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मनरेगा में बड़ा घपला : जमीन पर नहीं, कागजों में बनवा दिए बकरी आश्रय स्थल
Fri, 11 Dec 2020 01:08 AM IST
झांसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 11 Dec 2020 01:08 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : pixabay
मनरेगा के कार्यों में बड़ा घपला फिर सामने आया है। बामौर ब्लॉक के 12 से अधिक गांवों में व्यक्तिगत लाभार्थी योजना के तहत होने वाले कामों को बिना कराए ही लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। गोपनीय जांच में इस गड़बड़ी की पुष्टि भी हो चुकी है। इस घोटाले के उजागर होने के बाद मनरेगा सेल में तैनात अफसरों का फंसना तय है।
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मनरेगा के जरिए व्यक्तिगत लाभार्थी योजना के तमाम कार्य कराए जाते हैं। इसमें बकरी पालन करने वालों के लिए बकरी आश्रय स्थल भी बनवाए जा रहे हैं। लाभार्थी की क्षमता के मुताबिक उस पर 65 हजार से 1.10 लाख रुपये तक खर्च किए गए। बताया जा रहा है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 एवं 20-21 में सौ से अधिक लाभार्थी चयनित हुए लेकिन, जांच में पाया गया कि इनमें से पचास फीसदी लाभार्थियों के यहां बिना काम कराए ही लाखों रुपये का भुगतान हड़प लिया गया।
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बामौर ब्लॉक के कई गांव में जांच के दौरान ऐसे मामले उजागर हुए जहां लाभार्थी की जमीन तक चिह्नित नहीं हुई। जबकि कागजों में उसे बना हुआ दिखाकर भुगतान ले लिया गया। इस मामले में मनरेगा सेल के अफसरों समेत तत्कालीन बीडीओ, ग्राम प्रधान, सचिव, तकनीकी सहायक की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही। गड़बड़ी मिलने पर नवंबर महीने में गोपनीय तरीके से जांच शुरू हुई।
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इसके लिए सात अफसरों की टीम लगाई गई। अफसर जब मौके पर पहुंचे तब उनको न कहीं जमीन दिखी, न बकरी शेड। वहीं, जांच शुरू होने की भनक पर कुछ जगहों पर आनन-फानन में तीन फीट ऊंची दीवार खड़ी कर दी गई। गोपनीय रिपोर्ट में करीब 17 लाख रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है लेकिन, विश्वस्त सूत्रों का कहना है यह नुकसान करीब 50 लाख तक का हुआ है।
मनरेगा सेल की निगरानी पर उठे सवाल
मनरेगा जैसे महत्वपूर्ण काम में लगातार घपले एवं फर्जीवाड़े के मामले उजागर हो रहे जबकि इसकी निगरानी के लिए खास तौर से मनरेगा सेल गठित किया गया है। यहां उपायुक्त स्तर का अधिकारी तैनात किया गया है, जिसके पास सिर्फ इनकी निगरानी से संबंधित काम ही है लेकिन, उसके बावजूद लगातार फर्जीवाड़े के मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामले में भी मार्च में भुगतान करके पैसे हड़प लिए गए लेकिन, मामले का खुलासा शिकायत के बाद नवंबर में हुआ। उपायुक्त रामअवतार सिंह का कहना है कि मामले की अभी जांच पूरी नहीं हुई है। दोषियों के खिलाफ जवाबदेही भी तय कराई जाएगी।
इन ग्राम पंचायतों में कराई गई जांच
आलमपुरा, अचौसा, अस्ता, ठैरों, बरगायखांगार, धमनौड़, बरमपुरा, फरीदा, गढवई, हीरानगर, गेंदाकबूला, गौकुल, सगौली, करगुवांखुर्द, खरवांच, पथरोड़ी, शमशेरपुरा, टहकरा, ढिकौली, घनौरा, जखौरा, ककरबई, केरोखड़।