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आम, अमरूद के बाग और सब्जियों की फसल पर बार-बार हमला कर रहे टिड्डी दल
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locust attack
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झांसी। टिड्डी दलों का झांसी के आस पास यूं ही नहीं मंडरा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बरुआसागर व आस पास के क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में सब्जी, आम, अमरूद व अन्य फलों के बाग हैं। खेतों में मूंग के पौधे भी खड़े हैं। आसपास पर्याप्त हरियाली होने के कारण ये बार-बार यहां हमला करना चाह रहे हैं। हालांकि किसानों और प्रशासन की सजगता से वे बहुत सफल नहीं हो पा रहे।
पाकिस्तान की ओर से राजस्थान होते हुए 22 मई को क्षेत्र में आए टिड्डी दलों का खतरा अभी पूरी तरह नहीं टला है। वे इर्द-गिर्द ही मंडरा रहे हैं। झांसी-ललितपुर व मध्यप्रदेश के समीपवर्ती जिले शिवपुरी, दतिया में कई दिनों से इनकी मौजूदगी बनी हुई है। इनके यहां तक आने का प्रमुख कारण दक्षिण-पश्चिम हवाओं का रुख है। पाकिस्तान से आए ये टिड्डी दल राजस्थान होते हुए यहां पहुंचे हैं। क्योंकि हवा के रुख के साथ उड़ने में इन्हें बहुत आसानी रहती है।
कृषि विज्ञान केंद्र भरारी में वैज्ञानिक डॉ. मुकेश चंद्रा के अनुसार झांसी व आस पास के क्षेत्र में कई दिनों से इसलिए रह रहे हैं क्योंकि यहां बरुआसागर व आसपास के क्षेत्र में बड़ी तादाद में जायद की फसल है। टमाटर, बैगन, लौकी, काशीफल, तोरइया, परवल, कुंदरू आदि खेतों में पर्याप्त मात्रा में हैं। इसके साथ ही आम, अमरूद के कई बाग हैं। यह सब उनके लिए स्वादिष्ट आहार हैं। डॉ.चंद्रा के अनुसार टिड्डी दल कई दलों में बंटकर मध्यप्रदेश के शिवपुरी, दतिया, अशोक नगर और उत्तर प्रदेश में ललितपुर, समथर, उरई यहां तक कि सोनभद्र जिले तक चले गए हैं। प्रशासन द्वारा किए गए रसायन के छिड़काव से भी इनकी संख्या कम हुई है।
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वक्त के पहले आ गए हैं, इनका खात्मा जरूरी
रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.अरविंद कुमार के अनुसार टिड्डी दलों का इस तरह हमला कम से कम 20 वर्ष बाद हुआ है। प्री मानसून बारिश के कारण ये वक्त से पहले आ गए हैं। बरसात तक इनके लिए यहां का मौसम अनुकूल रहेगा। इनकी संख्या बहुत तेजी से बढ़ती है। झांसी क्षेत्र में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है लेकिन इनका खात्मा बहुत जरूरी है। नहीं तो ये कहीं भी बड़ा नुकसान कर सकते हैं। छोटे स्तर पर किसान नीम की पत्तियों के चूरे का पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़क दें। उसकी गंध से ये फसल पर नहीं बैठते। इन्हें खत्म करने के लिए रसायन का ही छिड़काव करना होता है। ये किसी भी फसल बैठ सकते हैं। जहां अधिक हरियाली देखते हैं वहां ठहरना पसंद करते हैं।
बारिश के कारण दल नहीं भर सके उड़ान
बृहस्पतिवार सुबह से ही बारिश के कारण टिड्डी दल उड़ान नहीं भर सका। उप कृषि निदेशक कमल कटियार के अनुसार बारिश के चलते टिड्डी दल मध्य प्रदेश के शिवपुरी व अशोकनगर के खनियाधाना के क्षेत्रों में ही रहा। हवा के विपरीत रुख के कारण रात तक इसके झांसी आने की संभावना नहीं है।
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पाकिस्तान की ओर से राजस्थान होते हुए 22 मई को क्षेत्र में आए टिड्डी दलों का खतरा अभी पूरी तरह नहीं टला है। वे इर्द-गिर्द ही मंडरा रहे हैं। झांसी-ललितपुर व मध्यप्रदेश के समीपवर्ती जिले शिवपुरी, दतिया में कई दिनों से इनकी मौजूदगी बनी हुई है। इनके यहां तक आने का प्रमुख कारण दक्षिण-पश्चिम हवाओं का रुख है। पाकिस्तान से आए ये टिड्डी दल राजस्थान होते हुए यहां पहुंचे हैं। क्योंकि हवा के रुख के साथ उड़ने में इन्हें बहुत आसानी रहती है।
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कृषि विज्ञान केंद्र भरारी में वैज्ञानिक डॉ. मुकेश चंद्रा के अनुसार झांसी व आस पास के क्षेत्र में कई दिनों से इसलिए रह रहे हैं क्योंकि यहां बरुआसागर व आसपास के क्षेत्र में बड़ी तादाद में जायद की फसल है। टमाटर, बैगन, लौकी, काशीफल, तोरइया, परवल, कुंदरू आदि खेतों में पर्याप्त मात्रा में हैं। इसके साथ ही आम, अमरूद के कई बाग हैं। यह सब उनके लिए स्वादिष्ट आहार हैं। डॉ.चंद्रा के अनुसार टिड्डी दल कई दलों में बंटकर मध्यप्रदेश के शिवपुरी, दतिया, अशोक नगर और उत्तर प्रदेश में ललितपुर, समथर, उरई यहां तक कि सोनभद्र जिले तक चले गए हैं। प्रशासन द्वारा किए गए रसायन के छिड़काव से भी इनकी संख्या कम हुई है।
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वक्त के पहले आ गए हैं, इनका खात्मा जरूरी
रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.अरविंद कुमार के अनुसार टिड्डी दलों का इस तरह हमला कम से कम 20 वर्ष बाद हुआ है। प्री मानसून बारिश के कारण ये वक्त से पहले आ गए हैं। बरसात तक इनके लिए यहां का मौसम अनुकूल रहेगा। इनकी संख्या बहुत तेजी से बढ़ती है। झांसी क्षेत्र में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है लेकिन इनका खात्मा बहुत जरूरी है। नहीं तो ये कहीं भी बड़ा नुकसान कर सकते हैं। छोटे स्तर पर किसान नीम की पत्तियों के चूरे का पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़क दें। उसकी गंध से ये फसल पर नहीं बैठते। इन्हें खत्म करने के लिए रसायन का ही छिड़काव करना होता है। ये किसी भी फसल बैठ सकते हैं। जहां अधिक हरियाली देखते हैं वहां ठहरना पसंद करते हैं।
बारिश के कारण दल नहीं भर सके उड़ान
बृहस्पतिवार सुबह से ही बारिश के कारण टिड्डी दल उड़ान नहीं भर सका। उप कृषि निदेशक कमल कटियार के अनुसार बारिश के चलते टिड्डी दल मध्य प्रदेश के शिवपुरी व अशोकनगर के खनियाधाना के क्षेत्रों में ही रहा। हवा के विपरीत रुख के कारण रात तक इसके झांसी आने की संभावना नहीं है।