{"_id":"6009e6508ebc3e2c5153dcae","slug":"only-januarry-till-purchase-center-jhansi-news-jhs1866776169","type":"story","status":"publish","title_hn":"जनवरी तक ही चलेंगे खरीद केंद्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जनवरी तक ही चलेंगे खरीद केंद्र
विज्ञापन
झांसी। मूंगफली खरीद के लिए खुले सरकारी खरीद केंद्र जनवरी तक ही चल सकेंगे। इस बार मंडी में मूंगफली की कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक होने से खरीद केंद्रों में खरीद काफी धीमी रही। सरकारी केंद्रों के जरिए सिर्फ 4,502 मीट्रिक टन मूंगफली ही खरीदी जा सकी।
मूंगफली खरीद के लिए पीसीयू के चार एवं पीसीएफ के दो केंद्र खोले गए हैं। केंद्र सरकार ने मूंगफली का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,275 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। लेकिन, जनवरी से ही गल्ला मंडी में मूंगफली की आवक अधिक हो गई और बटाली मूंगफली का दाम समर्थन मूल्य के करीब पहुंच गया, जबकि देशी मूंगफली 6,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई। ऐसे में सरकारी खरीद केंद्रों में मूंगफली की खरीद ठप पड़ गई। जिन्होंने एमएसपी के चक्कर में किसानों से मूंगफली खरीदी थी, उन्होंने भी गल्ला मंडी में ऊंची कीमत पर मूंगफली खपा दी। मंडी में दाम अधिक हो जाने के बाद सरकारी खरीद केंद्र सूने पड़ चुके हैं। ऐसे में खरीद केंद्र जनवरी में ही बंद कर दिए जाएंगे, जबकि पिछली बार इन केंद्रों को नब्बे दिन से अधिक समय तक चलाया गया था।
मूंगफली खरीद केंद्र बंद करने को लेकर नैफेड के शाखा प्रबंधक की ओर से पत्र भेज दिया गया है। डीआर कोआपरेटिव उदयभान सिंह के मुताबिक गल्ला मंडी में कीमत अधिक होने से सरकारी क्रय केंद्रों में खरीद काफी धीमी है।
विज्ञापन
काशी एग्रो पर किसानों का सबसे अधिक बकाया
खरीफ सीजन में अब तक कुल 4502.10 मीट्रिक टन मूंगफली 2,622 किसानों से खरीदी गई। इसके एवज में 2,181 किसानों को 19.74 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया, लेकिन 441 किसानों का करीब चार करोड़ रुपया विभिन्न खरीद एजेंसियों पर बकाया है। किसानों का सबसे अधिक बकाया काशी एग्रो लिमिटेड पर है। काशी एग्रो को कुल 119 किसानाें को1.16 करोड़ रुपये चुकाना है। इसी तरह भसनेह में खुले यदुनाथ सिंह एजेंसी को करीब 94.54 लाख रुपये किसानों का देना है।
विज्ञापन
मूंगफली खरीद के लिए पीसीयू के चार एवं पीसीएफ के दो केंद्र खोले गए हैं। केंद्र सरकार ने मूंगफली का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,275 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। लेकिन, जनवरी से ही गल्ला मंडी में मूंगफली की आवक अधिक हो गई और बटाली मूंगफली का दाम समर्थन मूल्य के करीब पहुंच गया, जबकि देशी मूंगफली 6,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई। ऐसे में सरकारी खरीद केंद्रों में मूंगफली की खरीद ठप पड़ गई। जिन्होंने एमएसपी के चक्कर में किसानों से मूंगफली खरीदी थी, उन्होंने भी गल्ला मंडी में ऊंची कीमत पर मूंगफली खपा दी। मंडी में दाम अधिक हो जाने के बाद सरकारी खरीद केंद्र सूने पड़ चुके हैं। ऐसे में खरीद केंद्र जनवरी में ही बंद कर दिए जाएंगे, जबकि पिछली बार इन केंद्रों को नब्बे दिन से अधिक समय तक चलाया गया था।
विज्ञापन
मूंगफली खरीद केंद्र बंद करने को लेकर नैफेड के शाखा प्रबंधक की ओर से पत्र भेज दिया गया है। डीआर कोआपरेटिव उदयभान सिंह के मुताबिक गल्ला मंडी में कीमत अधिक होने से सरकारी क्रय केंद्रों में खरीद काफी धीमी है।
विज्ञापन
काशी एग्रो पर किसानों का सबसे अधिक बकाया
खरीफ सीजन में अब तक कुल 4502.10 मीट्रिक टन मूंगफली 2,622 किसानों से खरीदी गई। इसके एवज में 2,181 किसानों को 19.74 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया, लेकिन 441 किसानों का करीब चार करोड़ रुपया विभिन्न खरीद एजेंसियों पर बकाया है। किसानों का सबसे अधिक बकाया काशी एग्रो लिमिटेड पर है। काशी एग्रो को कुल 119 किसानाें को1.16 करोड़ रुपये चुकाना है। इसी तरह भसनेह में खुले यदुनाथ सिंह एजेंसी को करीब 94.54 लाख रुपये किसानों का देना है।