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परिवहन विभाग की सेवाएं ऑनलाइन, दलालों पर नहीं लगी लगाम
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जिला परिवाहन कार्यालय के बाहर लगे बस्ते। अमर उजाला
परिवहन विभाग की सेवाएं ऑनलाइन, दलालों पर नहीं लगी लगाम
झांसी। प्रदेश सरकार ने परिवहन विभाग की अधिकांश सेवाओं को ऑनलाइन कर दिया है, लेकिन विभाग को दलालों के चंगुल से मुक्ति नहीं मिल पा रही है। आलम यह है कि ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर वाहन हस्तांतरण और परमिट, नवीनीकरण समेत तमाम काम दलालों के जरिए ही हो रहे हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान ही आवेदक को तमाम प्रलोभन देकर वसूली की जाती है। वहीं विभागीय अफसरों की अनदेखी के चलते सरकार की योजना फेल हो रही है। अमर उजाला की टीम ने शनिवार को परिवहन विभाग के दफ्तर में योजनाओं की हकीकत जानी।
ढाई हजार में बन रहा ड्राइविंग लाइसेंस
सरकार ने लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए 200 रुपये और परमानेंट लाइसेंस के लिए 300 रुपये तय की है। इसके लिए निर्धारित टेस्ट प्रक्रिया, बायोमेट्रिक प्रणाली और ड्राइविंग टेस्ट देना होता है। विभाग में दलाल यह काम 2500 रुपये लेकर आसानी से करा देते हैं। इसके लिए आवेदक को न तो ड्राइविंग टेस्ट देना होता है और न ही ऑनलाइन टेस्ट होता है। केवल आवेदक को बायोमेट्रिक प्रक्रिया के लिए आना होता है। वहीं ड्राइविंग लाइसेंस के लिए स्लॉट तक दलाल अपने हिसाब से तय करा लेते हैं। इसके साथ ही ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल का दो सौ रुपये शुल्क है। जबकि दलाल इसे एक हजार रुपये में करा देते हैं। कार्यालय में घूम रहे एक दलाल रवि कुमार ने बताया कि बस दस्तावेज देने होंगे और स्लॉट मिलने पर बायोमेट्रिक देने आना होगा। इसके बाद लाइसेंस घर पहुंच जाएगा।
वाहन हस्तांतरण के लिए एक हजार की वसूली
वाहन को हस्तांतरण कराने के लिए भी दलालों ने रेट फिक्स किए हुए हैं। परिवहन कार्यालय के बाहर छोटे-छोटे काउंटर लगाकर और वाहनों में पूरा खेल चलता है। जिन कामों के लिए आवेदक एक-एक महीने तक भटकते हैं, वे काम दलाल आसानी से कुछ दिनों में कराने का दावा करते हैं। हमने एक और दलाल उमेश कुमार से वाहन हस्तांतरण को लेकर बात की, तो उसने बताया कि जहां से गाड़ी हस्तांतरण होनी है, वहां की एनओसी और अन्य दस्तावेज के साथ एक हजार रुपये में यह काम सात दिन में हो जाएगा। जबकि सरकार ने हर वाहन के डेढ़ सौ रुपये से लेकर 750 रुपये तक शुल्क तय किया है।
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फिटनेस में भी चलता है खेल
आरटीओ कार्यालय में रोज करीब 50 से अधिक वाहन फिटनेस के लिए पहुंचते हैं। यहां पर भी दलालों का पूरा राज कायम है। सरकार ने फिटनेस के लिए 400 रुपये से लेकर 600 रुपये तक शुल्क तय किया है। लेकिन दलाल इसके लिए वाहन स्वामियों से एक हजार रुपये वसूल करते हैं। दलाल ही वाहन स्वामी के कागजात लेकर विभाग के पटलों पर पहुंचते हैं। इन पर लगाम लगाने में विभाग पूरी तरह से नाकाम है।
जटिल प्रक्रिया बन रही आफत
प्रदेश सरकार ने परिवहन विभाग की सेवाएं ऑनलाइन भले ही कर दी हैैं, लेकिन विभाग में होने वाले तमाम आवेदन पत्र में काफी जटिलताएं हैं। हालात यह हैं कि ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर वाहन नवीनीकरण कराने का आवेदन पत्र आवेदक खुद भर नहीं सकते। इसके चलते आवेदकों को दलालों की शरण लेनी पड़ती है।
वर्जन
विभाग की सभी योजनाएं ऑनलाइन चल रही हैं। आवेदक बाहर से ऑनलाइन आवेदन करते हैं। इसके बाद तय प्रक्रिया के तहत पूरा काम होता है। दलालों का प्रवेश कार्यालय में बंद है। अगर ऐसा हो रहा है, तो जांच कराई जाएगी। साथ ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। सत्येंद्र कुमार, एआरटीओ
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झांसी। प्रदेश सरकार ने परिवहन विभाग की अधिकांश सेवाओं को ऑनलाइन कर दिया है, लेकिन विभाग को दलालों के चंगुल से मुक्ति नहीं मिल पा रही है। आलम यह है कि ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर वाहन हस्तांतरण और परमिट, नवीनीकरण समेत तमाम काम दलालों के जरिए ही हो रहे हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान ही आवेदक को तमाम प्रलोभन देकर वसूली की जाती है। वहीं विभागीय अफसरों की अनदेखी के चलते सरकार की योजना फेल हो रही है। अमर उजाला की टीम ने शनिवार को परिवहन विभाग के दफ्तर में योजनाओं की हकीकत जानी।
ढाई हजार में बन रहा ड्राइविंग लाइसेंस
सरकार ने लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए 200 रुपये और परमानेंट लाइसेंस के लिए 300 रुपये तय की है। इसके लिए निर्धारित टेस्ट प्रक्रिया, बायोमेट्रिक प्रणाली और ड्राइविंग टेस्ट देना होता है। विभाग में दलाल यह काम 2500 रुपये लेकर आसानी से करा देते हैं। इसके लिए आवेदक को न तो ड्राइविंग टेस्ट देना होता है और न ही ऑनलाइन टेस्ट होता है। केवल आवेदक को बायोमेट्रिक प्रक्रिया के लिए आना होता है। वहीं ड्राइविंग लाइसेंस के लिए स्लॉट तक दलाल अपने हिसाब से तय करा लेते हैं। इसके साथ ही ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल का दो सौ रुपये शुल्क है। जबकि दलाल इसे एक हजार रुपये में करा देते हैं। कार्यालय में घूम रहे एक दलाल रवि कुमार ने बताया कि बस दस्तावेज देने होंगे और स्लॉट मिलने पर बायोमेट्रिक देने आना होगा। इसके बाद लाइसेंस घर पहुंच जाएगा।
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वाहन हस्तांतरण के लिए एक हजार की वसूली
वाहन को हस्तांतरण कराने के लिए भी दलालों ने रेट फिक्स किए हुए हैं। परिवहन कार्यालय के बाहर छोटे-छोटे काउंटर लगाकर और वाहनों में पूरा खेल चलता है। जिन कामों के लिए आवेदक एक-एक महीने तक भटकते हैं, वे काम दलाल आसानी से कुछ दिनों में कराने का दावा करते हैं। हमने एक और दलाल उमेश कुमार से वाहन हस्तांतरण को लेकर बात की, तो उसने बताया कि जहां से गाड़ी हस्तांतरण होनी है, वहां की एनओसी और अन्य दस्तावेज के साथ एक हजार रुपये में यह काम सात दिन में हो जाएगा। जबकि सरकार ने हर वाहन के डेढ़ सौ रुपये से लेकर 750 रुपये तक शुल्क तय किया है।
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फिटनेस में भी चलता है खेल
आरटीओ कार्यालय में रोज करीब 50 से अधिक वाहन फिटनेस के लिए पहुंचते हैं। यहां पर भी दलालों का पूरा राज कायम है। सरकार ने फिटनेस के लिए 400 रुपये से लेकर 600 रुपये तक शुल्क तय किया है। लेकिन दलाल इसके लिए वाहन स्वामियों से एक हजार रुपये वसूल करते हैं। दलाल ही वाहन स्वामी के कागजात लेकर विभाग के पटलों पर पहुंचते हैं। इन पर लगाम लगाने में विभाग पूरी तरह से नाकाम है।
जटिल प्रक्रिया बन रही आफत
प्रदेश सरकार ने परिवहन विभाग की सेवाएं ऑनलाइन भले ही कर दी हैैं, लेकिन विभाग में होने वाले तमाम आवेदन पत्र में काफी जटिलताएं हैं। हालात यह हैं कि ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर वाहन नवीनीकरण कराने का आवेदन पत्र आवेदक खुद भर नहीं सकते। इसके चलते आवेदकों को दलालों की शरण लेनी पड़ती है।
वर्जन
विभाग की सभी योजनाएं ऑनलाइन चल रही हैं। आवेदक बाहर से ऑनलाइन आवेदन करते हैं। इसके बाद तय प्रक्रिया के तहत पूरा काम होता है। दलालों का प्रवेश कार्यालय में बंद है। अगर ऐसा हो रहा है, तो जांच कराई जाएगी। साथ ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। सत्येंद्र कुमार, एआरटीओ