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रणछोड़धाम: बेतवा के तट पर आयोजित मेले में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, महायज्ञ में यजमानों ने डालीं आहुतियां

Wed, 15 Jan 2025 06:58 PM IST
श्याम जी. संवाद न्यूज एजेंसी, जाखलौन (ललितपुर)।
संवाद न्यूज एजेंसी, जाखलौन (ललितपुर)। Published by: श्याम जी. Updated Wed, 15 Jan 2025 06:58 PM IST
सार

ललितपुर जिले में रणछोड़ धाम पर  108 कुंडीय श्री विष्णु एवं नव कुंडीय रुद्र महायज्ञ का आयोजन हो रहा है। महायज्ञ में तीसरे दिन वैदिक मंत्रोच्चार से विधि विधान के साथ पूजन अर्चन कर यजनानों ने यज्ञ में आहुतियां डालीं। वहीं, मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है।

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Organization of 108 Kundiya Shri Vishnu and Nav Kundiya Rudra Mahayagya at Ranchhod Dham in Lalitpur
श्री विष्णु महायज्ञ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बेतवा नदी के किनारे स्थित रणछोड़ धाम पर चल रहे मेला में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है। बुधवार को सुबह से ही वेदमंत्रों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। यहां आयोजन 108 कुंडीय श्री विष्णु एवं नव कुंडीय रुद्र महायज्ञ में तीसरे दिन वैदिक मंत्रोच्चार से विधि विधान के साथ पूजन अर्चन कर यजनानों ने यज्ञ में आहुतियां डालीं।
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बुधवार को भी 108 वेदियों पर विवाहित जोड़ों ने विष्णु महायज्ञ एवं रुद्र महायज्ञ में आचार्यो के मंत्रोच्चारण के बीच हवन में आहुतियां डालीं। करीब तीन घंटे तक चले महायज्ञ में पूरा परिसर मंत्रोच्चार से गूंज गया। आहुतियां पूरी होने पर आरती का आयोजन किया गया। यजमानों ने 108 वेदियों की परिक्रमा कर आशीर्वाद लिया। यज्ञाचार्य कैलाश नारायण शास्त्री ने बताया कि भगवान विष्णु के द्वादश नाम से आहुतियां दी गई हैं। महायज्ञ के करने से कई जन्मों के पापों का नाश होता है।
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रणछोड़ धाम के महंत बलराम पुरी महाराज ने बताया कि यज्ञ में आहुति देने से पापों का नाश होने के साथ ही मनोवांछित फल मिलता है। उन्होंने बताया कि यज्ञ को श्रेष्ठतम कर्म माना गया है। यज्ञ भगवान विष्णु का ही स्वरूप हैं, यज्ञ में आहुति देने से वातावरण पवित्र होता है, यज्ञ में बोले जाने वाले मंत्र मनोकामनाओं को पूरा करते हैं और यज्ञ में आहुति देने से लौकिक और आध्यात्मिक संपदा मिलती है। उन्होंने कहा कि यज्ञ में आहुति देने से शारीरिक, मानसिक और भौतिक दोष खत्म होते है। यज्ञ करने से पहले भूमि पूजन करके मंडप बनाया जाता है, जो दिशाओं और कोणों के अनुसार बनता है। फिर सभी दिशाओं में देवी-देवताओं का पूजन किया जाता है और इसके बाद अग्निदेव की स्थापना करने के बाद विधि विधान व मंत्रोच्चार के साथ हवन किया जाता है। व्यवस्थापक कृष्णानंद ने बताया श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
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जब-जब पुण्य का उदय होता है, तब ऐसा अनुष्ठान होता है- विनीता शास्त्री
रणछोड़ धाम पर चल रही श्रीमद्भगवत कथा में राजा परीक्षित के जन्म की कथा का वर्णन करते हुए कथावाचक विनीता शास्त्री ने कहा कि जन्म-जन्मांतर और युग-युगांतर में जब पुण्य का उदय होता है, तब ऐसा अनुष्ठान होता है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से पापी भी पाप मुक्त हो जाते हैं। वेदों का सार युगों-युगों से मानवजाति तक विद्वानों द्वारा पहुंचाया जा रहा है। 


उन्होंने कहा कि कलयुग के प्रभाव से राजा परीक्षित ने श्रृंगी ऋषि के गले में मरा हुआ सर्प डाल दिया था जिस पर ऋषि ने उन्हें श्राप दिया कि ठीक सातवें दिन सर्प के काटने से उनकी मृत्यु हो जाएगी। उसी श्राप के निवारण के लिए वेद व्यास जी रचित भागवत कथा शुकदेव महाराज ने सुनाई थी। राजा परीक्षित ने सात दिन भागवत सुनकर अपना उद्धार कर लिया था। उसी तरह प्रत्येक व्यक्ति को भागवत का महत्व समझना चाहिए। कथा में महंत बलराम पूरी, समिति प्रबंधक धीरज सिंह, अध्यक्ष वीरसिंह, मेला प्रभारी ओम प्रकाश पंथ, व्यवस्थापक कृष्णा नंद आदि उपस्थित रहे।
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