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Jhansi: अनदेखी की वजह से गंदे नाले में बदल गई पहूज नदी, संकट में अस्तित्व

Sun, 31 Jul 2022 02:12 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Sun, 31 Jul 2022 02:12 AM IST
सार

झांसी महानगर की बड़ी आबादी को इस नदी के जरिये ही पानी उपलब्ध होता है। लेकिन, अनदेखी की वजह से अब ये नदी अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष करती नजर आ रही है। महानगर के चार बड़े नालों के गंदे पानी ने इस नदी को बुरी तरह से प्रदूषित कर दिया है।

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Pahuj river turned into a dirty drain
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala

विस्तार

नदियों के संरक्षण को लेकर अरसे से बड़े-बड़े दावे और वादे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे इत्तेफाक नहीं रखती। इसका अंदाजा पहूज नदी को देखकर लगाया जा सकता है, जो गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है। महानगर के चार बड़े गंदे नालों का पानी इसमें दिन-रात गिरता है, जिससे ये अपना मूल स्वरूप पूरी तरह से खो चुकी है।

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पहूज नदी का सफर बबीना के बैदोरा के जंगलों से शुरू होता है। लगभग 200 किलोमीटर की यात्रा कर ये नदी जालौन के पचनदा में समाहित हो जाती है। अपनी यात्रा मार्ग में ये नदी खेतों की प्यास बुझाती हुई आगे बढ़ती है। इसके अलावा आबादी वाले क्षेत्रों को पेयजल भी मुहैया कराती है। झांसी महानगर की बड़ी आबादी को इस नदी के जरिये ही पानी उपलब्ध होता है। लेकिन, अनदेखी की वजह से अब ये नदी अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष करती नजर आ रही है। महानगर के चार बड़े नालों के गंदे पानी ने इस नदी को बुरी तरह से प्रदूषित कर दिया है। नदी मार्ग पर नालों का गंदा काला पानी बहता नजर आता है। जबकि, एक समय बारिश के सीजन में ये नदी खिलखिलाते हुए अपने पूरे वेग के साथ आगे बढ़ती थी।

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आठ साल पहले उमा भारती ने लिया था गोद
साल 2014 में पहूज नदी को तत्कालीन केंद्रीय जल संसाधन मंत्री और स्थानीय सांसद उमा भारती उमा भारती ने गोद लिया था। इस दौरान उमा ने नदी को उसका पुराना स्वरूप वापस लौटाने का संकल्प लिया था। शुरुआत में प्रशासनिक तंत्र ने भी तेजी दिखाई थी। शिवपुरी रोड पर नदी के किनारे आल्हा घाट का निर्माण किया गया था। साथ ही नालों के गंदे पानी के शोधन का भी प्लान तैयार कर लिया गया था। लेकिन, नदी के जीर्णोद्धार की योजना अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाई है।

नदी में गिरने वाले नालों के गंदे पानी के शोधन के लिए स्मार्ट सिटी के तहत ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जा रहा है। इसका काम शुरू हो गया है। आने वाले सालों में नालों के पानी को साफ करने के बाद ही नदी में छोड़ा जाएगा। - रामतीर्थ सिंघल, महापौर

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