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काश सुना पाते किसी को अपना गम...तो खुदकुशी कर नहीं तोड़ते दम

Sat, 10 Sep 2022 12:57 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 10 Sep 2022 12:57 AM IST
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Kash suna patey kisi ko apna gam
झांसी। कहते हैं जिंदगी अनमोल है। भले ही इसमें कई उलझनें, परेशानियां, बदहाली-तंगहाली और रिश्तों की कड़ुवाहट है। भले ही हमारा हर पल खुशियों से भरा नहीं होता... लेकिन फिर भी जिंदगी खूबसूरत है। पर, ये सारी दलीलें आत्महत्या कर अपनी जान देने वाले को उस वक्त बेमानी लगती हैं। बात झांसी, ललितपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की करें तो यहां हर हफ्ते दो-चार लोग खुदकुशी कर दम तोड़ रहे हैं। इनमें सिर्फ युवा ही नहीं हैं जो अपने कॅरियर और प्रेम प्रसंगों को लेकर आत्महत्या कर रहे हैं, इनमें एक बड़ी तादाद 40-50 या इससे अधिक उम्र के लोगों की भी है जो महज छोटी-छोटी बातों के अलावा पारिवारिक कारण, पति-पत्नी के विवाद और तनाव के चलते जान दे रहे।
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झांसी, ललितपुर और आसपास के ग्रामीण अंचलों में आत्महत्या क रने वालों का आंकड़ा देखें तो नौ महीनों में 300 लोग आत्महत्या कर चुके हैं, इनमें जनवरी से अब तक ललितपुर में तकरीबन 105 लोग फांसी, ट्रेन से कटकर व जहर खाकर अपनी जान दे चुके हैं। वहीं 150 लोगों को आत्महत्या करने की कोशिश से बचाया गया। वहीं कोरोना काल में आत्महत्याएं बढ़ी थीं। 2022 में जनवरी से मार्च तक महज 71 दिनों में 76 लोगों ने खुदकुशी कर ली। कुल मिलाकर अब यह आंकड़ा 300 तक पहुंच गया। जबकि 500 से अधिक ने आत्महत्या की कोशिश की। वहीं, ट्रेन से कटकर जान देने की बात करें तो झांसी रेल मंडल में जनवरी, फरवरी और मार्च में 133 लोग पटरियों पर आत्महत्या कर चुके हैं। सितंबर तक यह आंकड़ा तकरीबन 150 तक पहुंच चुका है। आरपीएफ के मंडल सुरक्षा आयुक्त आलोक कुमार के मुताबिक आरपीएफ द्वारा लगातार सतर्कता बरती जा रही है। उधर आरपीएफ द्वारा 40-50 लोगों की जान भी बचाई जा चुकी है।
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सुसाइड नोट में बयां किया कारण
केस-1
03 जुलाई को झांसी मोंठ तहसील के फतेहपुर स्टेट गांव में किसान रघुवीर ने सरकारी सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। उसने जमीन की पैमाइश के लिए अधिकारियों और समाधान दिवसों के कई चक्कर लगाए लेकिन बात नहीं बनी। किसान की मौत के बाद मिले सुसाइड नोट में उसने पैमाइश के बदले आठ हजार घूस मांगे जाने का आरोप लगाया था। लेकिन वह सोशल मीडिया का सहारा लेता और अपनी बात खुलकर कहता तो शायद उसकी जान बच जाती।
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केस-2
24 मार्च को झांसी के गुरसराय के एक स्वास्थ्य केंद्र पर एक महिला फार्मासिस्ट ने सुसाइड नोट लिखकर आत्महत्या कर ली थी। उसने लिखा कि बहुत सोचा, मगर किसी ने हौसला नहीं बढ़ाया, सीता को भी राम के सामने अग्नि परीक्षा देनी पड़ी जबकि सीता-रावण के यहां सुरक्षित थी, लेकिन यहां तो राम ही रावण है। महिला अगर अपनी बात खुलकर किसी अपने को बताती तो कोई रास्ता निकल सकता था और शायद उसकी जान नहीं जाती।
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केस-3
02 सितंबर को झांसी में प्रेमनगर थाना क्षेत्र के आंबेडकर नगर में एक इंजीनियर ने पंखे से लटककर आत्महत्या करने से पहले एक वीडियो वायरल किया, इसमें इंजीनियर ने अपने दोस्त और पड़ोसियों समेत एक वर्दीधारी पर पत्नी के साथ गैंगरेप करने का आरोप लगाया था। एक माह पहले उसकी पत्नी ने भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। वीडियो में उसने यह भी कहा था कि उसका सिलेक्शन लेखपाल भर्ती में नहीं हो पाया। इन कारणों से वह अपनी जान दे रहा है।
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ये रहते हैं प्रमुख कारण
-पारिवारिक कलह, परिवार और समाज की बंदिशें, मनमाफिक जिंदगी न जी पाना, पति-पत्नी में विवाद, धमकी, क र्ज, शोषण और डर, फसल की बर्बादी, भ्रष्टाचार, बीमारी, प्रेम प्रसंग और शादी के मामले आदि।
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दोनों के फोटो
मनोविज्ञान केंद्र में हर महीने 4-5 केस आ जाते हैं जिसमें लोग जान देने पर उतारू रहते हैं। कई बचा लिए जाते हैं, जब काउंसलिंग के दौरान उनके मन की सुनी जाती है तो वह बताते हैं कि आत्महत्या के दौरान उन्होंने जो अनुभव किया वह जीवन की समस्याओं का सामना करने से ज्यादा दुखदायी थी। ऐसे में व्यक्ति अपनी उलझनों को अपने किसी करीबी या प्रिय से बताए तो निश्चित ही उसकी जान बच सकती है। अक्सर ऐसा व्यक्ति जल्दी समस्याओं से उबर जाता है।

डॉ. मनीष, मनोवैज्ञानिक-मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र
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जो लोग क्षणिक उलझनों से डिप्रेशन में आकर सुसाइड करते हैं, उन मामलों में भी उनके हाव-भाव कुछ इशारा देते हैं कि वे मानसिक रूप से परेशान हैं। ऐसे में कोई उनसे बात करे, साथ रहे तो वह व्यक्ति इस घटना से उबर सकता है। क्योंकि आत्महत्या के 70 फीसदी मामलों में व्यक्ति डिप्रेशन में चला जाता है। कुछ सोच समझ नहीं पाता। उन पर ध्यान दिया जाए तो उसकी जिंदगी बच सकती है। क्लीनिक में हर महीने डिप्रेशन में जान दे देने की बात कहने वाले 20-30 केस आते हैं।
डा. अमन किशोर, मनोचिकित्सक, विभागाध्यक्ष-ग्वालियर मानसिक आरोग्यशाला
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