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बाल-गोपाल रूप में गऊ माता संग विराजे हैं कान्हा
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जन्माष्टमी पर बाजार में सजी कान्हा की पगड़ी।
झांसी। शहर के नरिया बाजार स्थित श्री गोपाल कृष्ण मंदिर की महिमा निराली है। मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण बाल-गोपाल रूप में गऊ माता संग विराजे हैं। कान्हा जी की यह छवि इतनी अनुपम है कि देखने वालों को मन मोह जाता है।
मंदिर में मोरकटा महादेव की भी प्राचीन मूर्ति विराजमान है।
मंदिर के पुजारी अविनाश चतुर्वेदी बताते हैं कि इस मंदिर की स्थापना नरिया बाजार नवयुवक समिति ने वर्ष 1985 में कराई थी। मंदिर में कान्हा जी की मूर्ति बाल गोपाल रूप में विराजमान है। हर वर्ष जन्माष्टमी के दिन सुबह मंगला आरती होती है। इसके बार शृंगार होगी। शाम को शहर कोतवाल मंदिर में आरती करते हैं। इसके बाद भजन-कीर्तन होता है। रात 12 बजे भगवान को माखन-मिश्री और भोग प्रसाद अर्पित कर उनका जन्मदिन मनाया जाता है। भोग प्रसाद भक्तों को बांटा जाता है।
उन्होंने बताया कि मंदिर में मोरकटा महादेव की प्राचीन मूर्ति है। उन्होंने बताया कि वर्षों पहले इस क्षेत्र में डाकुओं का आतंक था, वह लोग सिर काट दिया करते थे। मोरकटा शिवलिंग भी सिर कटी आकृति को दर्शाता है। वहीं, मंदिर में माता गायत्री संग देवी-देवता भी विराजमान हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर की मूर्ति दक्षिणमुखी है। यहां भक्त अपनी मन्नत मांगते हैं। मन्नत पूरी होने पर कान्हा जी को प्रसाद चढ़ाते हैं।
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मंदिर में मोरकटा महादेव की भी प्राचीन मूर्ति विराजमान है।
मंदिर के पुजारी अविनाश चतुर्वेदी बताते हैं कि इस मंदिर की स्थापना नरिया बाजार नवयुवक समिति ने वर्ष 1985 में कराई थी। मंदिर में कान्हा जी की मूर्ति बाल गोपाल रूप में विराजमान है। हर वर्ष जन्माष्टमी के दिन सुबह मंगला आरती होती है। इसके बार शृंगार होगी। शाम को शहर कोतवाल मंदिर में आरती करते हैं। इसके बाद भजन-कीर्तन होता है। रात 12 बजे भगवान को माखन-मिश्री और भोग प्रसाद अर्पित कर उनका जन्मदिन मनाया जाता है। भोग प्रसाद भक्तों को बांटा जाता है।
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उन्होंने बताया कि मंदिर में मोरकटा महादेव की प्राचीन मूर्ति है। उन्होंने बताया कि वर्षों पहले इस क्षेत्र में डाकुओं का आतंक था, वह लोग सिर काट दिया करते थे। मोरकटा शिवलिंग भी सिर कटी आकृति को दर्शाता है। वहीं, मंदिर में माता गायत्री संग देवी-देवता भी विराजमान हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर की मूर्ति दक्षिणमुखी है। यहां भक्त अपनी मन्नत मांगते हैं। मन्नत पूरी होने पर कान्हा जी को प्रसाद चढ़ाते हैं।
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