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यात्रियों के लिए पिनकोड बना मुसीबत, आरक्षण कर्मियों से नहीं मिलती मदद

Sat, 14 Aug 2021 12:30 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 14 Aug 2021 12:30 AM IST
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Pincode becomes trouble for passengers, reservation personnel do not get help
झांसी।बुंदेलखंड के मजदूर व अनभिज्ञ यात्रियों के लिए आरक्षण फार्म में पिनकोड समेत मांगी जाने वाले जानकारियां मुसीबत बन गईं हैं। आरक्षण कर्मचारी भी उनकी कोई मदद नहीं करते हैं। इसके लिए रेलवे की तरफ से भी जानकारी देने के लिए कोई अतिरिक्त इंतजाम नहीं किया गया है। जबकि, आरक्षण कार्यालय में प्रतिदिन 1500 से अधिक लोग टिकट बनवाने पहुंच रहे हैं।
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कोरोना महामारी के कारण 23 मार्च 2020 के बाद से नियमित ट्रेनों को स्पेशल बनाकर चलाया जा रहा है। नियमित ट्रेनों में आरक्षण फार्म में नाम, पता, मोबाइल नंबर और उम्र जैसी जानकारियां ही भरवाई जातीं थीं। लेकिन कोरोना महामारी के चलते कंप्यूटर में यात्री के जहां जा रहा है उस राज्य, जिले व पोस्ट ऑफिस का नाम तथा पिनकोड नंबर भी अनिवार्य रूप से पूछा जा रहा है। जनरल कोच में सफर करने के लिए भी आरक्षण कराना पड़ रहा है। रेलवे का मानना है कि ये अतिरिक्त जानकारियां भरवाने से यात्री का पता लगाना आसान हो जाएगा। अगर वह जांच के दौरान कोरोना पीड़ित निकलता है या उसके कोच में कोई दूसरा यात्री। तो ऐसे में संबंधित यात्रियों को भी क्वारंटीन करने में आसानी होती है। मगर बुंदेलखंड के यात्रियों के लिए यह अतिरिक्त जानकारियां मुसीबत बन गईं हैं।
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दरअसल, जनरल कोचों में सफर करने वाले अधिकांश यात्रियों को आरक्षण फार्म भरना नहीं आता है। दूसरा उनको जहां जाना है वहां का कोड नंबर पता नहीं होता है। ऐसे में न तो उनको आरक्षण कर्मियों की मदद मिल पाती है और दूसरे यात्री भी फार्म भरने से बचते हैं।
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- आरक्षण कर्मी से पिनकोड नंबर पूछा जा सकता है। अगर मदद नहीं मिलती है तो आरक्षण सुपरवाइजर से संपर्क कर समस्या दूर की जा सकती है।
मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।
मुझे हैदराबाद जाना है। वहां का पिनकोड नंबर पता नहीं है। बिना पिनकोड नंबर के बाबू टिकट बनाने को तैयार नहीं है।
छेदी शर्मा, बलिया।
आरक्षण फार्म में मांगी जाने वालीं जानकारियों ने यात्रियों को परेशान कर रखा है। इस प्रक्रिया को सरल होना चाहिए।
महेंद्र शर्मा, जतारा।
आरक्षण कर्मी बार- बार फार्म में कमियां निकालकर भगा देते हैं। नई व्यवस्था से आरक्षण कराना परेशानी बन गया है।
हबीब उर रहमान, ग्वालियर।
जनरल कोच के टिकट पूर्व की तरह ही मिलना चाहिए, ताकि अनभिज्ञ यात्रियों को परेशान न होना पड़े। रेलवे को उनकी समस्या समझनी चाहिए।
केके शर्मा, झांसी।
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