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ये है वीआईपी प्लेटफार्म का हाल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 10 Aug 2016 01:13 AM IST
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railway station, jhansi news
- फोटो : amar ujala, lalitpur news
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झांसी। रेलवे स्टेशन का अति व्यस्त वीआईपी प्लेटफार्म नंबर एक में यात्री सुविधाओं का टोटा है। सुरक्षा के लिहाज से लगे मेटल डिटेक्टर बेकार हो गए हैं। एस्केलेटर के ठीक बगल में शेड हटने के बाद वहां यात्रियों का बैठना दूभर हो गया है। कभी धूूप तो कभी बारिश में उन्हें अपना सामान उठाकर सुरक्षित जगह की तलाश करनी पड़ती है। वेटिंग रूम में शौचालय ओवरफ्लो हो जाते हैं।
बदरंग पड़ी झांसी रानी की ऑयल पेंटिंग
बुकिंग हॉल (गेट नंबर दो) की दीवारों पर महारानी लक्ष्मीबाई की वर्षों पुरानी ऑयल पेंटिंग बनी हुई हैं। यह तस्वीरें रानी झांसी की शौर्य गाथाएं बयान करती हैं। समय-समय पर आसपास की दीवारों पर होने वाली पुताई का सफेद पेंट इन तस्वीरों पर भी जगह-जगह गिर गया हैं, जिसे तुरंत ही साफ नहीं किया गया। दूसरा, तस्वीरों का रंग भी भद्दा पड़ गया है। इस कारण तस्वीरें बदरंग लगने लगी है। आए दिन वीआईपी व बड़े रेल अफसरों के आने पर स्टेशन को जमीनी तौर पर तो चमकाया जाता है, मगर इन तस्वीरों की तरफ सभी अनदेखी किए हुए हैं।
बेतरतीब लगे ग्लो साइन बोर्ड व होर्डिंग
प्लेटफार्म नंबर एक पर मुख्य टिकट निरीक्षक स्टेशन के कक्ष से टिकट चेकिंग लॉबी के बाहर तक की दीवारों तक वर्गाकार ग्लोसाइन बोर्ड नीचे की तरफ लगा दिए गए हैं। इसकी चपेट में आने से कई यात्रियों के कपड़े तक फट चुके हैं। इसी तरह प्लेटफार्म के बीच बने टाइल्स के चबूतरों के ऊपर लगे वर्गाकार होर्डिंग नीचे की तरफ लगाए जाने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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मेडल डिटेक्टर नहीं कर रहे काम
आरपीएफ ने सुरक्षा की दृष्टि से मुख्य द्वार पर लगेज स्कैनर मशीन के बगल से मेटल डिटेक्टर लगा रखा है। मगर यह लंबे समय से काम नहीं कर रहा है। इसी तरह गेट नंबर दो लगे मेटल डिटेक्टर को उठाकर बुकिंग हॉल के एक कोने में रख दिया गया है, जहां वह धूल खा रहा है। नजदीक ही स्वतंत्रता दिवस है। इसके बाद भी सुरक्षा उपकरणों को दुरुस्त करने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
शौचालय हो जाते हैं ओवरफ्लो
बारिश होते ही सेकेंड क्लास वेटिंग रूम का हाल बुरा हो जाता है। यहां के शौचालय बारिश में पानी निकासी के उचित इंतजाम न होने के कारण ओवरफ्लो हो जाते हैं। इतना ही नहीं बारिश में अंडर ग्राउंड नालियों का पानी प्लेटफार्मों पर बहने लगता है। नालियों की गंदगी बाहर आ जाती है।
प्लेटफार्म शेड से टपक रहा पानी
बारिश में प्लेटफार्म एक पर लगा शेड जगह-जगह से टपकने लगता है, इससे यात्रियों का प्लेटफार्म पर खड़ा होना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, रेल प्रशासन ने अब कुछ हिस्से में पड़ी सीमेंट सीटों की जगह चद्दर का शेड डलवाना शुरू कर दिया है। दूसरी तरफ, बुकिंग हॉल के बाहर एस्केलेटर लगाते समय हटाए गए शेड को अभी तक नहीं लगाया गया है, इससे यात्रियों को धूप में प्लेटफार्म पर बैठना पड़ता है। बारिश आने पर यात्री सामान लेकर इधर-उधर भागते नजर आते हैं।
एस्केलेटर की सीढ़ियां हुई सफेद
प्लेटफार्म एक पर एस्केलेटर का संचालन सात जून 2015 को हुआ था। एस्केलेटर की सीढ़ियों पर किसी यात्री का सफेद पेंट से भरा डिब्बा गिर गया था। इससे एक तरफ की सीढ़ियों पर सफेद रंग के धब्बे पड़ गए है। इससे एस्केलेटर की सुंदरता कम हो गई है। एस्केलेटर की ऊंचाई भी वृद्ध यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। वह प्लेटफार्म एक से चढ़ तो जाते है, मगर प्लेटफार्म दो/तीन व चार/ पांच पर उतरने के लिए एस्केलेटर न लगा होने के कारण उनको परेशानी का सामना करना पड़ता है।
‘बुकिंग हॉल में लगी तस्वीरों को दुबारा ऑयल पेंट कराने की योजना बनाई जा रही है। ग्लोसाइन बोर्ड भी गलत लग गए है, उनको ऊपर कराया जाएगा। अन्य कमियों की तरफ भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।’
गिरीश कंचन, पीआरओ झांसी रेल मंडल।
अफसर जागे, खटमल भागे
रेलवे स्टेशन के विश्रामालय की डोरमेट्री में खटमल हो जाने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अमर उजाला ने इस समस्या को प्रमुखता से उठाया। रेल प्रशासन ने तीन दिन तक डोरमेट्री की बुकिंग बंद करके खटमलों का सफाया कर दिया है।
अमर उजाला ने तीन अगस्त के अपने अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था कि रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर बने विश्रामालय के एसी डोरमेट्री में खटमल होने से यात्रियों का रात काटना मुश्किल हो गया है। नियमित यात्री बुकिंग कराने से कतराने लगे हैं। कई महीनों से यह समस्या बनी हुई है। यात्रियों की शिकायत के बावजूद अभी तक कोई हल नहीं निकाला गया है।
रेल प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सात से नौ अगस्त तक एसी डोरमेट्री के नौ पलंगों की बुकिंग बंद करके खटमलों को हटाने का काम कराया। इस दौरान सभी पलंगों को धूप में रखकर कीटाणु मारने की दवा से पॉलिश किए गए। गद्दे, तकिये व चादरों को साफ कर सुखाया गया। कर्मचारियों ने बताया कि पलंगों में सफाई के दौरान बड़ी संख्या में खटमल बाहर निकले। सभी पलंगों से अब खटमल गायब हो चुके है।
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बदरंग पड़ी झांसी रानी की ऑयल पेंटिंग
बुकिंग हॉल (गेट नंबर दो) की दीवारों पर महारानी लक्ष्मीबाई की वर्षों पुरानी ऑयल पेंटिंग बनी हुई हैं। यह तस्वीरें रानी झांसी की शौर्य गाथाएं बयान करती हैं। समय-समय पर आसपास की दीवारों पर होने वाली पुताई का सफेद पेंट इन तस्वीरों पर भी जगह-जगह गिर गया हैं, जिसे तुरंत ही साफ नहीं किया गया। दूसरा, तस्वीरों का रंग भी भद्दा पड़ गया है। इस कारण तस्वीरें बदरंग लगने लगी है। आए दिन वीआईपी व बड़े रेल अफसरों के आने पर स्टेशन को जमीनी तौर पर तो चमकाया जाता है, मगर इन तस्वीरों की तरफ सभी अनदेखी किए हुए हैं।
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बेतरतीब लगे ग्लो साइन बोर्ड व होर्डिंग
प्लेटफार्म नंबर एक पर मुख्य टिकट निरीक्षक स्टेशन के कक्ष से टिकट चेकिंग लॉबी के बाहर तक की दीवारों तक वर्गाकार ग्लोसाइन बोर्ड नीचे की तरफ लगा दिए गए हैं। इसकी चपेट में आने से कई यात्रियों के कपड़े तक फट चुके हैं। इसी तरह प्लेटफार्म के बीच बने टाइल्स के चबूतरों के ऊपर लगे वर्गाकार होर्डिंग नीचे की तरफ लगाए जाने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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मेडल डिटेक्टर नहीं कर रहे काम
आरपीएफ ने सुरक्षा की दृष्टि से मुख्य द्वार पर लगेज स्कैनर मशीन के बगल से मेटल डिटेक्टर लगा रखा है। मगर यह लंबे समय से काम नहीं कर रहा है। इसी तरह गेट नंबर दो लगे मेटल डिटेक्टर को उठाकर बुकिंग हॉल के एक कोने में रख दिया गया है, जहां वह धूल खा रहा है। नजदीक ही स्वतंत्रता दिवस है। इसके बाद भी सुरक्षा उपकरणों को दुरुस्त करने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
शौचालय हो जाते हैं ओवरफ्लो
बारिश होते ही सेकेंड क्लास वेटिंग रूम का हाल बुरा हो जाता है। यहां के शौचालय बारिश में पानी निकासी के उचित इंतजाम न होने के कारण ओवरफ्लो हो जाते हैं। इतना ही नहीं बारिश में अंडर ग्राउंड नालियों का पानी प्लेटफार्मों पर बहने लगता है। नालियों की गंदगी बाहर आ जाती है।
प्लेटफार्म शेड से टपक रहा पानी
बारिश में प्लेटफार्म एक पर लगा शेड जगह-जगह से टपकने लगता है, इससे यात्रियों का प्लेटफार्म पर खड़ा होना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, रेल प्रशासन ने अब कुछ हिस्से में पड़ी सीमेंट सीटों की जगह चद्दर का शेड डलवाना शुरू कर दिया है। दूसरी तरफ, बुकिंग हॉल के बाहर एस्केलेटर लगाते समय हटाए गए शेड को अभी तक नहीं लगाया गया है, इससे यात्रियों को धूप में प्लेटफार्म पर बैठना पड़ता है। बारिश आने पर यात्री सामान लेकर इधर-उधर भागते नजर आते हैं।
एस्केलेटर की सीढ़ियां हुई सफेद
प्लेटफार्म एक पर एस्केलेटर का संचालन सात जून 2015 को हुआ था। एस्केलेटर की सीढ़ियों पर किसी यात्री का सफेद पेंट से भरा डिब्बा गिर गया था। इससे एक तरफ की सीढ़ियों पर सफेद रंग के धब्बे पड़ गए है। इससे एस्केलेटर की सुंदरता कम हो गई है। एस्केलेटर की ऊंचाई भी वृद्ध यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। वह प्लेटफार्म एक से चढ़ तो जाते है, मगर प्लेटफार्म दो/तीन व चार/ पांच पर उतरने के लिए एस्केलेटर न लगा होने के कारण उनको परेशानी का सामना करना पड़ता है।
‘बुकिंग हॉल में लगी तस्वीरों को दुबारा ऑयल पेंट कराने की योजना बनाई जा रही है। ग्लोसाइन बोर्ड भी गलत लग गए है, उनको ऊपर कराया जाएगा। अन्य कमियों की तरफ भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।’
गिरीश कंचन, पीआरओ झांसी रेल मंडल।
अफसर जागे, खटमल भागे
रेलवे स्टेशन के विश्रामालय की डोरमेट्री में खटमल हो जाने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अमर उजाला ने इस समस्या को प्रमुखता से उठाया। रेल प्रशासन ने तीन दिन तक डोरमेट्री की बुकिंग बंद करके खटमलों का सफाया कर दिया है।
अमर उजाला ने तीन अगस्त के अपने अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था कि रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर बने विश्रामालय के एसी डोरमेट्री में खटमल होने से यात्रियों का रात काटना मुश्किल हो गया है। नियमित यात्री बुकिंग कराने से कतराने लगे हैं। कई महीनों से यह समस्या बनी हुई है। यात्रियों की शिकायत के बावजूद अभी तक कोई हल नहीं निकाला गया है।
रेल प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सात से नौ अगस्त तक एसी डोरमेट्री के नौ पलंगों की बुकिंग बंद करके खटमलों को हटाने का काम कराया। इस दौरान सभी पलंगों को धूप में रखकर कीटाणु मारने की दवा से पॉलिश किए गए। गद्दे, तकिये व चादरों को साफ कर सुखाया गया। कर्मचारियों ने बताया कि पलंगों में सफाई के दौरान बड़ी संख्या में खटमल बाहर निकले। सभी पलंगों से अब खटमल गायब हो चुके है।