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Jhansi: कोर्ट के आदेश पर नौ संविदा चिकित्सकों काे मिला सेवा विस्तार, नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर शासन सख्त
Tue, 14 Apr 2026 03:12 PM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Tue, 14 Apr 2026 03:12 PM IST
सार
हाईकोर्ट के आदेश पर कॉलेज प्रशासन ने नौ चिकित्सकों का सेवा विस्तार कर दिया। वहीं, इस प्रकरण में शासन ने भी सख्त रुख अपनाते हुए प्राचार्य से तीन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांग लिया है।
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मेडिकल कॉलेज, झांसी
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
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विस्तार
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में संविदा चिकित्सकों के सेवा विस्तार का मामला तूल पकड़ने के बाद सोमवार को नया मोड़ आ गया। हाईकोर्ट के आदेश पर कॉलेज प्रशासन ने नौ चिकित्सकों का सेवा विस्तार कर दिया। वहीं, इस प्रकरण में शासन ने भी सख्त रुख अपनाते हुए प्राचार्य से तीन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांग लिया है।
कॉलेज प्रशासन द्वारा सेवा विस्तार न देकर साक्षात्कार के माध्यम से नई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय विवाद का कारण बना था। मामला शासन तक पहुंचा, जिसके बाद नौ चिकित्सकों ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। कोर्ट से राहत मिलने पर कॉलेज प्रशासन को उन्हें सेवा में बनाए रखने का आदेश दिया गया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद कॉलेज प्रशासन ने शासन से मार्गदर्शन मांगा। इसी बीच पिछले सप्ताह गरौठा विधायक जवाहर राजपूत ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित घोष से मुलाकात कर पूरे प्रकरण से अवगत कराया।
नई शर्तों से चिकित्सकों में नाराजगी
सूत्रों के अनुसार, कोर्ट के आदेश के बाद शासन का रुख कॉलेज प्रशासन के प्रति कड़ा हो गया है। आदेश का अनुपालन करते हुए नौ चिकित्सकों का सेवा विस्तार कर दिया गया। हालांकि, नियुक्ति पत्र में कुछ नई शर्तें जोड़े जाने से चिकित्सकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि पूर्व में जिन दो चिकित्सकों का सेवा विस्तार हुआ था, उनके आदेश में ऐसी शर्तें नहीं थीं। उल्लेखनीय है कि अपर मुख्य सचिव का बुधवार को झांसी दौरा प्रस्तावित है। ऐसे में उनके आगमन से ठीक पहले सेवा विस्तार किया जाना चर्चा का विषय बना हुआ है। कॉलेज के प्रमुख अधीक्षक डॉ. सचिन माहुर ने बताया कि कोर्ट के आदेश के अनुपालन में नौ संविदा चिकित्सकों का सेवा विस्तार किया गया है।
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इन चिकित्सकों का हुआ सेवा विस्तार
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित सहगल, फिजीशियन डॉ. रजत जैन, चेस्ट एवं टीबी रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव कुमार, दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. रजत मिसुरिया, डॉ. अभिषेक नागाइच, डॉ. सतीश अग्रवाल, डॉ. विकास गोयल, डॉ. सपना गुप्ता और डॉ. कंवलप्रीत।
रेडियोलॉजी विभाग पर पड़ा असर
सेवा विस्तार के बजाय साक्षात्कार से नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होने पर कुछ चिकित्सकों ने इस्तीफा दे दिया था, जिसका सबसे अधिक असर रेडियोलॉजी विभाग पर पड़ा। यहां पांच में से केवल दो ही डॉक्टर कार्यरत रह गए हैं, जिससे व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
शासन ने प्राचार्य से पूछे ये तीन सवाल
शासन ने प्राचार्य से पूछा है कि संविदा चिकित्सकों का सेवा विस्तार किस आधार पर रोका गया। दूसरा, चिकित्सकों को कोर्ट जाने की नौबत क्यों आई। तीसरा, यदि चिकित्सक ड्यूटी पर नहीं आ रहे थे तो उन्हें नोटिस क्यों नहीं दिया गया।
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कॉलेज प्रशासन द्वारा सेवा विस्तार न देकर साक्षात्कार के माध्यम से नई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय विवाद का कारण बना था। मामला शासन तक पहुंचा, जिसके बाद नौ चिकित्सकों ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। कोर्ट से राहत मिलने पर कॉलेज प्रशासन को उन्हें सेवा में बनाए रखने का आदेश दिया गया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद कॉलेज प्रशासन ने शासन से मार्गदर्शन मांगा। इसी बीच पिछले सप्ताह गरौठा विधायक जवाहर राजपूत ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित घोष से मुलाकात कर पूरे प्रकरण से अवगत कराया।
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नई शर्तों से चिकित्सकों में नाराजगी
सूत्रों के अनुसार, कोर्ट के आदेश के बाद शासन का रुख कॉलेज प्रशासन के प्रति कड़ा हो गया है। आदेश का अनुपालन करते हुए नौ चिकित्सकों का सेवा विस्तार कर दिया गया। हालांकि, नियुक्ति पत्र में कुछ नई शर्तें जोड़े जाने से चिकित्सकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि पूर्व में जिन दो चिकित्सकों का सेवा विस्तार हुआ था, उनके आदेश में ऐसी शर्तें नहीं थीं। उल्लेखनीय है कि अपर मुख्य सचिव का बुधवार को झांसी दौरा प्रस्तावित है। ऐसे में उनके आगमन से ठीक पहले सेवा विस्तार किया जाना चर्चा का विषय बना हुआ है। कॉलेज के प्रमुख अधीक्षक डॉ. सचिन माहुर ने बताया कि कोर्ट के आदेश के अनुपालन में नौ संविदा चिकित्सकों का सेवा विस्तार किया गया है।
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इन चिकित्सकों का हुआ सेवा विस्तार
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित सहगल, फिजीशियन डॉ. रजत जैन, चेस्ट एवं टीबी रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव कुमार, दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. रजत मिसुरिया, डॉ. अभिषेक नागाइच, डॉ. सतीश अग्रवाल, डॉ. विकास गोयल, डॉ. सपना गुप्ता और डॉ. कंवलप्रीत।
रेडियोलॉजी विभाग पर पड़ा असर
सेवा विस्तार के बजाय साक्षात्कार से नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होने पर कुछ चिकित्सकों ने इस्तीफा दे दिया था, जिसका सबसे अधिक असर रेडियोलॉजी विभाग पर पड़ा। यहां पांच में से केवल दो ही डॉक्टर कार्यरत रह गए हैं, जिससे व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
शासन ने प्राचार्य से पूछे ये तीन सवाल
शासन ने प्राचार्य से पूछा है कि संविदा चिकित्सकों का सेवा विस्तार किस आधार पर रोका गया। दूसरा, चिकित्सकों को कोर्ट जाने की नौबत क्यों आई। तीसरा, यदि चिकित्सक ड्यूटी पर नहीं आ रहे थे तो उन्हें नोटिस क्यों नहीं दिया गया।