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जीतने वाले उम्मीदवार भी नहीं बचा सके जमानत
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झांसी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जीत हासिल करने वाले उम्मीदवार भी अपनी जमानत नहीं बचा सके। तयशुदा वोट न पाने की वजह से इन उम्मीदवारों की भी जमानत जब्त हो गई। वहीं, जनपद में प्रधान पद के 17 उम्मीदवार ऐसे भी रहे जिन्होंने दो सौ से कम वोट पाने के बावजूद जीत हासिल कर ली।
प्रावधानों के मुताबिक कुल वैध मतदान का न्यूनतम बीस फीसदी मत हासिल करने वाले उम्मीदवारों की ही जमानत वापस होती है लेकिन, जनपद में 59 विजयी उम्मीदवार ऐसे रहे, जिनको इतने मत हासिल नहीं हुए। इस चुनाव में जनपद में कुल 80 प्रतिशत मतदान हुआ। प्रत्येक ग्राम पंचायतवार भी 75-85 प्रतिशत तक मतदान हुआ लेकिन, ग्राम प्रधान पद के तमाम विजयी उम्मीदवारों को बेहद कांटे के मुकाबले में जीत हासिल हुई। अधिकांश पंचायतों में पांच से अधिक उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। इस वजह से बड़े पैमाने पर मत विभाजन हुआ। प्रत्येक उम्मीदवार के खाते में अच्छा-खासा वोट आने से न सिर्फ जीत का अंतर बेहद कम हो गया बल्कि विजयी उम्मीदवार का मत प्रतिशत भी काफी कम रहा। करगुवां, नंदसिया, सिमरिया, खजरा खुर्द, मारकुवां, लुधियाई, चिरौरा आदि ग्राम पंचायतों में विजयी उम्मीदवार का मत प्रतिशत 20 प्रतिशत के करीब रहा। वहीं, कई ग्राम पंचायतों में दो सौ वोट से भी कम वोट पाकर उम्मीदवार ग्राम प्रधान पद के लिए निर्वाचित हो गए। चिरगांव ब्लॉक के मिरौना में क्रांति 143 वोट, सिमरिया में विनोद 193 वोट, लुहरगांव में जितेंद्र सिंह 197 वोट, तुर्कालहचुरा में प्रदीप कुमार 176 वोट, अकसेव में राहुल 153 वोट, धवारा में किरण देवी 191 वोट, सतौरा में लाजी 146 वोट, बसोवई में लक्ष्मी देवी 178 वोट, मुस्तरा में प्रमोद कुमारी 181 वोट, मैलवारा में भगवानदास 183 वोट समेत अन्य कुल 17 उम्मीदवार दो सौ से भी कम वोट पाकर जीत हासिल करने में कामयाब रहे। इनमें से भी अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।
जमानत धनराशि वापस पाने को बताना होगा खर्च का ब्यौरा
उम्मीदवारों का जमानत धनराशि पाना इतना आसान भी नहीं है। जमानत धनराशि वापस पाने के लिए उम्मीदवारों को चुनाव आयोग की ओर से निर्धारित चुनावी खर्चे को पूरे प्रपत्रों के साथ जमा करना होगा। इसे जमा करने वाले उम्मीदवारों को ही जमानत धनराशि वापस मिलेगी। अभी तक चुनिंदा उम्मीदवारों ने ही अपने खर्चे का ब्यौरा बताया है। बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने अपने खर्चे का ब्यौरा ही अब तक नहीं बताया हालांकि इसके लिए उनके पास अभी भी मौका है। बता दें, आयोग ने ग्राम पंचायत सदस्य के लिए 500 रुपये, प्रधान के लिए 2000 रुपये, क्षेत्र पंचायत सदस्य के लिए 2000 रुपये एवं जिपं सदस्य के लिए 4000 रुपये जमानत धनराशि तय की है। वहीं, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को इस रकम की आधी धनराशि ही देनी होगी।
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जिपं के दस सदस्यों को 25 फीसदी से कम वोट
जिला पंचायत सदस्य के नौ नवनिर्वाचित सदस्य 25फीसदी से भी कम वोट पाकर जीत हासिल करने में कामयाब रहे। पच्चीस फीसदी से कम वोट पाने वालों में पूंछ से बालकिशुन 24.44 प्रतिशत, साकिन से जयपाल सिंह (24.35), भरोसा से पवन कुमार (24.72), बघेरा से रजनीदेवी (18.69), रक्सा से रोहित राजपूत (22.08), खैलार से अमनदीप (20.11), सकरार से किरणदेवी (21.78), देवरीसिंहपुरा से चंदन (22.07), सिमरधा से मेवा देवी (22.62) एवं भसनेह से अंजना देवी ने (19.84) प्रतिशत वोट हासिल किए।
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प्रावधानों के मुताबिक कुल वैध मतदान का न्यूनतम बीस फीसदी मत हासिल करने वाले उम्मीदवारों की ही जमानत वापस होती है लेकिन, जनपद में 59 विजयी उम्मीदवार ऐसे रहे, जिनको इतने मत हासिल नहीं हुए। इस चुनाव में जनपद में कुल 80 प्रतिशत मतदान हुआ। प्रत्येक ग्राम पंचायतवार भी 75-85 प्रतिशत तक मतदान हुआ लेकिन, ग्राम प्रधान पद के तमाम विजयी उम्मीदवारों को बेहद कांटे के मुकाबले में जीत हासिल हुई। अधिकांश पंचायतों में पांच से अधिक उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। इस वजह से बड़े पैमाने पर मत विभाजन हुआ। प्रत्येक उम्मीदवार के खाते में अच्छा-खासा वोट आने से न सिर्फ जीत का अंतर बेहद कम हो गया बल्कि विजयी उम्मीदवार का मत प्रतिशत भी काफी कम रहा। करगुवां, नंदसिया, सिमरिया, खजरा खुर्द, मारकुवां, लुधियाई, चिरौरा आदि ग्राम पंचायतों में विजयी उम्मीदवार का मत प्रतिशत 20 प्रतिशत के करीब रहा। वहीं, कई ग्राम पंचायतों में दो सौ वोट से भी कम वोट पाकर उम्मीदवार ग्राम प्रधान पद के लिए निर्वाचित हो गए। चिरगांव ब्लॉक के मिरौना में क्रांति 143 वोट, सिमरिया में विनोद 193 वोट, लुहरगांव में जितेंद्र सिंह 197 वोट, तुर्कालहचुरा में प्रदीप कुमार 176 वोट, अकसेव में राहुल 153 वोट, धवारा में किरण देवी 191 वोट, सतौरा में लाजी 146 वोट, बसोवई में लक्ष्मी देवी 178 वोट, मुस्तरा में प्रमोद कुमारी 181 वोट, मैलवारा में भगवानदास 183 वोट समेत अन्य कुल 17 उम्मीदवार दो सौ से भी कम वोट पाकर जीत हासिल करने में कामयाब रहे। इनमें से भी अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।
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जमानत धनराशि वापस पाने को बताना होगा खर्च का ब्यौरा
उम्मीदवारों का जमानत धनराशि पाना इतना आसान भी नहीं है। जमानत धनराशि वापस पाने के लिए उम्मीदवारों को चुनाव आयोग की ओर से निर्धारित चुनावी खर्चे को पूरे प्रपत्रों के साथ जमा करना होगा। इसे जमा करने वाले उम्मीदवारों को ही जमानत धनराशि वापस मिलेगी। अभी तक चुनिंदा उम्मीदवारों ने ही अपने खर्चे का ब्यौरा बताया है। बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने अपने खर्चे का ब्यौरा ही अब तक नहीं बताया हालांकि इसके लिए उनके पास अभी भी मौका है। बता दें, आयोग ने ग्राम पंचायत सदस्य के लिए 500 रुपये, प्रधान के लिए 2000 रुपये, क्षेत्र पंचायत सदस्य के लिए 2000 रुपये एवं जिपं सदस्य के लिए 4000 रुपये जमानत धनराशि तय की है। वहीं, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को इस रकम की आधी धनराशि ही देनी होगी।
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जिपं के दस सदस्यों को 25 फीसदी से कम वोट
जिला पंचायत सदस्य के नौ नवनिर्वाचित सदस्य 25फीसदी से भी कम वोट पाकर जीत हासिल करने में कामयाब रहे। पच्चीस फीसदी से कम वोट पाने वालों में पूंछ से बालकिशुन 24.44 प्रतिशत, साकिन से जयपाल सिंह (24.35), भरोसा से पवन कुमार (24.72), बघेरा से रजनीदेवी (18.69), रक्सा से रोहित राजपूत (22.08), खैलार से अमनदीप (20.11), सकरार से किरणदेवी (21.78), देवरीसिंहपुरा से चंदन (22.07), सिमरधा से मेवा देवी (22.62) एवं भसनेह से अंजना देवी ने (19.84) प्रतिशत वोट हासिल किए।