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आराम तलब जिंदगी अब दे रही ‘रोग’

Fri, 03 Jun 2022 02:00 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jun 2022 02:00 AM IST
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Life calling for rest is now giving 'disease'
झांसी। आराम तलब जिंदगी तमाम लोगों को रोगी बना रही है। वर्क फ्रॉम होम और अकेले रहने की आदत से बाहर निकलने के लिए वह मनोवैज्ञानिकों और मनोचिकित्सकों का सहारा ले रहे हैं। लोग इस तनाव में हैं कि जिसे आराम तलब जिंदगी समझकर आनंद ले रहे थे, अब वह उन्हें आगे बढ़ने से रोक रही है, उन्हें पढ़ाई और अपने कॅरियर की चिंता सता रही है। मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र झांसी में इन दिनों मनोवैज्ञानिकों के पास हर रोज ऐसे तीन-चार केस पहुंच रहे हैं, जहां इस स्थिति से बाहर निकलने के चक्कर में लोग मेंटल स्ट्रेस का शिकार होने लगे हैं।
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दो साल तक कोरोना के चक्कर में लोग घरों में कैद होकर रहे। नौकरीपेशा लोगों ने लंबे समय तक वर्क फ्रॉम होम किया। कई घर से बाहर अकेले रहे, वहीं संक्रमण के कारण कई लोगों को आइसोलेशन में भी रहना पड़ा। ऐसे में कुछ लोगों ने इसे आपातकाल समझकर झेला और उस स्थिति से बाहर निकल आए। लेकिन कई ऐसे लोग रहे जिन्होंने दो साल तक इस जिंदगी को खूब इंजॉय किया। वर्क फ्रॉम होम उन्हें घर बैठे आरामदायक जिंदगी जीने का सबसे बढ़िया मौका लगा। उन्हें अकेले रहना अच्छा लगने लगा। जबकि अब यही जिंदगी उन्हें रोगी बना रही है। कोरोना के बाद रूटीन लाइफ में लौटते ही उन्हें तनाव होने लगा है।
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मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र के मनोवैज्ञानिक डॉ. मनीष के अनुसार ऐसे लोग अब अपने काम और पढ़ाई में सामंजस्य नहीं बैठा पा रहे हैं, उन्हें लगने लगा है कि वह पिछड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास हर रोज ऐसे तीन-चार केस आ रहे हैं जहां 20 से लेकर 45 साल के लोग इन कारणों से तनाव महसूस करने लगे हैं। ऐसे लोगों को काउंसलिंग के साथ कोपिंग डिफेंस मैकेनिज्म (खुद से मुकाबला कर सुरक्षित रहना) के जरिए तनाव से बाहर निकाला जा रहा है।
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ये है कोपिंग डिफेंस मैकेनिज्म
मनोविज्ञान की भाषा में कोपिंग डिफेंस मैकेनिज्म एक तरह का रक्षा तंत्र है, जो किसी व्यक्ति को आंतरिक संघर्षों, बाहरी तनाव और परेशान करने वाली भावनाओं से बचाने के लिए काम करता है।
ऐसे कर रहे काउंसलिंग
-परिवार और दोस्तों से मेलजोल बढ़ाएं, जो बातें तनाव दे रहीं, उसे बुरा सपना समझ कर भूलने की कोशिश करें।
-दोस्तों के साथ आउटिंग पर जाएं और खुद को उन चीजों में व्यस्त करें जो आपको पहले अच्छी लगती थीं।
-रात को सोने से पहले मोबाइल की बजाय अच्छी किताबें पढ़े, घरवालों को अपने दिनभर का शेड्यूल बताएं।
-बच्चों के साथ समय व्यतीत करने की कोशिश करें और मन में दोहराएं कि आप अच्छा काम करने में सक्षम हैं।
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