फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   More than 200 children were victims of nephrotic syndrome in five years

पांच साल में 200 से ज्यादा बच्चे हुए नेफ्रोटिक सिंड्रोम का शिकार

Sun, 30 Jan 2022 12:48 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 30 Jan 2022 12:48 AM IST
विज्ञापन
More than 200 children were victims of nephrotic syndrome in five years
झांसी। बच्चों के पेट, चेहरे, आंखों की चारों तरफ होने वाली सूजन को कतई नजर अंदाज न करें। ये नेफ्रोटिक सिंड्रोम हो सकता है। यह किडनी से जुड़ी बीमारी है, जो कि दो से छह साल के बच्चों में देखी जाती है। समय पर इलाज न कराने पर इस बीमारी से किडनी पूरी तरह खराब हो सकती है। मेडिकल कॉलेज में पिछले पांच सालों में 211 बच्चे इलाज कराने आ चुके हैं।
विज्ञापन

किडनी के इस रोग के कारण किसी भी उम्र में शरीर में सूजन हो सकती है मगर मुख्य रूप से ये बीमारी बच्चों में दिखाई देती है। इलाज कराने पर रोग नियंत्रण में आ जाता है। बाद में फिर सूजन दिखाई देने लगती है। यह सिलसिला सालों तक चलते रहना नेफ्रोटिक सिंड्रोम की विशेषज्ञता है। लंबे समय तक बार-बार सूजन होने से ये रोग मरीज और उसके पारिवारिक सदस्यों के लिए चिंताजनक रोग है। सरल भाषा में कहा जा सकता है कि किडनी शरीर में छन्नी का काम करती है। इसके द्वारा शरीर में अनावश्यक उत्सर्जी पदार्थ, अतिरिक्त पानी पेशाब द्वारा बाहर निकल जाता है। मगर इस बीमारी में किडनी की छन्नी जैसे छेद बड़े हो जाने से अतिरिक्त पानी, उत्सर्जी पदार्थ के साथ-साथ शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन भी बाहर निकल जाता है। फिर शरीर में प्रोटीन की मात्रा कम हो से सूजन आने लगती है।
विज्ञापन

ये गंभीर खतरे हो सकते
नेफ्रोटिक सिंड्रोम में जल्दी संक्रमण होना, नस में रक्त के थक्के जमना, रक्त अल्पता, बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के कारण ह्रदय रोग, किडनी खराब होने की संभावना रहती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस तरह करते पता
- यूरिन की जांच
- खून की जांच
- किडनी बायोप्सी
ये हैं मुख्य लक्षण
- इस रोग की शुरूआत बुखार, खांसी के बाद होती है।
- आंखों के नीचे, चेहरे पर सूजन दिखाई देती है।
- सोकर उठने पर सूजन दिखती है, शाम तक कम हो जाती है।
- रोग के बढ़ने पर पेट फूल जाता है। पेशाब कम होती है।
- पूरे शरीर में सूजन आ जाने पर वजन भी बढ़ जाता है।
- कई बार पेशाब से झाग भी आना शुरू हो जाता है।
मेडिकल कॉलेज में पांच सालों में 211 बच्चे नेफ्रोटिक सिंड्रोम के आए हैं। समय पर इलाज न कराने पर इस बीमारी में बच्चे की किडनी हमेशा के लिए खराब हो सकती हैं। ऐसे में लक्षण दिखाई देने पर इलाज में देरी न करें। - डॉ. ओमशंकर चौरसिया, बाल रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed