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प्रकृति मुफ्त में देती है अरबों रुपये कीमत की ऊर्जा
अमर उजाला ब्यूरो/झांसी
Updated Sun, 04 Sep 2016 01:33 AM IST
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प्रकृति मुफ्त में देती है अरबों रुपये कीमत की ऊर्जा
- फोटो : demo pic
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झांसी। वृक्षों से जो ऊर्जा हम छह माह में लेते है, वह अन्य संसाधनों से प्राप्त करने पर कई अरब रुपये खर्च करने होंगे। लेकिन, प्रकृति हमें यह सब मुफ्त में देती है, इसलिए हमें पेड़ों का संरक्षण करना चाहिए। यह बात अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैज ने बुंदेलखंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियररिंग एंड टेक्नोलॉजी में आयोजित बायोमेडिकल इंजीनियरिंग एंड सपोर्टिव टेक्नोलॉजी (बेस्ट 2016) के समापन सत्र में कही। अन्य विद्वानों ने भी प्रकृति व चिकित्सीय उपकरण अपडेट करने पर अपने विचार व्यक्त किए।
मोहम्मद फैज ने बताया कि सूरज से निकलने वाली ऊर्जा का उपयोग पेड़ तो कर लेते हैं, लेकिन मनुष्य इसका सीधा उपयोग नहीं कर रहा है। यदि लोग सौर ऊर्जा का प्रयोग करें तो अरबों रुपये बचाए जा सकते हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद अली ने बताया कि सफ्रैस एक्टिव एजेंट का उपयोग भारी मैटल एवं ऑरगेनिक टॉक्सिक मेटेरियल की मौजूदगी जानने में किया जाता है। इस तकनीक से यह भी पता चलता है कि दवा व पानी में कितनी मात्रा में दूषित पदार्थ हैं। इसकी मदद से दूषित पदार्थों को उससे अलग भी किया जा सकता है।
सेमिनार को संबोधित करते हुए इथियोपिया अफ्रीका से आए प्रवक्ता अमित पांडे ने आरईएससी प्रक्रिया तथा इसका इलेक्ट्रोनिक और कंप्यूटर के क्षेत्र में उपयोग से बायो उपकरण में मशीन की योग्यता को बढ़ाने में बड़ा योगदान बताया। कासिम विश्वविद्यालय सऊदी अरब के प्रवक्ता मोहम्मद साजिब ने फेक्ट्रल एंड क्योंस के बारे में बताया कि इससे चिकित्सक उपकरणों जैसे ईएमआरआई, फ्रेक्चर स्कैनर को अपडेट किया जाता है, इससे मरीजों की जांच में फायदा होता है। इसके अलावा शिवांगी यादव, शिखा शिवहरे आदि ने भी अपने शोध पत्र पढ़े।
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अध्यक्षता कर रहीं शहनाज अयूब ने शुक्रवार को विमोचित हुई पुस्तक बेस्ट 2016 व वेबसाइट कार्डों सिग्नेचर के बारे में छात्रों व प्रवक्ताओं को जानकारी दी। समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र व स्मृति चिह्न प्रदान किए गए। आभार व्यक्त करते हुए संस्थान के निदेशक डा. डीएस यादव ने विज्ञान के क्षेत्र में ई-गवर्नेंस के क्षेत्र के महत्व बताया। उन्होंने कहा कि बायोकेमिकल मेडिसन को वायरलेस तरीके से बायोमेडिकल सिगनल को दूर तक भेजा जा सकता है।
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मोहम्मद फैज ने बताया कि सूरज से निकलने वाली ऊर्जा का उपयोग पेड़ तो कर लेते हैं, लेकिन मनुष्य इसका सीधा उपयोग नहीं कर रहा है। यदि लोग सौर ऊर्जा का प्रयोग करें तो अरबों रुपये बचाए जा सकते हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद अली ने बताया कि सफ्रैस एक्टिव एजेंट का उपयोग भारी मैटल एवं ऑरगेनिक टॉक्सिक मेटेरियल की मौजूदगी जानने में किया जाता है। इस तकनीक से यह भी पता चलता है कि दवा व पानी में कितनी मात्रा में दूषित पदार्थ हैं। इसकी मदद से दूषित पदार्थों को उससे अलग भी किया जा सकता है।
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सेमिनार को संबोधित करते हुए इथियोपिया अफ्रीका से आए प्रवक्ता अमित पांडे ने आरईएससी प्रक्रिया तथा इसका इलेक्ट्रोनिक और कंप्यूटर के क्षेत्र में उपयोग से बायो उपकरण में मशीन की योग्यता को बढ़ाने में बड़ा योगदान बताया। कासिम विश्वविद्यालय सऊदी अरब के प्रवक्ता मोहम्मद साजिब ने फेक्ट्रल एंड क्योंस के बारे में बताया कि इससे चिकित्सक उपकरणों जैसे ईएमआरआई, फ्रेक्चर स्कैनर को अपडेट किया जाता है, इससे मरीजों की जांच में फायदा होता है। इसके अलावा शिवांगी यादव, शिखा शिवहरे आदि ने भी अपने शोध पत्र पढ़े।
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अध्यक्षता कर रहीं शहनाज अयूब ने शुक्रवार को विमोचित हुई पुस्तक बेस्ट 2016 व वेबसाइट कार्डों सिग्नेचर के बारे में छात्रों व प्रवक्ताओं को जानकारी दी। समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र व स्मृति चिह्न प्रदान किए गए। आभार व्यक्त करते हुए संस्थान के निदेशक डा. डीएस यादव ने विज्ञान के क्षेत्र में ई-गवर्नेंस के क्षेत्र के महत्व बताया। उन्होंने कहा कि बायोकेमिकल मेडिसन को वायरलेस तरीके से बायोमेडिकल सिगनल को दूर तक भेजा जा सकता है।