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एमएनसी बिल के विरोध में जूनियर डॉक्टरों ने बंद रखे ओपीडी
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नेशनल मेडिकल कमिशन बिल के विरोध में झांसी मेडिकल कॉलेज के जूनियर डाक्टरों ने ओपीडी बंद कर प्रदर्?
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एमएनसी बिल के विरोध में जूनियर डॉक्टरों ने बंद रखे ओपीडी
झांसी। केंद्र सरकार की ओर से इंडियन मेडिकल कमीशन (एमएनसी) बिल राज्यसभा में पेश करने के विरोध में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने वृहस्पतिवार को ओपीडी बंद कर प्रदर्शन किया। इस दौरान मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने के लिए आए मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जूनियर डॉक्टरों ने बिल को चिकित्सकों के अहित में बताया। हालांकि मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में मरीजों का इलाज किया गया।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में रोजाना दो हजार मरीज से अधिक मरीज ओपीडी में इलाज कराने के लिए आते हैं लेकिन वृहस्पतिवार को मेडिकल कॉलेज के लगभग दो सौ जूनियर डॉक्टर व एमबीबीएस के लगभग पांच सौ स्नातक छात्रों ने बिल के विरोध में हड़ताल होने के कारण इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दूरदराज से आए मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर सौरभ कुमार तिवारी ने बताया कि इस बिल में संशोधन को लेकर काफी समय से चिकित्सकों में असंतोष रहा है। इस बिल के लागू होने से चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह से नष्ट हो जाएंगी। इसकी गुणवत्ता अर्श से फर्श पर आ जाएगी। सरकार इस बिल के माध्यम से चिकित्सा व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त करने पर आमादा है। इस बिल से चिकित्सा शिक्षण में निजीकरण का बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने वापस नहीं लिया गया तो जूनियर डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे। इस दौरान होने वाली मरीजों की मौत पर सरकार जिम्मेदार होगी। इस बिल को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बाहर से आने वाले मरीज रहे परेशान
मेडिकल कॉलेज में शहर के बाहर से इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से बंद होने के कारण अधिकतर मरीजों को लौटना पड़ा तो वहीं कुछ मरीजों ने निजी अस्पतालों का रुख किया।
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ये है एमएनसी बिल
मौजूदा इंडियन मेडिकल कौंसिल एक्ट 1956 के अनुसार एलोपैथिक मेडिसिन के चिकित्सक होने के लिए न्यूनतम योग्यता एमबीबीएस होना आवश्यक है लेकिन एमएनसी बिल लागू होने पर मौजूदा कानून को समाप्त माना जाएगा।
आयुर्वेदिक, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा एवं होमियोपैथी की योग्यता रखने वाले चिकित्सक भी एलोपैथिक दवाएं लिख सकेंगे।
बिल के लागू होने पर मौजूदा स्नातकोत्तर (पीजी)कोर्सेज जो केवल एमबीबीएस डिग्री धारक चिकित्सकों के लिए होते थे, उन्हें आयुर्वेदिक, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा एवं होमियोपैथी की योग्यता रखने वाले चिकित्सक भी कर सकेंगे।
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झांसी। केंद्र सरकार की ओर से इंडियन मेडिकल कमीशन (एमएनसी) बिल राज्यसभा में पेश करने के विरोध में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने वृहस्पतिवार को ओपीडी बंद कर प्रदर्शन किया। इस दौरान मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने के लिए आए मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जूनियर डॉक्टरों ने बिल को चिकित्सकों के अहित में बताया। हालांकि मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में मरीजों का इलाज किया गया।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में रोजाना दो हजार मरीज से अधिक मरीज ओपीडी में इलाज कराने के लिए आते हैं लेकिन वृहस्पतिवार को मेडिकल कॉलेज के लगभग दो सौ जूनियर डॉक्टर व एमबीबीएस के लगभग पांच सौ स्नातक छात्रों ने बिल के विरोध में हड़ताल होने के कारण इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दूरदराज से आए मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर सौरभ कुमार तिवारी ने बताया कि इस बिल में संशोधन को लेकर काफी समय से चिकित्सकों में असंतोष रहा है। इस बिल के लागू होने से चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह से नष्ट हो जाएंगी। इसकी गुणवत्ता अर्श से फर्श पर आ जाएगी। सरकार इस बिल के माध्यम से चिकित्सा व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त करने पर आमादा है। इस बिल से चिकित्सा शिक्षण में निजीकरण का बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने वापस नहीं लिया गया तो जूनियर डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे। इस दौरान होने वाली मरीजों की मौत पर सरकार जिम्मेदार होगी। इस बिल को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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बाहर से आने वाले मरीज रहे परेशान
मेडिकल कॉलेज में शहर के बाहर से इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से बंद होने के कारण अधिकतर मरीजों को लौटना पड़ा तो वहीं कुछ मरीजों ने निजी अस्पतालों का रुख किया।
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ये है एमएनसी बिल
मौजूदा इंडियन मेडिकल कौंसिल एक्ट 1956 के अनुसार एलोपैथिक मेडिसिन के चिकित्सक होने के लिए न्यूनतम योग्यता एमबीबीएस होना आवश्यक है लेकिन एमएनसी बिल लागू होने पर मौजूदा कानून को समाप्त माना जाएगा।
आयुर्वेदिक, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा एवं होमियोपैथी की योग्यता रखने वाले चिकित्सक भी एलोपैथिक दवाएं लिख सकेंगे।
बिल के लागू होने पर मौजूदा स्नातकोत्तर (पीजी)कोर्सेज जो केवल एमबीबीएस डिग्री धारक चिकित्सकों के लिए होते थे, उन्हें आयुर्वेदिक, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा एवं होमियोपैथी की योग्यता रखने वाले चिकित्सक भी कर सकेंगे।