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किसानों के सब्र का बांध टूटा, गुस्सा फूटा

Fri, 22 Jul 2016 01:09 AM IST
Jhansi
Jhansi Updated Fri, 22 Jul 2016 01:09 AM IST
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Patience farmers dam broken, Unleashes Ire
किसानों के सब्र का बांध टूटा, गुस्सा फूटा - फोटो : Amar Ujala
झांसी। सिंचाई विभाग की नजर में ठंडा पड़ चुका पथरई, लखेरी डूब क्षेत्र से प्रभावित किसानों का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। बुंदेलखंड किसान पंचायत ने प्रभावित किसानों के साथ बृहस्पतिवार से सिंचाई विभाग के बेतवा भवन कार्यालय में आंदोलन शुरू कर दिया। शुक्रवार से किसान क्रमिक अनशन शुरू करेंगे।  
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सिंचाई विभाग ने पथरई एवं लखेरी बांध का निर्माण सन 2005 में पूरा कर लिया था, लेकिन अभी किसानों को उनका जायज मुआवजा नहीं मिल सका है। इसमें पथरई बांध के डूब क्षेत्र में आ रहे मजरा, विजयगढ़ व इमलिया गांव के किसानों के छूटे बालिग परिवारों को शामिल कर अनुकंपा राशि एवं प्लाट अभी तक नहीं दिए गए हैं। और न ही छूटे पेड़ पौधे, बंधी, कुआं आदि का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिया गया। लखेरी बांध के प्रभावित ग्राम बुड़ाई, बचेरा, गढ़वा, रेवन, महेवा के किसानों को अभी तक विस्थापित नहीं किया गया और न ही प्लाट का आवंटन और न मकान का मुआवजा दिया गया। इससे बरसात में बांध भरने पर पूरे गांव के मकानों में पानी भर जाता है। किसान हर बार आंदोलन करते हैं और हर बार उन्हें आश्वासन दे दिया जाता है।
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 बृहस्पतिवार से नाराज प्रभावित क्षेत्रों के किसानों ने बुंदेलखंड किसान पंचायत के अध्यक्ष गौरी शंकर बिदुआ के नेतृत्व में सिंचाई विभाग के बेतवा भवन कार्यालय में आज से अनशन शुरू कर दिया। हालांकि इस बीच किसानों से वार्ता करने के लिए अधिशासी अभियंता (पंचम) एके निरंजन, सहायक अभियंता यूबी सिंह, आर कुमार मौके पर पहुंचे, मगर कोई हल नहीं निकल सका।  
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बांधों के बनाने का उद्देश्य भी नहीं हो रहा पूरा
सिंचाई विभाग ने जिस उद्देश्य से दोनों बांधों का निर्माण कराया था। वह उद्देश्य भी अभी तक पूरा नहीं हो सका है। दरअसल जब तक किसान गांव से विस्थापित नहीं होंगे, तब तक दोनों बांधों को क्षमता के साथ भरना संभव नहीं है। बांध न भरने से संबंधित क्षेत्र की सिंचाई प्रभावित हो रही है।

जमीन का कम दिया गया मुआवजा
ग्राम बचेरा निवासी रमेश का कहना है कि उन्हें एक बीघा जमीन का मुआवजा पच्चीस हजार रुपये ही दिया गया, जबकि एक लाख रुपये बीघा मिलना चाहिए था। परिवार के बालिग सदस्यों का भी अभी तक मुआवजा नहीं मिल सका है। बांध बनने के बाद से सिर्फ मुसीबतों का सामना कर रहे है।

कुछ लोगों को ही दिया नया घर
ग्राम बचेरा निवासी मनोज कुमार ने बताया कि गांव के कुछ लोगों को ही अब तक नए घर दिए गए हैं, बाकी को एक-एक दिन काटना मुश्किल हो रहा है। दबाव में उनसे जमीन की रजिस्ट्री करवाई गई, जिसका खामियाजा अब तक भुगत रहे हैं।

गांव में हो रहा जलभराव
ग्राम बुढ़ार निवासी ईश्वर दास ने बताया कि विस्थापन न होने के कारण उनको गांव के ही घर में रहना पड़ रहा है। बारिश से गांव में जल भराव हो गया है। इससे सांप-बिच्छू घर के अंदर घुस रहे हैं। बच्चे घर से बाहर तक नहीं निकल पा रहे हैं।


हर साल हो रहा नुकसान
ग्राम बुढाई निवासी बृज भूषण कुशवाहा ने कहा कि मकान, कुओं, बंधियों, फलदार पेड़ों आदि का मुआवजा न मिलने से हर साल उन्हें एक लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। हम भीख नहीं अपना हक मांगने आए हैं। जब तक उनका पूरा भुगतान नहीं होगा, अनशन जारी रहेगा।
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