फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   organic ground nuts in 125 acres.

सवा सौ एकड़ में जैविक मंगूफली

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jul 2020 12:04 AM IST
विज्ञापन
organic ground nuts in 125 acres.
सवा सौ एकड़ में जैविक मंगूफली एफपीओ के माध्यम से बदल रहा खेती का तरीका झांसी। बुंदेलखंड में खेती के तौर-तरीकों में जैविक खेती भी धीरे-धीरे अपनी जगह बना रही है। एफपीओ की मदद से तमाम किसानों को जैविक खेती में भविष्य नजर आ रहा है। विकास खंड बंगरा के कई गांवों में पहली बार जैविक विधि से मूंगफली लगाई जा रही है। कृषि विभाग भी ऐसे किसानों को बीज आदि की मदद मुहैया करा रहा है। उवर्रक का प्रयोग कम करने के लिए सरकार लगातार जैविक खेती को बढ़ावा दे रही। पिछले रबी सीजन में कठिया गेंहू भी जैविक रीति से उपजाया गया था, जिसकी काफी सरहाना हुई थी। अब खरीफ सीजन में बुंदेलखंड की खास पहचान मूंगफली को भी जैविक रीति से उगाने की कवायद शुरू हुई है। किसानों को प्रोत्साहित करने का बीड़ा एफपीओ सफल किसान प्रोड्यूसर समूह ने उठाया है। समूह की मदद से बंगरा के नोटा, इटौरा, हाटी समेत आसपास के गांव में तीन दर्जन से अधिक किसानों ने परांपरागत तरीके को छोड़कर नई राह थामी है। इन गांवों में कुल मिलाकर सवा सौ एकड़ से अधिक रकबे में मूंगफली की बुवाई की गई। इसे पूरी तरह से जैविक विधि से उपजाया जाएगा। अमूमन खरीफ में खाद की जरूरत कम होती है। सिर्फ खरपतवार एवं कीड़ों से बचाने के लिए ही रसायनों का इस्तेमाल अधिक होता है। किसानों ने इसके रोकथाम के उपाय पहले से किए हुए हैं। किसानों का कहना है कि रसायनों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उपज तैयार होने के बाद इसका जैविक प्रमाणीकरण भी कराया जा रहा। वहीं, एफपीओ निदेशक अमित पांडेय का कहना है कठिया गेहूं से किसानों को काफी फायदा हुआ। इसकी वजह से जैविक खेती को लेकर किसानों में जागरूकता आ रही है। डीडी कृषि, कमल कटियार के मुताबिक जैविक खेती करने के इच्छुक किसानों को बीज समेत तकनीकी की जानकारी दी जाती है। इनसेट 24809 मैट्रिक टन मूंगफली का लक्ष्य अपनी गुणवत्ता के चलते झांसी की मूंगफली देशभर में प्रसिद्व है। मऊरानीपुर, बंगरा, गुरसराय में मूंगफली का सर्वाधिक उत्पादन होता है। इस वर्ष कुल 24885 हेक्टेयर में बुवाई एवं 24809 मैट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। यह पिछले तीन वर्षों में सर्वाधिक उत्पादन लक्ष्य है। पिछले खरीफ में इसका रकबा 20662 हेक्टेयर ही था। उत्पादन भी 16736 मैट्रिक टन हो सका हालांकि इस बार अच्छे मानसून की वजह से उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed