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गोआश्रय स्थलों में भूसे को पैसा नहीं, बाहर हांके जा रहे गोवंश

Sun, 06 Dec 2020 01:11 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 06 Dec 2020 01:11 AM IST
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Not money anna animal
झांसी। अन्ना जानवरों के लिए बने सरकारी गो-आश्रय स्थलों में भूसा तक समय पर नहीं पहुंच रहा है। हर माह करीब दो करोड़ के भूसे की जरूरत होती है, लेकिन सरकार ने नौ माह में कुल 5.25 करोड़ रुपये ही दिए हैं। ऐसे में भूसा न होने से गोवंश को गांवों की ओर हांका जा रहा है। फसल बचाने की मजबूरी में सर्द रात में भी किसानों को खेतों पर पहरा देना पड़ रहा है।
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जनपद में 215 गो-आश्रय स्थल संचालित किए जा रहे हैं। इनमें 27000 आवारा गोवंश रखे गए हैँ। इन आश्रय स्थलों में गोवंश के खान-पान के इंतजाम पुख्ता नहीं हैं। इनके रखरखाव का जिम्मा ग्राम पंचायतों के पास होने से प्रधान शुरूआत में किसी तरह क्रेडिट पर भूसा मांगते रहे, लेकिन अब जब पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने को है तब प्रधानों ने हाथ खड़े करने शुरू कर दिए। ऐसे में गोआश्रय स्थलों में भूसा की समस्या पैदा हो गई है।
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बताया जा रहा है कि करीब 150 आश्रय स्थलों पर भूसा मंगाना बंद कर दिया गया है। पलरा, पठा, भिटौरा, लोहरगांव, चौकरी, खिसनी बुजुर्ग, खिसनी खुर्द समेत कई गांवों में बने आश्रय स्थलों में लाखों रुपये बकाया हो चुका है। करीब 20 गोआश्रय स्थल पराली के भरोसे चल रहे हैं। जिन आश्रय स्थलों में स्टॉक बचा है वहां सिर्फ एक पाली में किसी तरह जानवरों को खिलाया जा रहा है, जबकि कई आश्रय स्थलों से गोवंशों को हांका जा रहा है। आश्रय स्थलों से छोड़े जा रहे जानवरों से किसान सबसे अधिक परेशान हैं।
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बढ़ती जा रही गांवों के भीतर अन्ना जानवरों की समस्या
गोआश्रय स्थलों से गोवंशों को बाहर हांकने की घटनाएं बढ़ने से अन्ना जानवरों की संख्या तेजी से सड़कों पर बढ़ती जा रही है। इसका खामियाजा किसानों को उठाना पड़ रहा है। फसल बचाने के लिए रात भर किसानों को पहरा देना पड़ रहा है। मऊरानीपुर के मेलवारा, भदरवारा, बुढ़िया, छिरोरा बुजुर्ग, धवाकर, ढोहा, चुरारा पठाई, धवाकर समेत कई गांवों में अन्ना जानवरों की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीण इसकी लगातार शिकायतें अफसरों से कर रहे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। मजबूरन खेत में ही अस्थाई मचान बनाकर किसानों को पहरा देना पड़ रहा है।

भूसा के लिए पैसा नहीं मिल रहा। अब तक 37 लाख से अधिक बकाया हो चुका। अब क्रेडिट में भी भूसा नहीं मिल रहा। भुगतान के लिए पशुचिकित्साधिकारी से लेकर जिलाधिकारी तक से गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। 8 दिसंबर तक भुगतान न मिलने पर गोआश्रय स्थल खाली करा देंगे।
शैलेंद्र सिंह, प्रधान प्रतिनिधि
खिसनी बुजुर्ग, ब्लॉक बंगरा
बकाया के भुगतान के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। जहां भूसा नहीं है वहां, इसका इंतजाम कराया जाएगा। डॉ. वाई के तोमर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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