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Jhansi News: कांग्रेस से अलग होकर झांसी आए थे नेताजी, की थी जनसभा
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। आजाद हिंद फौज के संस्थापक सुभाष चंद्र बोस का झांसी से गहरा नाता रहा है। कांग्रेस से अलग होने के बाद वे झांसी आए थे और यहां उन्होंने जनसभा को संबोधित किया था। उनका यहां भव्य स्वागत हुआ था। नेताजी के स्वागत में सराफा बाजार के व्यापारियों ने अपनी दुकानों के बाहर आभूषण सजाए थे।
कांग्रेस से अलग होने के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने राजनीतिक दल फारवर्ड ब्लॉक का गठन किया था। इसके बाद वह दिसंबर 1939 में फारवर्ड ब्लॉक का प्रचार करने यहां आए थे। यहां उन्होंने तत्काल हार्डीगंज में जनसभा को संबोधित किया था। देश के आजाद होने के बाद हार्डीगंज का नाम बदलकर सुभाष गंज कर दिया गया था। खास बात यह थी कि सुभाष चंद्र बोस के यहां आने से पहले कांग्रेस की ओर से कांग्रेसियों को आदेश जारी किया गया था कि कोई भी सुभाष चंद्र बोस का स्वागत नहीं करेगा। लेकिन, इससे इतर वरिष्ठ कांग्रेसी रघुनाथ विनायक धुलेकर ने पूरी गर्मजोशी के साथ सुभाष चंद्र बोस का स्वागत किया था, बल्कि उनकी जनसभा में भी शामिल हुए थे। जनसभा के दौरान नेताजी से कई साधारण कार्यकर्ताओं ने सीधा संवाद किया था। नेताजी के झांसी आगमन पर 50 वर्ष पूरे होने पर सराफा बाजार में स्थित द्वार का नाम सुभाष द्वार रख दिया गया था। यह द्वार आज भी नेताजी की याद दिलाता है। इसके अलावा महानगर में सीपरी बाजार और शहर में नेताजी की मूर्तियां भी स्थापित है। सीपरी बाजार में तो एक बाजार का नाम ही सुभाष मार्केट है।
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फोटो-- --
सुभाष चंद्र बोस अद्भुत व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने विदेशी धरती पर जाकर आजाद हिंद फौज का गठन किया था और नौ देशों से मान्यता भी ले ली थी। दिसंबर 1939 में वह फारवर्ड ब्लॉक का प्रचार करने झांसी आए थे और यहां उन्होंने जनसभा को संबोधित किया था। उनके नाम पर ही सुभाष गंज का नाम रखा गया था। - मोहन नेपाली, संयोजक-नेताजी सुभाष जयंती समारोह समिति
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बच्चों ने चित्रों में उकेरी नेताजी की छवि
झांसी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती की पूर्व संध्या पर सोमवार को पत्रकार भवन में निबंध व चित्रकला प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनके निर्णायक राकेश वर्मा व सुदर्शन शिवहरे रहे। निबंध प्रतियोगिता के सीनियर वर्ग में काजल जोशी पहले, सिमरन सक्सेना दूसरे व अजमा खान तीसरे स्थान पर रहीं। जूनियर वर्ग में अलिशा सलमानी पहले और आजम दूसरे पर रहे। चित्रकला प्रतियोगिता के सीनियर वर्ग में सिमरन पहले, सुभाष सारस्वत दूसरे व लवी प्रजापति तीसरे स्थान पर रहीं। जबकि, जूनियर वर्ग में दिव्य अग्रवाल ने पहला, वेदांत दुबे ने दूसरा व लवी ने तीसरा स्थान हासिल किया। इस दौरान आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री प्रदीप जैन एवं विशिष्ट अतिथि सीताराम यादव व अरविंद वशिष्ठ रहे। कार्यक्रम संयोजक मोहन नेपाली ने नेताजी के त्याग और बलिदान पर प्रकाश डाला। इस मौके पर सुबोध उदैनिया, डा. मनमोहन मनु, अनंजय नेपाली, अनिल कुशवाहा, हरिनारायण श्रीवास्तव, कौशल सारस्वत, विजय गोपाल आदि मौजूद रहे। ब्यूरो
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झांसी। आजाद हिंद फौज के संस्थापक सुभाष चंद्र बोस का झांसी से गहरा नाता रहा है। कांग्रेस से अलग होने के बाद वे झांसी आए थे और यहां उन्होंने जनसभा को संबोधित किया था। उनका यहां भव्य स्वागत हुआ था। नेताजी के स्वागत में सराफा बाजार के व्यापारियों ने अपनी दुकानों के बाहर आभूषण सजाए थे।
कांग्रेस से अलग होने के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने राजनीतिक दल फारवर्ड ब्लॉक का गठन किया था। इसके बाद वह दिसंबर 1939 में फारवर्ड ब्लॉक का प्रचार करने यहां आए थे। यहां उन्होंने तत्काल हार्डीगंज में जनसभा को संबोधित किया था। देश के आजाद होने के बाद हार्डीगंज का नाम बदलकर सुभाष गंज कर दिया गया था। खास बात यह थी कि सुभाष चंद्र बोस के यहां आने से पहले कांग्रेस की ओर से कांग्रेसियों को आदेश जारी किया गया था कि कोई भी सुभाष चंद्र बोस का स्वागत नहीं करेगा। लेकिन, इससे इतर वरिष्ठ कांग्रेसी रघुनाथ विनायक धुलेकर ने पूरी गर्मजोशी के साथ सुभाष चंद्र बोस का स्वागत किया था, बल्कि उनकी जनसभा में भी शामिल हुए थे। जनसभा के दौरान नेताजी से कई साधारण कार्यकर्ताओं ने सीधा संवाद किया था। नेताजी के झांसी आगमन पर 50 वर्ष पूरे होने पर सराफा बाजार में स्थित द्वार का नाम सुभाष द्वार रख दिया गया था। यह द्वार आज भी नेताजी की याद दिलाता है। इसके अलावा महानगर में सीपरी बाजार और शहर में नेताजी की मूर्तियां भी स्थापित है। सीपरी बाजार में तो एक बाजार का नाम ही सुभाष मार्केट है।
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सुभाष चंद्र बोस अद्भुत व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने विदेशी धरती पर जाकर आजाद हिंद फौज का गठन किया था और नौ देशों से मान्यता भी ले ली थी। दिसंबर 1939 में वह फारवर्ड ब्लॉक का प्रचार करने झांसी आए थे और यहां उन्होंने जनसभा को संबोधित किया था। उनके नाम पर ही सुभाष गंज का नाम रखा गया था। - मोहन नेपाली, संयोजक-नेताजी सुभाष जयंती समारोह समिति
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बच्चों ने चित्रों में उकेरी नेताजी की छवि
झांसी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती की पूर्व संध्या पर सोमवार को पत्रकार भवन में निबंध व चित्रकला प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनके निर्णायक राकेश वर्मा व सुदर्शन शिवहरे रहे। निबंध प्रतियोगिता के सीनियर वर्ग में काजल जोशी पहले, सिमरन सक्सेना दूसरे व अजमा खान तीसरे स्थान पर रहीं। जूनियर वर्ग में अलिशा सलमानी पहले और आजम दूसरे पर रहे। चित्रकला प्रतियोगिता के सीनियर वर्ग में सिमरन पहले, सुभाष सारस्वत दूसरे व लवी प्रजापति तीसरे स्थान पर रहीं। जबकि, जूनियर वर्ग में दिव्य अग्रवाल ने पहला, वेदांत दुबे ने दूसरा व लवी ने तीसरा स्थान हासिल किया। इस दौरान आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री प्रदीप जैन एवं विशिष्ट अतिथि सीताराम यादव व अरविंद वशिष्ठ रहे। कार्यक्रम संयोजक मोहन नेपाली ने नेताजी के त्याग और बलिदान पर प्रकाश डाला। इस मौके पर सुबोध उदैनिया, डा. मनमोहन मनु, अनंजय नेपाली, अनिल कुशवाहा, हरिनारायण श्रीवास्तव, कौशल सारस्वत, विजय गोपाल आदि मौजूद रहे। ब्यूरो