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महिला पॉलीटेक्निक छात्रावास आठ साल बाद भी अधूरा
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महिला पॉलीटेक्निक का निर्माणाधीन छात्रावास।
महिला पॉलीटेक्निक छात्रावास आठ साल बाद भी अधूरा
झांसी। पिछले आठ साल बाद भी वीरांगना झलकारी बाई राजकीय महिला पॉलीटेक्निक छात्रावास का काम पूरा नहीं हो सका है। जबकि, बचा काम पूरा करने के लिए शासन ने 50 लाख रुपये का बजट साल की शुरुआत में दे दिया था। कार्यदायी संस्था ने काम पूरा करने का काम शुरू तो कर दिया है पर इस सत्र में हॉस्टल का आवंटन होने की संभावना न के बराबर है।
वीरांगना झलकारी बाई राजकीय महिला पॉलीटेक्निक में 60 सीट के छात्रावास का काम पूरा करने के लिए साल की शुरुआत में 50 लाख की धनराशि प्रधानाचार्य के खाते में हस्तांतरित की जा चुकी थी। राशि मिलने के बाद कार्यदायी संस्था ने भले ही काम शुरू कर दिया हो लेकिन जिस तेजी से काम हो रहा है। उससे लगता नहीं कि इस साल भी छात्राओं को हॉस्टल में रहने की सुविधा मिलेगी। बता दें कि महिला पॉलीटेक्निक में 750 छात्राएं अध्ययनरत हैं। कॉलेज में 40 कमरों का पुराना छात्रावास है। इसमें 120 छात्राओं को अभी तक रहने की सुविधा मिल रही है। जबकि, अन्य छात्राओं को कैंपस के बाहर किराए पर कमरे लेकर पढ़ाई पूरी करनी पड़ रही है।
इस असुविधा को दूर करने के लिए वर्ष 2011 में महिला पॉलीटेक्निक में 60 छात्राओं को रहने की सुविधा देने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था। शासन ने 44 लाख से नए छात्रावास के निर्माण के लिए स्वीकृति दी थी। धनराशि मिलने के बाद कार्यदायी संस्था आवास विकास परिषद ने काम शुरू किया। आलम यह हुआ कि आठ साल बाद भी छात्रावास में निर्माण का काम पूरा नहीं हुआ। हर बार बजट के अभाव में काम अटक जाता है। साल 2011-12 में 70 लाख आवंटित कर दिए थे, जिसके बाद छात्रावास की इमारत तैयार हुई थी। उसके बाद वर्ष 2015-16 में दूसरी किस्त 20 लाख रुपये की आवंटित हुई, जिससे इमारत पर प्लास्टर व अन्य काम पूरा कराया गया था। अब सीलिंग और पेंटिंग के अलावा फिनिशिंग का काम अब भी बाकी है।
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कार्यदायी संस्था की तरफ से काम किया जा रहा है तथा 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। यदि, समय पर निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा तो इस साल से ही हॉस्टल आवंटित कर दिए जाएंगे। - एलएस यादव, प्रधानाचार्य।
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झांसी। पिछले आठ साल बाद भी वीरांगना झलकारी बाई राजकीय महिला पॉलीटेक्निक छात्रावास का काम पूरा नहीं हो सका है। जबकि, बचा काम पूरा करने के लिए शासन ने 50 लाख रुपये का बजट साल की शुरुआत में दे दिया था। कार्यदायी संस्था ने काम पूरा करने का काम शुरू तो कर दिया है पर इस सत्र में हॉस्टल का आवंटन होने की संभावना न के बराबर है।
वीरांगना झलकारी बाई राजकीय महिला पॉलीटेक्निक में 60 सीट के छात्रावास का काम पूरा करने के लिए साल की शुरुआत में 50 लाख की धनराशि प्रधानाचार्य के खाते में हस्तांतरित की जा चुकी थी। राशि मिलने के बाद कार्यदायी संस्था ने भले ही काम शुरू कर दिया हो लेकिन जिस तेजी से काम हो रहा है। उससे लगता नहीं कि इस साल भी छात्राओं को हॉस्टल में रहने की सुविधा मिलेगी। बता दें कि महिला पॉलीटेक्निक में 750 छात्राएं अध्ययनरत हैं। कॉलेज में 40 कमरों का पुराना छात्रावास है। इसमें 120 छात्राओं को अभी तक रहने की सुविधा मिल रही है। जबकि, अन्य छात्राओं को कैंपस के बाहर किराए पर कमरे लेकर पढ़ाई पूरी करनी पड़ रही है।
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इस असुविधा को दूर करने के लिए वर्ष 2011 में महिला पॉलीटेक्निक में 60 छात्राओं को रहने की सुविधा देने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था। शासन ने 44 लाख से नए छात्रावास के निर्माण के लिए स्वीकृति दी थी। धनराशि मिलने के बाद कार्यदायी संस्था आवास विकास परिषद ने काम शुरू किया। आलम यह हुआ कि आठ साल बाद भी छात्रावास में निर्माण का काम पूरा नहीं हुआ। हर बार बजट के अभाव में काम अटक जाता है। साल 2011-12 में 70 लाख आवंटित कर दिए थे, जिसके बाद छात्रावास की इमारत तैयार हुई थी। उसके बाद वर्ष 2015-16 में दूसरी किस्त 20 लाख रुपये की आवंटित हुई, जिससे इमारत पर प्लास्टर व अन्य काम पूरा कराया गया था। अब सीलिंग और पेंटिंग के अलावा फिनिशिंग का काम अब भी बाकी है।
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कार्यदायी संस्था की तरफ से काम किया जा रहा है तथा 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। यदि, समय पर निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा तो इस साल से ही हॉस्टल आवंटित कर दिए जाएंगे। - एलएस यादव, प्रधानाचार्य।