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संरक्षित होगा मऊरानीपुर का केदारेश्वर मंदिर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 24 Dec 2016 12:16 AM IST
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mandir, jhansi news
- फोटो : demo
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दसवीं सदी में प्रतिहार राजवंश के शासनकाल में मऊरानीपुर के ग्राम रौनी में बनवाए गए केदारेश्वर मंदिर को राज्य पुरातत्व विभाग अपने संरक्षण में लेगा। इसके लिए विभाग ने शासन को पत्र भेजा है। बेहद पुराना होने के बावजूद यह मंदिर सुरक्षित अवस्था में है। नंदी की पीठ पर शिवलिंग, गरुण पर बैठे विष्णु और आलिंगनबद्ध स्त्री-पुरुष की लघु आकृतियां इस मंदिर की विशेषता हैं। इन्हें संरक्षित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
राज्य पुरातत्व विभाग ने वर्ष 2001 में सर्वेक्षण इस मंदिर के इतिहास और विशेषता जानने के लिए शोध किया था। शोध में यह पता चला कि मंदिर का निर्माण दसवीं सदी में किया गया है। यह भूतल से लगभग 200 मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर के निर्माण में सैंड स्टोन का इस्तेमाल किए जाने से विभाग ने यह अनुमान लगाया कि इसे राजवंश द्वारा बनवाया गया होगा। नायाब मूर्तिकला और नक्काशी इस मंदिर की विशेषता है। मंदिर में पत्थर के गेट पर नाग-नागिन के जोड़े को दर्शाया गया है। गर्भगृह में भगवान शिव के वाहन नंदी की प्रतिमा की पीठ पर शिव लिंग बना है। पुरातत्व विभाग अधिकारियों के मुताबिक यह प्रतिमा बेहद दुर्लभ है। वहीं, गर्भगृह की छत पर पर कमल के पुष्पों की नक्काशी है और मूर्ति के समीप ही नवग्रह बने हैं।
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे ने बताया कि इतना पुराना होने के बाद भी यह मंदिर सुरक्षित अवस्था में है। आसपास ऐसा कोई मंदिर नहीं है। संभव है कि यह मंदिर कभी बुंदेलखंड में बडे़ तीर्थ के रूप में अपनी पहचान रखता हो। मंदिर के संरक्षण की खातिर उन्होंने शासन को संस्तुति पत्र लिखा है। मंदिर के रखरखाव के लिए स्थानीय लोगों ने भी पुरातत्व विभाग से मांग की है।
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राज्य पुरातत्व विभाग ने वर्ष 2001 में सर्वेक्षण इस मंदिर के इतिहास और विशेषता जानने के लिए शोध किया था। शोध में यह पता चला कि मंदिर का निर्माण दसवीं सदी में किया गया है। यह भूतल से लगभग 200 मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर के निर्माण में सैंड स्टोन का इस्तेमाल किए जाने से विभाग ने यह अनुमान लगाया कि इसे राजवंश द्वारा बनवाया गया होगा। नायाब मूर्तिकला और नक्काशी इस मंदिर की विशेषता है। मंदिर में पत्थर के गेट पर नाग-नागिन के जोड़े को दर्शाया गया है। गर्भगृह में भगवान शिव के वाहन नंदी की प्रतिमा की पीठ पर शिव लिंग बना है। पुरातत्व विभाग अधिकारियों के मुताबिक यह प्रतिमा बेहद दुर्लभ है। वहीं, गर्भगृह की छत पर पर कमल के पुष्पों की नक्काशी है और मूर्ति के समीप ही नवग्रह बने हैं।
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क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे ने बताया कि इतना पुराना होने के बाद भी यह मंदिर सुरक्षित अवस्था में है। आसपास ऐसा कोई मंदिर नहीं है। संभव है कि यह मंदिर कभी बुंदेलखंड में बडे़ तीर्थ के रूप में अपनी पहचान रखता हो। मंदिर के संरक्षण की खातिर उन्होंने शासन को संस्तुति पत्र लिखा है। मंदिर के रखरखाव के लिए स्थानीय लोगों ने भी पुरातत्व विभाग से मांग की है।
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