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Jhansi: मोबाइल की लत से खत्म हो रहा किशाेरों का संयम, मनोचिकित्सक की चेतावनी- नहीं चेते तो हो जाएगी देर

Thu, 05 Feb 2026 12:51 PM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Thu, 05 Feb 2026 12:51 PM IST
सार

जब बच्चे ऑनलाइन गेम्स खेलते हैं या सोशल मीडिया पर रील्स देखते हैं तो उनके दिमाग में डोपामाइन हार्मोन का स्राव होता है। ऐसे में यदि कोई रोकता या टोकता है तो वह आक्रामक हो जाते हैं। 

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Jhansi: Teenagers are losing their patience while scrolling, Reels are fueling their aggression.
ऑनलाइन गेम्स के बढ़ती लत। - फोटो : Freepik.com

विस्तार

ऑनलाइन गेम्स हों या मोबाइल पर चलती रील्स किशोरों की उंगलियों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि अब उनके दिमाग पर कब्जा करती दिख रही हैं। मनोचिकित्सकों की चेतावनी है कि सोशल मीडिया रील्स देखने की बढ़ती लत किशोरों में असहिष्णुता और हमलावर प्रवृत्ति को जन्म दे रही है। तेज दृश्य, ऊंचा संगीत और कुछ सेकेंड में बदलती क्लिप्स किशोर दिमाग में डोपामाइन का स्राव करती हैं। यही तात्कालिक सुख जब आदत बन जाती है तो वास्तविक जीवन की सामान्य स्थितियां उन्हें चिढ़ पैदा करने वाली लगने लगती हैं।
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जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. शिकाफा जाफरीन ने ओपीडी में आ रहे मामलों की जानकारी देते हुए बताया कि जब बच्चे ऑनलाइन गेम्स खेलते हैं या सोशल मीडिया पर रील्स देखते हैं तो उनके दिमाग में डोपामाइन हार्मोन का स्राव होता है। जिससे तात्कालिक आनंद की अनुभूति होती है। इसकी वजह से कुछ ही दिन में वह इसके लती हो जाते हैं। स्थिति यह हो जाती है कि जब वह गेम्स या सोशल मीडिया से दूर होते हैं तो मन विचलित होने लगता है। इसकी वजह से वह फिर से गेम्स खेलने लगते हैं। ऐसे में यदि कोई रोकता या टोकता है तो वह आक्रामक हो जाते हैं। यहां तक कि आत्मघाती कदम उठा लेते हैं।
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काउंसिलिंग से सही रास्ते पर लाना संभव
जिला अस्पताल की ओपीडी में ऐसे बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे बच्चों को काउंसिलिंग अथवा समुचित उपचार से ही सही रास्ते पर लाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्क्रीन पर पलने वाली यह आदत यदि नहीं थमी तो इसके दुष्परिणाम स्कूल से लेकर समाज तक नजर आएंगे। इस संकेत पर भी अभिभावक नहीं संभले, तो देर हो जाएगी।
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केस-एक
बुधवार को ओपीडी में कोतवाली क्षेत्र के 11 वर्षीय बालक को लेकर माता-पिता आए। उन्होंने बताया कि मोबाइल छीन लेने की वजह से बच्चे ने खाना-पीना बंद कर दिया है। यही नहीं, इतना ज्यादा आक्रोशित है कि टीवी तक तोड़ दिया।



केस-दो
सीपरी बाजार की कक्षा नौ की छात्रा तीन माह से स्कूल नहीं जा रही है। वह कमरे में रहकर रील्स बनाती है और रील्स ही देखती रहती है। जब परिजनों ने इंटरनेट का कनेक्शन काटने के लिए कहा तो उसने आत्महत्या की धमकी दे डाली। इसके बाद परिजन उसे उपचार के लिए लेकर आए।
है। जब परिजनों ने इंटरनेट का कनेक्शन काटने के लिए कहा तो उसने आत्महत्या की धमकी दे डाली। इसके बाद परिजन उसे उपचार के लिए लेकर आए।
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