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ऑनलाइन हुई रेल पटरियों की निगरानी
झांसी / ब्यूरो
Updated Sun, 02 Aug 2015 12:17 AM IST
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रेल मंडल की पटरियों की देखरेख करने वाले सभी रेल पथ निरीक्षकों को लैपटॉप देकर ऑनलाइन कर दिया गया है। रेल पटरियों के रखरखाव का हिसाब अब इंटरनेट के जरिये तुरंत देखा जा सकेगा। इसके अलावा दिशा-निर्देशों का पालन न होने पर लैपटॉप एलर्ट भी करेगा।
चौबीसों घंटे जिन पटरियों पर ट्रेनें दौड़ती हैं, रेलवे ने उनकी मरम्मत, रखरखाव आदि की जिम्मेदारी रेल पथ निरीक्षकों को सौंप रखी है। रेलवे ने एक निश्चित ट्रैफिक गुजरने के बाद उस पटरी को बदलने का प्रावधान तय किया है। अभी रेल पथ निरीक्षकों को अपने सेक्शन की पटरियों से जुड़ी जानकारियों को दस्तावेजों में रखना पड़ता है। जरा सी अनदेखी दुर्घटना की आशंका पैदा करती है। इसे देखते हुए रेल पथ निरीक्षकों का काम पेपर लेस करने व एक-एक इंच पटरी की जानकारी आनॅलाइन करने के लिए इस पूरी व्यवस्था को अब रेल प्रबंधन प्रणाली (ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम) से जोड़ दिया गया है।
उत्तर मध्य रेलवे ने आगरा मंडल के बाद अब यह प्रणाली इलाहाबाद व झांसी मंडल में एक साथ लागू की है। इस प्रणाली के तहत ट्रैक पर काम करने वाले सभी 120 रेल पथ निरीक्षकों को लैपटॉप से सुसज्जित किया गया है। रेल पथ निरीक्षक लैपटॉप पर हर समय पटरियों से जुड़ी जानकारियां अपडेट रखेंगे। इसके अलावा अधिकारी, एसएसई व जेई स्तर के कर्मचारी अपने निरीक्षण को अपडेट करेंगे। सिस्टम में एक ऑटोमेटिक एलर्ट प्रोग्राम है, जो शिड्यूल ड्यू होने पर सतर्क करेगा। इस सिस्टम के ऑनलाइन रहने से कोई रेल दुर्घटना होने पर बोर्ड के अफसर पल भर में घटनास्थल से जुड़ी जानकारियों का पता कर सकेंगे। उन्हें यह पता करने में देर नहीं लगेगी कि वहां की पटरियों को कब बदला गया था? वहां किस समय के स्लीपर पड़े हुए हैं? इस क्षेत्र का कब से मेंटीनेंस नहीं हुआ।
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चौबीसों घंटे जिन पटरियों पर ट्रेनें दौड़ती हैं, रेलवे ने उनकी मरम्मत, रखरखाव आदि की जिम्मेदारी रेल पथ निरीक्षकों को सौंप रखी है। रेलवे ने एक निश्चित ट्रैफिक गुजरने के बाद उस पटरी को बदलने का प्रावधान तय किया है। अभी रेल पथ निरीक्षकों को अपने सेक्शन की पटरियों से जुड़ी जानकारियों को दस्तावेजों में रखना पड़ता है। जरा सी अनदेखी दुर्घटना की आशंका पैदा करती है। इसे देखते हुए रेल पथ निरीक्षकों का काम पेपर लेस करने व एक-एक इंच पटरी की जानकारी आनॅलाइन करने के लिए इस पूरी व्यवस्था को अब रेल प्रबंधन प्रणाली (ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम) से जोड़ दिया गया है।
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उत्तर मध्य रेलवे ने आगरा मंडल के बाद अब यह प्रणाली इलाहाबाद व झांसी मंडल में एक साथ लागू की है। इस प्रणाली के तहत ट्रैक पर काम करने वाले सभी 120 रेल पथ निरीक्षकों को लैपटॉप से सुसज्जित किया गया है। रेल पथ निरीक्षक लैपटॉप पर हर समय पटरियों से जुड़ी जानकारियां अपडेट रखेंगे। इसके अलावा अधिकारी, एसएसई व जेई स्तर के कर्मचारी अपने निरीक्षण को अपडेट करेंगे। सिस्टम में एक ऑटोमेटिक एलर्ट प्रोग्राम है, जो शिड्यूल ड्यू होने पर सतर्क करेगा। इस सिस्टम के ऑनलाइन रहने से कोई रेल दुर्घटना होने पर बोर्ड के अफसर पल भर में घटनास्थल से जुड़ी जानकारियों का पता कर सकेंगे। उन्हें यह पता करने में देर नहीं लगेगी कि वहां की पटरियों को कब बदला गया था? वहां किस समय के स्लीपर पड़े हुए हैं? इस क्षेत्र का कब से मेंटीनेंस नहीं हुआ।
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