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झांसी मेडिकल काॅलेज: एसएनसीयू में आग की जांच 346 दिन बाद भी नहीं हुई पूरी, 19 शिशुओं की झुलसकर चली गई थी जान

Tue, 28 Oct 2025 10:43 AM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Tue, 28 Oct 2025 10:43 AM IST
सार

मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू में 15 नवंबर को आग लगने से झुलसकर मरे शिशुओं के मामले की जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है। यही वजह है कि प्राथमिक जांच में दोषी पाए गए जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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Jhansi Medical College: Investigation into the fire in the SNCU is still pending even after 346 days.
मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क, झांसी

विस्तार

मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू में 15 नवंबर को आग लगने से झुलसकर मरे शिशुओं के मामले की जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है। यही वजह है कि प्राथमिक जांच में दोषी पाए गए जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मंडलायुक्त कानपुर का कहना है कि शासन से चार रिपोर्ट मांगी थी, जिनमें से अभी तक सिर्फ एक रिपोर्ट मिली है, शेष का इंतजार है।
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15 नवंबर की रात 10:20 बजे स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में आग लगी थी, जिसमें 10 शिशुओं की मौके पर ही मौत हो गई थी। आग से बचाए गए नौ शिशुओं ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। शासन ने मंडलायुक्त झांसी बिमल कुमार दुबे को आग लगने के कारण की प्राथमिक जांच करके रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। मंडलायुक्त ने 16 नवंबर को शार्ट सर्किट से आग लगने की रिपोर्ट दी। इसके बाद शासन ने तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक किंजल सिंह के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम जांच के लिए भेजी।
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तीन दिन तक टीम ने हर बिंदु पर जांच की और रिपोर्ट शासन को सौंपी। महानिदेशक की जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन एसआईसी डॉ. सुनीता भदौरिया, नर्सिंग इंचार्ज संध्या व जेई संजीत कुमार को निलंबित कर मुख्यालय संबद्ध किया गया। तत्कालीन प्रधानाचार्य डॉ. एनएस सेंगर को महानिदेशक कार्यालय से संबद्ध कर दिया। वहीं, तत्कालीन मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. कुलदीप चंदेल, बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया, सीएमएस डॉ. सचिन माहुर आदि की भूमिका की जांच की संस्तुति की गई। शासन ने कानपुर के मंडलायुक्त को विस्तृत जांच रिपोर्ट देने के आदेश दिए, जो 346 दिन बाद भी तैयार नहीं हुई।
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मंडलायुक्त कानपुर के. विजयेंद्र पांडियन ने सोशल मीडिया पर वायरल तथ्य को नकारा है। उन्होंने बताया कि शासन से चार जांच रिपोर्ट मांगी है, जिनमें से सिर्फ विभागीय जांच रिपोर्ट मिली है। तीनों जांच रिपोर्ट आने के बाद ही फैसला लिया जा सकता है। मंडलायुक्त ने आरटीआई का जवाब देने की बात स्वीकारी, मगर एफआईआर के निर्देश देने की बात से इनकार किया।
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