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Jhansi: 53 हजार ब्लैक लिस्ट वाहनों पर ‘तीसरी आंख’ से शिकंजा, परिवहन विभाग ने स्मार्ट सिटी को सौंपी सूची
Sat, 31 Jan 2026 08:37 AM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Sat, 31 Jan 2026 08:37 AM IST
सार
जनपद में कई वाहन ऐसे हैं, जिनका 15 वर्ष की समय सीमा पूरी होने के बाद फिर से पंजीकरण नहीं कराया है। ऐसे ही 53 हजार वाहनों की सूची परिवहन विभाग ने स्मार्ट सिटी लिमिटेड को सौंपी है।
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वाहनों पर कैमरे से नजर।
- फोटो : डेमो पिक।
विस्तार
झांसी की सड़कों पर 53 हजार ब्लैक लिस्ट वाहन दौड़ रहे हैं। ये ऐसे वाहन हैं, जिन्होंने पंजीकरण की समय सीमा पूरी होने के बाद नवीनीकरण नहीं कराया है। परिवहन विभाग से सूची मिलने के बाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड के आईसीसीसी से इन पर शिकंजा कसा जा रहा है। पिछले साढ़े तीन वर्षों में 7.31 करोड़ रुपये के चालान भी किए जा चुके हैं।
नगर निगम परिसर में वर्ष 2022 में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) बनकर तैयार हुआ था। इसके निर्माण और रखरखाव को मिलाकर लगभग 180 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। मौजूदा समय में आईसीसीसी से नगर के अलग-अलग स्थानों के तीन हजार से अधिक सीसीटीवी कैमरे जुड़े हैं। इसमें 350 सीसीटीवी कैमरे नगर निगम और स्मार्ट सिटी के लगे हुए हैं। इन कैमरों के जरिये महानगर के विभिन्न स्थानों पर नजर रखी जाती है।
अब तक मिल चुका 7.31 करोड़ का राजस्व
देश में निजी दोपहिया और चार पहिया वाहनों का प्राथमिक पंजीकरण 15 वर्षों के लिए वैध होता है। यह समय सीमा पूरी होने के बाद इन वाहनों को सड़कों पर पांच साल और चलने के लिए पुन: पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है। जनपद में कई वाहन ऐसे हैं, जिनका 15 वर्ष की समय सीमा पूरी होने के बाद फिर से पंजीकरण नहीं कराया गया है। ऐसे ही 53 हजार वाहनों की सूची परिवहन विभाग ने स्मार्ट सिटी लिमिटेड को सौंपी है। ऐसे वाहनों का डाटा फीड हो चुका है। अब आईसीसीसी में स्क्रीन पर जैसे ही ये वाहन दिखाई देते हैं, उनकी फोटो खिंच जाती है। फिर फोटो परिवहन विभाग के साथ साझा की जाती है। परिवहन विभाग ही ऐसे वाहनों का चालान करता है। अब तक परिवहन विभाग को ब्लैक लिस्ट वाहनों के चालान से 7.31 करोड़ का राजस्व मिल चुका है।
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पांच हजार का चालान से लेकर वाहन सीज करने का प्रावधान
एआरटीओ डॉ. सुजीत सिंह का कहना है कि ब्लैक लिस्ट वाहनों के सड़क पर चलने पर आईसीसीसी से फोटो मिलने पर पांच हजार रुपये का चालान किया जाता है। वाहन पकड़े जाने पर सीज करने का भी प्रावधान है।
इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के कैमरों की मदद से 1700 प्रकरणों के खुलासे में पुलिस को मदद मिली है। इसके अलावा ब्लैक लिस्ट वाहनों का भी 7.31 करोड़ रुपये का चालान हो चुका है। हेल्पडेस्क की सहायता से 58 हजार से अधिक शिकायतों का भी निस्तारण हुआ है। 200 से ज्यादा डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने वाली गाड़ियों की भी निगरानी की जा रही है। - राहुल कुमार यादव, एसीईओ, स्मार्ट सिटी लिमिटेड।
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नगर निगम परिसर में वर्ष 2022 में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) बनकर तैयार हुआ था। इसके निर्माण और रखरखाव को मिलाकर लगभग 180 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। मौजूदा समय में आईसीसीसी से नगर के अलग-अलग स्थानों के तीन हजार से अधिक सीसीटीवी कैमरे जुड़े हैं। इसमें 350 सीसीटीवी कैमरे नगर निगम और स्मार्ट सिटी के लगे हुए हैं। इन कैमरों के जरिये महानगर के विभिन्न स्थानों पर नजर रखी जाती है।
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अब तक मिल चुका 7.31 करोड़ का राजस्व
देश में निजी दोपहिया और चार पहिया वाहनों का प्राथमिक पंजीकरण 15 वर्षों के लिए वैध होता है। यह समय सीमा पूरी होने के बाद इन वाहनों को सड़कों पर पांच साल और चलने के लिए पुन: पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है। जनपद में कई वाहन ऐसे हैं, जिनका 15 वर्ष की समय सीमा पूरी होने के बाद फिर से पंजीकरण नहीं कराया गया है। ऐसे ही 53 हजार वाहनों की सूची परिवहन विभाग ने स्मार्ट सिटी लिमिटेड को सौंपी है। ऐसे वाहनों का डाटा फीड हो चुका है। अब आईसीसीसी में स्क्रीन पर जैसे ही ये वाहन दिखाई देते हैं, उनकी फोटो खिंच जाती है। फिर फोटो परिवहन विभाग के साथ साझा की जाती है। परिवहन विभाग ही ऐसे वाहनों का चालान करता है। अब तक परिवहन विभाग को ब्लैक लिस्ट वाहनों के चालान से 7.31 करोड़ का राजस्व मिल चुका है।
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पांच हजार का चालान से लेकर वाहन सीज करने का प्रावधान
एआरटीओ डॉ. सुजीत सिंह का कहना है कि ब्लैक लिस्ट वाहनों के सड़क पर चलने पर आईसीसीसी से फोटो मिलने पर पांच हजार रुपये का चालान किया जाता है। वाहन पकड़े जाने पर सीज करने का भी प्रावधान है।
इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के कैमरों की मदद से 1700 प्रकरणों के खुलासे में पुलिस को मदद मिली है। इसके अलावा ब्लैक लिस्ट वाहनों का भी 7.31 करोड़ रुपये का चालान हो चुका है। हेल्पडेस्क की सहायता से 58 हजार से अधिक शिकायतों का भी निस्तारण हुआ है। 200 से ज्यादा डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने वाली गाड़ियों की भी निगरानी की जा रही है। - राहुल कुमार यादव, एसीईओ, स्मार्ट सिटी लिमिटेड।