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कागजी सफर पूरा, धरातल पर उतरने को तैयार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 05 May 2016 12:36 AM IST
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ken link plan, jhansi news
- फोटो : demo
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झांसी। सूखे से जूझ रहे बुंदेलखंड में जल संकट के स्थायी समाधान के लिए तैयार की गई केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी केन - बेतवा लिंक परियोजना का कागजी सफर पूरा होने के बाद अब धरातल पर काम शुरू हो गया है।
हाल में ही आई राष्ट्रीय वन विभाग की टीम ने परियोजना के अंतर्गत आने वाले दौधन बांध की जमीन के आसपास पर्यावरण की स्थिति का निरीक्षण किया। साथ ही बांध की ऊंचाई भी कम करने की सलाह दी है। उम्मीद है कि जल्द ही इस परियोजना का शिलान्यास हो जाएगा।
पिछले माह केंद्रीय मंत्री उमा भारती द्वारा राजघाट कालोनी स्थित नदी बेतवा परिषद कार्यालय प्रांगण में केन- बेतवा गठजोड़ परियोजना के मॉडल के उद्घाटन के साथ ही साफ हो गया था कि इस परियोजना पर तेजी से काम होगा। हाल में ही राष्ट्रीय वन एवं पर्यावरण विभाग व राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण नई दिल्ली के अफसरों ने मध्य प्रदेश के निकट खजुराहो के निकट गंगऊ वियर से ढाई किलोमीटर दूर बनने वाले दौधन बांध साइड का निरीक्षण किया।
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इस बांध के डूब क्षेत्र में खजुराहो के निकट के दस गांव व पन्ना का टाइगर हिल्स का कुछ हिस्सा भी आ रहा है। अफसरों ने तीन दिनों तक बांध की जमीन के आसपास पर्यावरण की समस्या को देखा व उनको बिंदुवार अंकित किया।
बांध की ऊंचाई से गिद्धों के घोंसले न टूटे, इसके लिए बांध की ऊंचाई कम करने की सलाह दी गई। टीम में मुख्य अभियंता आर के जैन, अधीक्षण अभियंता ओ पी सिंह कुशवाहा आदि अफसर शामिल रहे।
‘दौधन बांध की ऊंचाई कम करने के संबंध में राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण उचित जवाब दे रहा है। जल्द ही परियोजना का शिलान्यास होगा।’
सी पी सिंह सेंगर
अधिशासी अभियंता नदी बेतवा परिषद।
यह है केन- बेतवा परियोजना
बुंदेलखंड की सूखी धरती को हरा-भरा करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2008 में केन-बेतवा लिंक परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया था। बाद में बुंदेलखंड के सूखा क्षेत्र के विकास के लिए इसे प्रधानमंत्री के पैकेज में शामिल कर लिया गया।
इस परियोजना की अनुमानित लागत 9393 करोड़ रुपये है। परियोजना के तहत लिंक नहर की कुल लंबाई 221 किलोमीटर होगी, इसमें दो किलोमीटर की सुरंग भी बनेगी। बरसात में केन नदी से आने वाले पानी को रोकने के लिए खजुराहो के निकट गंगऊ वियर से ढाई किलोमीटर दूर दौधन बांध बनेगा। 77 मीटर ऊंचे इस बांध की क्षमता 2953 मीट्रिक घन मीटर होगी।
बांध पर 78 मेगावाट क्षमता की दो विद्युत उत्पादन इकाइयां भी स्थापित होंगी। इनमें एक उत्पादन इकाई बांध पर और दूसरी दो किलोमीटर दूर बनने वाली सुरंग के पास स्थापित होगी। यहां से आने वाला पानी बरुआसागर झील में मिलने के बाद बेतवा नदी में पहुंचेगा। परियोजना के अंतर्गत 1700- 1700 मिलियन घन मीटर पानी यूपी व एमपी को मिलेगा।
परियोजना से यह होंगे लाभ
इस परियोजना से मध्यप्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़ एवं पन्ना जिले की 3,69,881 हेक्टेअर तथा उत्तर प्रदेश के महोबा, बांदा व झांसी जिले की 2,65,780 हेक्टेअर भूमि सिंचित होगी। इसमें झांसी जिले की 6,35,661 हेक्टेअर कृषि भूमि शामिल है। इसके अलावा इस परियोजना के मार्ग में पड़ने वाली 13.42 लाख जनसंख्या को 49 मिलियन क्यूबिक मीटर पेयजल भी उपलब्ध होगा।
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हाल में ही आई राष्ट्रीय वन विभाग की टीम ने परियोजना के अंतर्गत आने वाले दौधन बांध की जमीन के आसपास पर्यावरण की स्थिति का निरीक्षण किया। साथ ही बांध की ऊंचाई भी कम करने की सलाह दी है। उम्मीद है कि जल्द ही इस परियोजना का शिलान्यास हो जाएगा।
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पिछले माह केंद्रीय मंत्री उमा भारती द्वारा राजघाट कालोनी स्थित नदी बेतवा परिषद कार्यालय प्रांगण में केन- बेतवा गठजोड़ परियोजना के मॉडल के उद्घाटन के साथ ही साफ हो गया था कि इस परियोजना पर तेजी से काम होगा। हाल में ही राष्ट्रीय वन एवं पर्यावरण विभाग व राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण नई दिल्ली के अफसरों ने मध्य प्रदेश के निकट खजुराहो के निकट गंगऊ वियर से ढाई किलोमीटर दूर बनने वाले दौधन बांध साइड का निरीक्षण किया।
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इस बांध के डूब क्षेत्र में खजुराहो के निकट के दस गांव व पन्ना का टाइगर हिल्स का कुछ हिस्सा भी आ रहा है। अफसरों ने तीन दिनों तक बांध की जमीन के आसपास पर्यावरण की समस्या को देखा व उनको बिंदुवार अंकित किया।
बांध की ऊंचाई से गिद्धों के घोंसले न टूटे, इसके लिए बांध की ऊंचाई कम करने की सलाह दी गई। टीम में मुख्य अभियंता आर के जैन, अधीक्षण अभियंता ओ पी सिंह कुशवाहा आदि अफसर शामिल रहे।
‘दौधन बांध की ऊंचाई कम करने के संबंध में राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण उचित जवाब दे रहा है। जल्द ही परियोजना का शिलान्यास होगा।’
सी पी सिंह सेंगर
अधिशासी अभियंता नदी बेतवा परिषद।
यह है केन- बेतवा परियोजना
बुंदेलखंड की सूखी धरती को हरा-भरा करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2008 में केन-बेतवा लिंक परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया था। बाद में बुंदेलखंड के सूखा क्षेत्र के विकास के लिए इसे प्रधानमंत्री के पैकेज में शामिल कर लिया गया।
इस परियोजना की अनुमानित लागत 9393 करोड़ रुपये है। परियोजना के तहत लिंक नहर की कुल लंबाई 221 किलोमीटर होगी, इसमें दो किलोमीटर की सुरंग भी बनेगी। बरसात में केन नदी से आने वाले पानी को रोकने के लिए खजुराहो के निकट गंगऊ वियर से ढाई किलोमीटर दूर दौधन बांध बनेगा। 77 मीटर ऊंचे इस बांध की क्षमता 2953 मीट्रिक घन मीटर होगी।
बांध पर 78 मेगावाट क्षमता की दो विद्युत उत्पादन इकाइयां भी स्थापित होंगी। इनमें एक उत्पादन इकाई बांध पर और दूसरी दो किलोमीटर दूर बनने वाली सुरंग के पास स्थापित होगी। यहां से आने वाला पानी बरुआसागर झील में मिलने के बाद बेतवा नदी में पहुंचेगा। परियोजना के अंतर्गत 1700- 1700 मिलियन घन मीटर पानी यूपी व एमपी को मिलेगा।
परियोजना से यह होंगे लाभ
इस परियोजना से मध्यप्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़ एवं पन्ना जिले की 3,69,881 हेक्टेअर तथा उत्तर प्रदेश के महोबा, बांदा व झांसी जिले की 2,65,780 हेक्टेअर भूमि सिंचित होगी। इसमें झांसी जिले की 6,35,661 हेक्टेअर कृषि भूमि शामिल है। इसके अलावा इस परियोजना के मार्ग में पड़ने वाली 13.42 लाख जनसंख्या को 49 मिलियन क्यूबिक मीटर पेयजल भी उपलब्ध होगा।