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बच्चों को खिलाई पेट में कीड़ा मारने की दवा
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झांसी। पूर्व माध्यमिक विद्यालय खुशीपुरा में सीएमओ डॉ. अनिल कुमार, बीएसए वेदराम ने कृमि मुक्ति दिवस का शुभारंभ हुआ। उन्होंने बच्चों को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई। कृमि मुक्ति दिवस 11 से 12 मार्च दो दिन मनाया जाएगा। छूटे हुए बच्चों को 14 से 19 मार्च के बीच खिलाया जाएगा। इसमें जिले में हर स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर बच्चों को पेट के कीड़ों की दवाई खिलाई जाएगी।
सीएमओ ने बताया कि जिले में लगभग छह लाख बच्चों को पेट के कीड़ों की दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। सर्वे के अनुसार जिले में 63 फीसदी बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं। एनीमिया पीड़ित ज्यादातर बच्चों में पेट के कीड़ों की समस्या पाई जाती है। समय-समय पर पेट के कीड़ों की दवाई देने से बच्चों को न सिर्फ पेट में कृमि की परेशानी से मुक्ति मिलती है। बल्कि, एनीमिया, प्रोटीन की कमी, कुपोषण जैसी दिक्कतों से मुक्ति मिलती है। उन्होंने बताया कि कृमि की समस्या से बच्चों में न सिर्फ शारीरिक और मानसिक समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं। बल्कि, एकाग्रता में कमी, कमजोरी, पढ़ने में मन न लगना जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। इनसे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास रुकता है। डीईआईसी प्रबंधक डॉ. रामबाबू ने बताया कि वर्ष में दो बार एक से 19 साल तक के बच्चे को पेट के कीड़ों की दवाई जरूर देनी चाहिए। इस दौरान दीप्ति रिछारिया, डॉ. उत्सव राज, रत्नेश त्रिपाठी, प्रसून जैन, प्रवेंद्र कुमार, बीएन श्रीवास्तव, पीयूष अग्रवाल, अनीता रिछारिया, रजनी साहू मौजूद रहे।
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सीएमओ ने बताया कि जिले में लगभग छह लाख बच्चों को पेट के कीड़ों की दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। सर्वे के अनुसार जिले में 63 फीसदी बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं। एनीमिया पीड़ित ज्यादातर बच्चों में पेट के कीड़ों की समस्या पाई जाती है। समय-समय पर पेट के कीड़ों की दवाई देने से बच्चों को न सिर्फ पेट में कृमि की परेशानी से मुक्ति मिलती है। बल्कि, एनीमिया, प्रोटीन की कमी, कुपोषण जैसी दिक्कतों से मुक्ति मिलती है। उन्होंने बताया कि कृमि की समस्या से बच्चों में न सिर्फ शारीरिक और मानसिक समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं। बल्कि, एकाग्रता में कमी, कमजोरी, पढ़ने में मन न लगना जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। इनसे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास रुकता है। डीईआईसी प्रबंधक डॉ. रामबाबू ने बताया कि वर्ष में दो बार एक से 19 साल तक के बच्चे को पेट के कीड़ों की दवाई जरूर देनी चाहिए। इस दौरान दीप्ति रिछारिया, डॉ. उत्सव राज, रत्नेश त्रिपाठी, प्रसून जैन, प्रवेंद्र कुमार, बीएन श्रीवास्तव, पीयूष अग्रवाल, अनीता रिछारिया, रजनी साहू मौजूद रहे।
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