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वायरल का बढ़ा प्रकोप : अस्पताल में बेड की मारामारी, स्ट्रेचर पर लिटाने पड़े मरीज
Sun, 05 Sep 2021 09:56 AM IST
झांसी ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 05 Sep 2021 09:56 AM IST
सार
वायरल के कहर से सरकारी अस्पतालों में बेड के लिए अब मारामारी शुरू हो गई है। बुखार, खांसी, जुकाम के मरीजों के चलते मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के वार्ड फुल हो गए हैं। शहर से लेकर गांव तक वायरल का कहर टूट रहा है। सरकारी और प्राइवेट नर्सिंगहोमों की ओपीडी को लेकर रोजाना एक हजार से ज्यादा मरीज वायरल का इलाज कराने आ रहे हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में स्ट्रेचर पर मरीज को लिटाना पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल में बढ़ मरीजों की लगी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
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सर्द-गर्म मौसम ने वायरल के प्रकोप को बढ़ा दिया है। बुखार से कराहते और खांसते हुए मरीज अस्पतालों में इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं। पर्चा काउंटर से लेकर ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी-लंबी लाइनें लगी रहती हैं। इसके अलावा गंभीर मरीजों को इलाज के लिए वार्ड में भर्ती किया जा रहा है।
स्ट्रेचर पर मरीजों को भर्ती
जिला अस्पताल में मेल और फीमेल वार्ड बने हुए हैं। मेल वार्ड में 22 बेड हैं, सभी भरे चल रहे हैं। स्टाफ ने बताया कि रोजाना जिला अस्पताल में 50 वायरल के मरीज भर्ती हो रहे हैं। बेड के लिए भी वेटिंग शुरू हो गई है। डिस्चार्ज होने के बाद बेड खाली होने पर ही दूसरे मरीज भर्ती किया जाता है। मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन वार्ड भी मरीजों खचाखच भरे चल रहे हैं। यहां वार्ड छह, सात और आठ में वायरल बुखार के रोगियों को भर्ती किया जाता है। सभी वार्ड में 50-50 बेड हैं। जब वार्ड फुल हो गया है तो फिर यहां पर स्ट्रेचर पर मरीजों को भर्ती करके इलाज शुरू कर दिया गया है।
सीबीसी जांच कराने वालों की संख्या हुई दोगुनी
जिला अस्पताल में वायरल के प्रकोप के चलते सीबीसी जांच कराने वालों की संख्या भी दोगुनी हो गई है। पहले जहां रोजाना 50 से 55 जांचें होती थीं, वो अब बढ़कर 110 पहुंच गई हैं। पैथोलॉजी में भी रोगियों की सुबह से ही भीड़ जांच कराने के लिए लग जाती है। इसी जांच के आधार पर प्लेटलेट्स कम होने पर डॉक्टर रोगी को मेल या फीमेल वार्ड में भर्ती करते हैं। फिर डेंगू की जांच के लिए सैंपल मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है।
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इन दिनोें मेडिसिन ओपीडी में लगभग 300 मरीज बुखार के आ रहे हैं। जांच कराने पर जिनको जरूरी समझा जाता है, उन्हें ही वार्ड में भर्ती किया जाता है। वार्ड मरीजों से भर गए हैं। - डॉ. रामबाबू सिंह, फिजीशियन, मेडिकल कॉलेज।
वायरल के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ओपीडी में 50 प्रतिशत मरीज तो वायरल के ही आ रहे हैं। हालत गंभीर लगने पर मरीज को तुरंत वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया जाता है। - डॉ. डीएस गुप्ता, फिजीशियन, जिला अस्पताल।
स्ट्रेचर पर मरीजों को भर्ती
जिला अस्पताल में मेल और फीमेल वार्ड बने हुए हैं। मेल वार्ड में 22 बेड हैं, सभी भरे चल रहे हैं। स्टाफ ने बताया कि रोजाना जिला अस्पताल में 50 वायरल के मरीज भर्ती हो रहे हैं। बेड के लिए भी वेटिंग शुरू हो गई है। डिस्चार्ज होने के बाद बेड खाली होने पर ही दूसरे मरीज भर्ती किया जाता है। मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन वार्ड भी मरीजों खचाखच भरे चल रहे हैं। यहां वार्ड छह, सात और आठ में वायरल बुखार के रोगियों को भर्ती किया जाता है। सभी वार्ड में 50-50 बेड हैं। जब वार्ड फुल हो गया है तो फिर यहां पर स्ट्रेचर पर मरीजों को भर्ती करके इलाज शुरू कर दिया गया है।
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सीबीसी जांच कराने वालों की संख्या हुई दोगुनी
जिला अस्पताल में वायरल के प्रकोप के चलते सीबीसी जांच कराने वालों की संख्या भी दोगुनी हो गई है। पहले जहां रोजाना 50 से 55 जांचें होती थीं, वो अब बढ़कर 110 पहुंच गई हैं। पैथोलॉजी में भी रोगियों की सुबह से ही भीड़ जांच कराने के लिए लग जाती है। इसी जांच के आधार पर प्लेटलेट्स कम होने पर डॉक्टर रोगी को मेल या फीमेल वार्ड में भर्ती करते हैं। फिर डेंगू की जांच के लिए सैंपल मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है।
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इन दिनोें मेडिसिन ओपीडी में लगभग 300 मरीज बुखार के आ रहे हैं। जांच कराने पर जिनको जरूरी समझा जाता है, उन्हें ही वार्ड में भर्ती किया जाता है। वार्ड मरीजों से भर गए हैं। - डॉ. रामबाबू सिंह, फिजीशियन, मेडिकल कॉलेज।
वायरल के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ओपीडी में 50 प्रतिशत मरीज तो वायरल के ही आ रहे हैं। हालत गंभीर लगने पर मरीज को तुरंत वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया जाता है। - डॉ. डीएस गुप्ता, फिजीशियन, जिला अस्पताल।