{"_id":"61f592f00c8db567e474ce46","slug":"more-than-200-children-were-victims-of-nephrotic-syndrome-in-five-years-jhansi-news-jhs2139997159","type":"story","status":"publish","title_hn":"पांच साल में 200 से ज्यादा बच्चे हुए नेफ्रोटिक सिंड्रोम का शिकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पांच साल में 200 से ज्यादा बच्चे हुए नेफ्रोटिक सिंड्रोम का शिकार
विज्ञापन
झांसी। बच्चों के पेट, चेहरे, आंखों की चारों तरफ होने वाली सूजन को कतई नजर अंदाज न करें। ये नेफ्रोटिक सिंड्रोम हो सकता है। यह किडनी से जुड़ी बीमारी है, जो कि दो से छह साल के बच्चों में देखी जाती है। समय पर इलाज न कराने पर इस बीमारी से किडनी पूरी तरह खराब हो सकती है। मेडिकल कॉलेज में पिछले पांच सालों में 211 बच्चे इलाज कराने आ चुके हैं।
किडनी के इस रोग के कारण किसी भी उम्र में शरीर में सूजन हो सकती है मगर मुख्य रूप से ये बीमारी बच्चों में दिखाई देती है। इलाज कराने पर रोग नियंत्रण में आ जाता है। बाद में फिर सूजन दिखाई देने लगती है। यह सिलसिला सालों तक चलते रहना नेफ्रोटिक सिंड्रोम की विशेषज्ञता है। लंबे समय तक बार-बार सूजन होने से ये रोग मरीज और उसके पारिवारिक सदस्यों के लिए चिंताजनक रोग है। सरल भाषा में कहा जा सकता है कि किडनी शरीर में छन्नी का काम करती है। इसके द्वारा शरीर में अनावश्यक उत्सर्जी पदार्थ, अतिरिक्त पानी पेशाब द्वारा बाहर निकल जाता है। मगर इस बीमारी में किडनी की छन्नी जैसे छेद बड़े हो जाने से अतिरिक्त पानी, उत्सर्जी पदार्थ के साथ-साथ शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन भी बाहर निकल जाता है। फिर शरीर में प्रोटीन की मात्रा कम हो से सूजन आने लगती है।
ये गंभीर खतरे हो सकते
नेफ्रोटिक सिंड्रोम में जल्दी संक्रमण होना, नस में रक्त के थक्के जमना, रक्त अल्पता, बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के कारण ह्रदय रोग, किडनी खराब होने की संभावना रहती है।
विज्ञापन
इस तरह करते पता
- यूरिन की जांच
- खून की जांच
- किडनी बायोप्सी
ये हैं मुख्य लक्षण
- इस रोग की शुरूआत बुखार, खांसी के बाद होती है।
- आंखों के नीचे, चेहरे पर सूजन दिखाई देती है।
- सोकर उठने पर सूजन दिखती है, शाम तक कम हो जाती है।
- रोग के बढ़ने पर पेट फूल जाता है। पेशाब कम होती है।
- पूरे शरीर में सूजन आ जाने पर वजन भी बढ़ जाता है।
- कई बार पेशाब से झाग भी आना शुरू हो जाता है।
मेडिकल कॉलेज में पांच सालों में 211 बच्चे नेफ्रोटिक सिंड्रोम के आए हैं। समय पर इलाज न कराने पर इस बीमारी में बच्चे की किडनी हमेशा के लिए खराब हो सकती हैं। ऐसे में लक्षण दिखाई देने पर इलाज में देरी न करें। - डॉ. ओमशंकर चौरसिया, बाल रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।
विज्ञापन
किडनी के इस रोग के कारण किसी भी उम्र में शरीर में सूजन हो सकती है मगर मुख्य रूप से ये बीमारी बच्चों में दिखाई देती है। इलाज कराने पर रोग नियंत्रण में आ जाता है। बाद में फिर सूजन दिखाई देने लगती है। यह सिलसिला सालों तक चलते रहना नेफ्रोटिक सिंड्रोम की विशेषज्ञता है। लंबे समय तक बार-बार सूजन होने से ये रोग मरीज और उसके पारिवारिक सदस्यों के लिए चिंताजनक रोग है। सरल भाषा में कहा जा सकता है कि किडनी शरीर में छन्नी का काम करती है। इसके द्वारा शरीर में अनावश्यक उत्सर्जी पदार्थ, अतिरिक्त पानी पेशाब द्वारा बाहर निकल जाता है। मगर इस बीमारी में किडनी की छन्नी जैसे छेद बड़े हो जाने से अतिरिक्त पानी, उत्सर्जी पदार्थ के साथ-साथ शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन भी बाहर निकल जाता है। फिर शरीर में प्रोटीन की मात्रा कम हो से सूजन आने लगती है।
विज्ञापन
ये गंभीर खतरे हो सकते
नेफ्रोटिक सिंड्रोम में जल्दी संक्रमण होना, नस में रक्त के थक्के जमना, रक्त अल्पता, बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के कारण ह्रदय रोग, किडनी खराब होने की संभावना रहती है।
विज्ञापन
इस तरह करते पता
- यूरिन की जांच
- खून की जांच
- किडनी बायोप्सी
ये हैं मुख्य लक्षण
- इस रोग की शुरूआत बुखार, खांसी के बाद होती है।
- आंखों के नीचे, चेहरे पर सूजन दिखाई देती है।
- सोकर उठने पर सूजन दिखती है, शाम तक कम हो जाती है।
- रोग के बढ़ने पर पेट फूल जाता है। पेशाब कम होती है।
- पूरे शरीर में सूजन आ जाने पर वजन भी बढ़ जाता है।
- कई बार पेशाब से झाग भी आना शुरू हो जाता है।
मेडिकल कॉलेज में पांच सालों में 211 बच्चे नेफ्रोटिक सिंड्रोम के आए हैं। समय पर इलाज न कराने पर इस बीमारी में बच्चे की किडनी हमेशा के लिए खराब हो सकती हैं। ऐसे में लक्षण दिखाई देने पर इलाज में देरी न करें। - डॉ. ओमशंकर चौरसिया, बाल रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।