक अपने आप काम करने लगते हैं। चाहे उस समय ट्रेन की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा ही क्यों न हो। इस प्रणाली का उपयोग यूनाइटेड किंगडम व आस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी किया जा रहा है। इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि रेलटेल इस प्रणाली को लगाने का काम कर रहा है।
विज्ञापन