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महात्मा गांधी ने झांसी किले में जाकर किया था वीरांगना लक्ष्मीबाई को नमन

Fri, 01 Oct 2021 01:37 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 01 Oct 2021 01:37 AM IST
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Mahatma Gandhi went to the Jhansi fort and paid tribute to the heroine Laxmibai.
झांसी। स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान 1921 से लेकर 1929 तक झांसी देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की गतिविधियों का बड़ा केंद्र रहा। इसका प्रमुख कारण था वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई द्वारा 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की क्रांति। देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को इस बात का भरोसा हो चला था कि झांसी और आसपास के लोग देश की आजादी के लिए मरने मिटने की भावना रखते हैं। झांसी गजेटियर के मुताबिक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी स्वयं भी 1920 से 1929 के बीच तीन बार झांसी जिले के दौरे पर आए। इस दौरान 1921 में वह जब झांसी आए तो किले में जाकर महारानी लक्ष्मीबाई को नमन कर यहीं पर एक प्रार्थना सभा का भी आयोजन किया गया था। इसके बाद चिरगांव और मोंठ में भी महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता संग्राम की अलख जगाई।
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झांसी के लोगों ने चंदा एकत्र कर महात्मा गांधी को भेंट की थी पांच सौ रुपये की थैली
इतिहासकार हरगोविंद कुशवाहा बताते हैं कि झांसी गजेटियर के पृष्ठ संख्या 72 पर इस बात का उल्लेख है कि महात्मा गांधी 1921 में झांसी आए थे तथा उन्होंने झांसी किले में जाकर महारानी लक्ष्मीबाई को नमन कर स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े क्षेत्र के लोगों के साथ एक प्रार्थना सभा का आयोजन भी किया था। कुशवाहा बताते हैं कि 1921 से 1929 के बीच करीब तीन बार महात्मा गांधी ने झांसी जिले में आकर लोगों में स्वतंत्रता संग्राम की अलख जगाई। हालांकि, इसके पहले वह एक बार 1920 में भी झांसी आ चुके थे। 1921 से 1929 के बीच महात्मा गांधी के अलावा जवाहर लाल नेहरु, खान अब्दुल गफ्फार (सीमांत गांधी), मदनमोहन मालवीय और मोहम्मद जिन्ना भी महात्मा गांधी का स्वतंत्रता आंदोलन का संदेश लेकर झांसी दौरे पर आए थे। 20-21 नवंबर 1921 को महात्मा गांधी झांसी आए थे तथा वह एसपीआई इंटर कॉलेज में ठहरे थे। उनके आगमन पर शहर में जगह-जगह सजावट की गई थी। इस पर महात्मा गांधी ने कहा था कि यह सजावट और खुशी मनाने का समय नहीं है यह समय तब आएगा जब हम देश को आजाद करवा लेंगे। उन्होंने हार्डी गंज(सुभाष गंज), किले के परिसर समेत अन्य स्थानों पर विदेशी कपड़ों की होली जलवाकर स्वतंत्रता संग्राम की अलख जगाई थी। इस दौरान आजादी के आंदोलन के लिए झांसी के निवासियों ने महात्मा गांधी को उस समय पांच सौ रुपये चंदा एकत्र करके भेंट किया था। महात्मा गांधी के जाने के बाद इस आंदोलन में शामिल 250 लोगों को अंग्रेज सरकार ने जेल भेज दिया था। आजादी के बाद एसपीआई इंटर कालेज में महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित कर दी गई है। एसपीआई में जिस कक्ष में महात्मा गांधी ठहरे थे उसका जीर्णोद्धार कर इसका महात्मा गांधी स्मृति कक्ष के रूप में नामकरण कर दिया गया है।
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कस्तूबरा गांधी की झोली में डाल दिए थे चिरगांव की महिलाओं ने अपने गहने
इतिहासकार रामप्रकाश गुप्ता बताते हैं कि 22 नवंबर 1929 में महात्मा गांधी एक बार फिर झांसी आए, एक दिन यहां ठहरने के बाद वह मुंशी अजमेरी के आमंत्रण पर 23 नवंबर को चिरगांव पहुंचे यहां पर उन्होंने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के निवास पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की बैठक को संबोधित किया। इसके पश्चात मुख्य बाजार में भी एक सभा को संबोधित किया। गुप्त बताते हैं कि बापू के साथ कस्तूरबा गांधी भी आईं थीं, उन्होंने चिरगांव में झोली फैलाकर आजादी की लड़ाई के लिए महिलाओं से आर्थिक सहयोग मांगा था, इस पर अनेक महिलाओं ने अपने गहने उतारकर उनकी झोली में डाल दिए थे। यहां से जाते समय महात्मा गांधी कुछ देर मोंठ में भी रुके थे, यहां के लोगों ने भी उन्हें चंदा एकत्र कर एक थैली भेंट की थी। झांसी जिले के इन कसबों में रहने वाले लोग अपने बुजुर्गों से सुने महात्मा गांधी से जुड़े इन संस्मरणों को चौपालों पर सुनाते हैं।
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