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Jhansi: मलबे से बनेंगे टाइल्स और एपेक्स, नगर निगम लगवाएगा प्लांट, बिजौली में होगा स्थापित
Wed, 22 Jul 2026 12:35 PM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Wed, 22 Jul 2026 12:35 PM IST
सार
महानगर से निकलने वाले मलबे का अब टाइल्स और एपेक्स बनाने में इस्तेमाल होगा। इसके लिए नगर निगम प्रशासन प्लांट लगाने की तैयारी कर रहा है।
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नगर निगम, झांसी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
महानगर से निकलने वाले मलबे का अब टाइल्स और एपेक्स बनाने में इस्तेमाल होगा। इसके लिए नगर निगम प्रशासन की ओर से बिजौली में सीएंडडी वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की स्थापना कराई जा रही है। फिर नगर निगम की ओर से इन्हीं टाइल्स और एपेक्स का विकास कार्य में इस्तेमाल किया जाएगा।
नगर निगम की योजना के अनुसार भवन निर्माण, सड़क खुदाई और पुराने भवनों के ध्वस्तीकरण से निकलने वाले कंक्रीट, ईंट, पत्थर और अन्य निर्माण अवशेषों को 20 टीपीडी (टन प्रति दिन) प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। यहां इन्हें मशीनों से अलग-अलग छांटकर पीसा जाएगा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शासन ने प्लांट स्थापना की मंजूरी दे दी है। इस पर नगर निगम की ओर से निविदा भी निकाल दी गई है। प्लांट की स्थापना का उद्देश्य है कि महानगर में लोग खाली प्लॉट, सड़क और नालों में मलबा न फेंकें। साथ ही निर्माण सामग्री के पुनर्चक्रण से बनने वाले एपेक्स और टाइल्स का सड़क, फुटपाथ, पार्क से लेकर अन्य विकास कार्य कराने में इस्तेमाल हो सके।
एक हजार रुपये प्रति डंपर करना होगा भुगतान
जिस भी व्यक्ति को मलबा उठवाना होगा, वह नगर निगम के जोनल कार्यालय या कंट्रोल रूम पर सूचना देगा। मलबा उठवाने पर संबंधित व्यक्ति को नगर निगम को एक हजार रुपये प्रति डंपर भुगतान करना पड़ेगा। बताया गया कि अभी आईजीआरएस पर भी सड़क पर मलबा फेंकने की काफी शिकायतें आती हैं। प्लांट शुरू होने के बाद शिकायतों में भी कमी आने की उम्मीद है।
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यह होगा फायदा
सड़कों, नालों और खाली प्लॉटों में मलबा फेंकने की प्रवृत्ति कम होगी।
निर्माण सामग्री के पुनर्चक्रण से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी होगा।
प्लांट की क्षमता 20 टीपीडी होने से रोज बड़ी मात्रा में मलबा निस्तारित होगा।
इनका यह है कहना
बिजौली में सीएंडडी वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की स्थापना के लिए निविदा निकाल दी गई है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 1.45 करोड़ रुपये से यह प्लांट स्थापित होगा, जिसकी क्षमता 20 टीपीडी होगी। - आकांक्षा राणा, नगर आयुक्त।
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नगर निगम की योजना के अनुसार भवन निर्माण, सड़क खुदाई और पुराने भवनों के ध्वस्तीकरण से निकलने वाले कंक्रीट, ईंट, पत्थर और अन्य निर्माण अवशेषों को 20 टीपीडी (टन प्रति दिन) प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। यहां इन्हें मशीनों से अलग-अलग छांटकर पीसा जाएगा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शासन ने प्लांट स्थापना की मंजूरी दे दी है। इस पर नगर निगम की ओर से निविदा भी निकाल दी गई है। प्लांट की स्थापना का उद्देश्य है कि महानगर में लोग खाली प्लॉट, सड़क और नालों में मलबा न फेंकें। साथ ही निर्माण सामग्री के पुनर्चक्रण से बनने वाले एपेक्स और टाइल्स का सड़क, फुटपाथ, पार्क से लेकर अन्य विकास कार्य कराने में इस्तेमाल हो सके।
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एक हजार रुपये प्रति डंपर करना होगा भुगतान
जिस भी व्यक्ति को मलबा उठवाना होगा, वह नगर निगम के जोनल कार्यालय या कंट्रोल रूम पर सूचना देगा। मलबा उठवाने पर संबंधित व्यक्ति को नगर निगम को एक हजार रुपये प्रति डंपर भुगतान करना पड़ेगा। बताया गया कि अभी आईजीआरएस पर भी सड़क पर मलबा फेंकने की काफी शिकायतें आती हैं। प्लांट शुरू होने के बाद शिकायतों में भी कमी आने की उम्मीद है।
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यह होगा फायदा
सड़कों, नालों और खाली प्लॉटों में मलबा फेंकने की प्रवृत्ति कम होगी।
निर्माण सामग्री के पुनर्चक्रण से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी होगा।
प्लांट की क्षमता 20 टीपीडी होने से रोज बड़ी मात्रा में मलबा निस्तारित होगा।
इनका यह है कहना
बिजौली में सीएंडडी वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की स्थापना के लिए निविदा निकाल दी गई है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 1.45 करोड़ रुपये से यह प्लांट स्थापित होगा, जिसकी क्षमता 20 टीपीडी होगी। - आकांक्षा राणा, नगर आयुक्त।