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आंगनबाड़ी केंद्र में चल रहा दफ्तर, बच्चे बैठते हैं बाहर

Fri, 08 Oct 2021 01:18 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 08 Oct 2021 01:18 AM IST
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Office running in Anganwadi center, children sit outside
बंगरा/झांसी। सरकार ने बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन शुरू किया। बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए केंद्रों पर प्री प्राइमरी स्तर का शिक्षण कार्य संचालित करने की भी तैयारी की गई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने के साथ केंद्रों का हाल सुधारने के दावे किए गए। लेकिन जिले में हाल यह है कि केंद्र जर्जर हो चुके हैं। बंगरा ब्लॉक का प्रमुख केंद्र अधिकारियों का कार्यालय बनकर रह गया है। जबकि बच्चों को केंद्र के बाहर खुले में बिठाया जाता है। इसके अलावा हालात यह हैं कि ब्लॉक के 161 में से 15 केंद्रों पर तो कार्यकर्ताओं की तैनाती ही नहीं है। ऐसे में बच्चों को पोषित करने का दावा बेमानी नजर आता है।
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जिले के सबसे बड़े ब्लॉक बंगरा में 161 आंगनबाड़ी केंद्र आते हैं। जिसमें से अब तक सिर्फ 13 मॉडल केंद्र ही बन सके हैं। यहां भी नाम मात्र का फ र्नीचर है। जबकि 148 केंद्र सुविधाएं नहीं होने से अपनी दुर्दशा के शिकार हैं। केंद्रों पर छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए पुष्टाहार वितरण के साथ खेलकूद, बैठने की सभी व्यापक सुविधाएं होनी चाहिए, लेकिन यहां कुछ भी नहीं है। बंगरा ब्लॉक स्तर केंद्र में अधिकारियों ने कार्यालय खोल रखा है। यहां बैठने का कोई इंतजाम ही नहीं है। हाइवे किनारे बना आंगनबाड़ी भवन जीर्ण शीर्ण हालात में हैं।
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हालात यह हैं कि कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तैनाती ही नहीं है। इसके चलते केंद्रों पर ताला लटका रहता है। गेराहा, कचनेव, जावन समेत लगभग 15 केंद्रों पर केवल सहायिका तैनात हैं। लोगों ने बताया कि नियमित पुष्टाहार नहीं मिलता है। अंदरूनी गांवों में संचालित हो रहे केंद्रों पर बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पोषाहार भी नहीं मिलता।
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केंद्रों पर बिजली कनेक्शन प्रक्रिया चल रही है। जो केंद्र खाली पड़े हैं, उनको शासन स्तर से जल्द पूरा किए जाने की उम्मीद है। सभी जगहों पर पर्याप्त फ र्नीचर हो, उसका प्रबंध पंचायत स्तर से किया जा रहा
है।
देवेंद्र निरंजन, बाल विकास परियोजना अधिकारी, ब्लॉक बंगरा
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