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नवरात्र आज से, मंदिरों में गूंजेंगे देवी मां के जयकारे

Thu, 07 Oct 2021 01:42 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 07 Oct 2021 01:42 AM IST
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Navratri from today, the chants of Mother Goddess will resonate in the temples
झांसी। जप, तप, श्रद्धा और देवी माता की भक्ति का पर्व शारदीय नवरात्र अश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा बृहस्पतिवार से प्रारंभ हो जाएंगे। महानगर के सभी देवी मंदिरों में भोर होते ही माता के दर्शन एवं पूजा के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग जाएगा। कई स्थानों पर माता की दिव्य मूर्तियां शुभ मुहूर्त में विराजमान की जाएंगीं। इस बार शारदीय नवरात्र आठ दिन रहेगा। श्रद्धालु प्रथमा पर व्रत धारण कर और अखंड ज्योति प्रज्ज्वलन और घट स्थापना कर अनुष्ठान करेंगेे।
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सनातन धर्म में शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व है। श्रद्धालु मां जगदंबे के विभिन्न अनुपम रूपों की पूजा वंदना करते हैं। महानगर के प्राचीन देवी मंदिर पंचकुइयां माता मंदिर, सीपरी स्थित लहर की देवी मंदिर, लक्ष्मी गेट स्थित महाकाली मंदिर, मां लक्ष्मी मंदिर, विश्वविद्यालय स्थित कैमासन और मैमासन मंदिर, पानी वाली धर्मशाला स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों में बुधवार को भक्तों ने साज सज्जा पूरी की। इन सभी मंदिरों में सुबह चार बजे से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगनी शुरू हो जाएगी। इसके साथ ही मंदिरों और अन्य धर्मस्थलों में अनुष्ठान भी किये जाएंगे। मिट्टी के खप्परों में ज्वारे बोये जाएंगे। इधर महानगर में कई स्थानों पर दुर्गा उत्सव मनाते हुए माता की मूर्तियां विराजमान की जाएंगीं। कई श्रद्धालु रात में जयकारे लगाते हुए ढोल नगाड़ों की धुनो के बीच मूर्तियां ले जाते नजर आये।
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अखंड ज्योति का विशेष महत्व
मां दुर्गा की पूजा अनुष्ठानों में अखंड ज्योति का बड़ा महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इससे माता जगदंबा प्रसन्न होती हैं और श्रद्धालु के भाग्य का उदय होता है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार प्रथमा पर पूजा अनुष्ठान और अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित की जाती है। जो पूरे नवरात्र दौरान जलती रहती है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार अनुष्ठान के दौरान भक्त को ब्रहमचर्य का पालन करना चाहिये।
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चित्रा नक्षत्र में आएगी मां
शारदीय नवरात्र के पहले दिन बृहस्पतिवार को चित्रा नक्षत्र रहेगा। आचार्य शांतनु पांडेय के अनुसार मूर्ति स्थापना व घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6.42 बजे सेे 7.50 बजे तक रहेगा। इसके बाद सुबह 10.46 बजे से दोपहर 1.43 बजे तक रहेगा।
ऐसे करें मां की पूजा
शारदीय नवरात्र पर पूजा में लाल वस्त्र , श्रीफल व सुहाग की सामग्री माता को अर्पण करें। कमलगट्टे की माला से मंत्रों का जाप करें। संध्या काल में मां की मूर्ति अथवा चित्र के समक्ष शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित कर सुख समृद्धि की कामना करें।

भावुक मन से किया पुरखों को विदा
बुधवार को पितृ पक्ष की अमावस्या मनायी गई। लोगों ने अपने पुरखों का स्मरण कर उन्हें तर्पण दिया और भावुक मन से विदाई दी। सुबह महानगर के जलाशयों पानी वाली धर्मशाला, आतिया तालाब, लक्ष्मी तालाब, श्याम चोपड़ा में जाकर लोगों ने अपने पूर्वजों के साथ नाना पक्ष के पूर्वजों को भी कुशा से जल तर्पण किया व श्राद्ध कर्म किया। गाय, कुत्ता व कौआ आदि को भोजन दान कराया।
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