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शिक्षकों के खाते में डाल दी एक माह की एडवांस सैलरी
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झांसी। शुक्रवार को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में वित्त विभाग की चूक से एसएफएस शिक्षकों के खाते में एक माह की एडवांस सैलरी भेज दी गई। जैसे ही अधिकारियों को इस मामले की जानकारी हुई तो हड़कंप मच गया। वित्त अधिकारी ने बैंक मैनेजर से बात की। इसके बाद बैंक ने शिक्षकों के व्यक्तिगत खाते से पैसे निकासी पर रोक लगा दी। देर रात एक माह का अग्रिम वेतन बैंक ने काटकर वापस विश्वविद्यालय के खाते में पहुंचा दिया।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में स्ववित्त पोषित योजनांतर्गत कार्यरत शिक्षकों, कर्मचारियों के खाते में शुक्रवार को सैलरी पहुंच गई। जैसी ही शिक्षकों के मोबाइल पर सैलरी क्रेेडिट होने का संदेश आया तो वो चौक गए, क्योंकि उनके खाते में दोगुना पैसा पहुंच गया था। शिक्षकों ने वित्त विभाग के स्टाफ से फोन घनघनाने शुरू कर दिए। वित्त विभाग के कर्मचारियों को मामले की जानकारी हुई तो उनके होश उड़ गए। दौड़े-दौड़े वह वित्त अधिकारी के पास पहुंचे। वित्त अधिकारी ने तुरंत बैक मैनेजर को फोन कर मामले की जानकारी दी। इसके बाद शिक्षकों के व्यक्तिगत खाते से पैसे निकासी पर रोक लगा दी गई। इससे कई शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
दो बार होती है जांच
बीयू ने एसबीआई का पोर्टल ले रखा है। सबसे पहले वित्त विभाग का स्टाफ सैलरी की फाइल अपलोड करता है। इसमें से एक कर्मचारी के पास भुगतान को स्वीकृत करने का अधिकार मिला है। यदि किसी प्रकार की गलती है तो वह फाइल निरस्त भी कर सकता है। इसके बाद अंतिम भुगतान के लिए फाइल वित्त अधिकारी के पास पहुंचती है। उनके पास भी स्वीकृत और अस्वीकृत करने का अवसर रहता है। इसके लिए हाई सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन पासवर्ड होता है। जब तक पासवर्ड नहीं डाला जाता, तब तक भुगतान नहीं हो सकता है।
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शिक्षकों की सैलरी के लिए बनाई गई चेक में नाम में कुछ त्रुटि थी। इसे निरस्त कर दूसरी चेक बनवाई गई। सर्वर की समस्या होने की वजह से पहली चेक निरस्त नहीं हो पाई और दोनों चेकों से भुगतान हो गया। बैंक मैनेजर से खाते से पैसे निकासी पर रोक लगाने को कहा गया था। देर रात पैसा वापस आ गया।
रामकृपाल बिंद, वित्त अधिकारी, बीयू
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में स्ववित्त पोषित योजनांतर्गत कार्यरत शिक्षकों, कर्मचारियों के खाते में शुक्रवार को सैलरी पहुंच गई। जैसी ही शिक्षकों के मोबाइल पर सैलरी क्रेेडिट होने का संदेश आया तो वो चौक गए, क्योंकि उनके खाते में दोगुना पैसा पहुंच गया था। शिक्षकों ने वित्त विभाग के स्टाफ से फोन घनघनाने शुरू कर दिए। वित्त विभाग के कर्मचारियों को मामले की जानकारी हुई तो उनके होश उड़ गए। दौड़े-दौड़े वह वित्त अधिकारी के पास पहुंचे। वित्त अधिकारी ने तुरंत बैक मैनेजर को फोन कर मामले की जानकारी दी। इसके बाद शिक्षकों के व्यक्तिगत खाते से पैसे निकासी पर रोक लगा दी गई। इससे कई शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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दो बार होती है जांच
बीयू ने एसबीआई का पोर्टल ले रखा है। सबसे पहले वित्त विभाग का स्टाफ सैलरी की फाइल अपलोड करता है। इसमें से एक कर्मचारी के पास भुगतान को स्वीकृत करने का अधिकार मिला है। यदि किसी प्रकार की गलती है तो वह फाइल निरस्त भी कर सकता है। इसके बाद अंतिम भुगतान के लिए फाइल वित्त अधिकारी के पास पहुंचती है। उनके पास भी स्वीकृत और अस्वीकृत करने का अवसर रहता है। इसके लिए हाई सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन पासवर्ड होता है। जब तक पासवर्ड नहीं डाला जाता, तब तक भुगतान नहीं हो सकता है।
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शिक्षकों की सैलरी के लिए बनाई गई चेक में नाम में कुछ त्रुटि थी। इसे निरस्त कर दूसरी चेक बनवाई गई। सर्वर की समस्या होने की वजह से पहली चेक निरस्त नहीं हो पाई और दोनों चेकों से भुगतान हो गया। बैंक मैनेजर से खाते से पैसे निकासी पर रोक लगाने को कहा गया था। देर रात पैसा वापस आ गया।
रामकृपाल बिंद, वित्त अधिकारी, बीयू