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झांसी से इंदौर के लिए इंटरसिटी एक सितंबर से
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 07 Aug 2016 12:59 AM IST
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train, jhansi news
- फोटो : demo
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झांसी। बहुप्रतीक्षित ग्वालियर-इंदौर इंटरसिटी एक्सप्रेस अब झांसी से भी चलेगी, इसके लिए एक सितंबर की तारीख तय की गई है। इसके आठ डिब्बे झांसी से बनकर जाएंगे, जो ग्वालियर पहुंचने पर इंटरसिटी से जोड़ दिए जाएंगे। यह घोषणा शनिवार को रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने किया। वह भाजपा कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक में शिरकत करने आए हैं।
गौरतलब है कि एक जुलाई 2013 को लागू हुई समय सारिणी में ग्वालियर-इंदौर एक्सप्रेस इंटरसिटी का संचालन झांसी से भी करने का फैसला किया गया था। लेकिन, इस पर अमल नहीं हो रहा था। अब इस इंटरसिटी के चलने के बाद यात्रियों के लिए इंदौर का सफर आसान हो जाएगा। अभी झांसी क्षेत्र के यात्रियों को इंदौर जाने के लिए रात ढाई बजे मालवा एक्सप्रेस का ही सहारा है। अब झांसी से इंटरसिटी चलने से सुविधा बढ़ जाएगी। रेलवे स्टेशन के वीआईपी रूम में पत्रकारों से बातचीत में सिन्हा ने बताया कि केंद्र में भाजपा सरकार बनने पर रेलवे का संचालन बड़ी चुनौती थी। कम पूंजी होने के कारण परियोजनाओं पर साल में सिर्फ 48 हजार करोड़ खर्च किए जा रहे थे।
लेकिन, भाजपा सरकार ने पहले साल में ही बजट बढ़ाकर एक लाख करोड़ कर दिया। वर्तमान में रेल के पास पूंजी की समस्या खत्म हो गई है। इस साल नई योजनाओं के लिए सवा लाख करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच साल में साढ़े आठ लाख रुपये रेलवे की परियोजनाओं पर खर्च करने का निर्णय लिया है, ताकि वर्षों से लंबित पड़ी योजनाओं को पूरा किया जा सके।
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सिन्हा ने कहा कि वर्ष 2020 तक रेलवे का नेटवर्क पूरी तरह विकसित हो जाएगा। इसके बाद यात्री देश के किसी भी कोने से आरक्षित टिकट ले सकेगा। मालगाड़ियां भी टाइम टेबल से चलेगी। झांसी- बीना तीसरी रेल लाइन के सवाल पर उन्होंने कहा कि 1162 करोड़ ही यह योजना नीति आयोग के पास लंबित पड़ी है। नीति आयोग से स्वीकृति मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। मथुरा-झांसी तीसरी रेल लाइन के लिए 2488 करोड़ का कार्य स्वीकृत है।
उन्होंने बताया कि रेलवे की इमारतों की छतों पर से सौर ऊर्जा का दोहन करने के लिए नीति को अंतिम रूप दिया गया है। अगले दो-तीन वर्षों में सभी स्टेशनों पर एलईडी लाइटें लगाने का कार्य पूरा हो जाएगा। 2020 तक सभी मानवरहित रेलवे क्रासिंगों को हटा दिया जाएगा। यात्रियों की सहायता के लिए 138 व 182 हेल्पलाइनों के अलावा एक पोर्टल भी तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में रेल सुविधाओं के विस्तार और उसके माध्यम से इस पिछड़े क्षेत्र के विकास के लिए रेलवे निरंतर प्रयासरत है। इस मौके पर उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक एके सक्सेना, डीआरएम एसके अग्रवाल, सीनियर डीसीएम दुर्गेश दुबे मौजूद थे।
व्यापारियों की मुश्किलें होंगी दूर
ग्वालियर-इंदौर इंटरसिटी एक्सप्रेस के झांसी से संचालित होने से जहां यात्रियों को लाभ मिलेगा, वहीं व्यापारियों को माल मंगाने व भेजने में अब मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा। चूंकि, इंदौर व्यापार के दृष्टिकोण से बहुत बड़ा बाजार है। इस कारण बुंदेलखंड के व्यापारी बड़ी संख्या में इंदौर से माल मंगाते व भेजते हैं। अभी ट्रेन की उचित सुविधा नहीं होने के कारण व्यापारियों को सड़क मार्ग का ही सहारा लेना पड़ता है। इस ट्रेन का झांसी से संचालन शुरू होते ही व्यापारियों को व्यापार में काफी मदद मिल सकेगी।
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गौरतलब है कि एक जुलाई 2013 को लागू हुई समय सारिणी में ग्वालियर-इंदौर एक्सप्रेस इंटरसिटी का संचालन झांसी से भी करने का फैसला किया गया था। लेकिन, इस पर अमल नहीं हो रहा था। अब इस इंटरसिटी के चलने के बाद यात्रियों के लिए इंदौर का सफर आसान हो जाएगा। अभी झांसी क्षेत्र के यात्रियों को इंदौर जाने के लिए रात ढाई बजे मालवा एक्सप्रेस का ही सहारा है। अब झांसी से इंटरसिटी चलने से सुविधा बढ़ जाएगी। रेलवे स्टेशन के वीआईपी रूम में पत्रकारों से बातचीत में सिन्हा ने बताया कि केंद्र में भाजपा सरकार बनने पर रेलवे का संचालन बड़ी चुनौती थी। कम पूंजी होने के कारण परियोजनाओं पर साल में सिर्फ 48 हजार करोड़ खर्च किए जा रहे थे।
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लेकिन, भाजपा सरकार ने पहले साल में ही बजट बढ़ाकर एक लाख करोड़ कर दिया। वर्तमान में रेल के पास पूंजी की समस्या खत्म हो गई है। इस साल नई योजनाओं के लिए सवा लाख करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच साल में साढ़े आठ लाख रुपये रेलवे की परियोजनाओं पर खर्च करने का निर्णय लिया है, ताकि वर्षों से लंबित पड़ी योजनाओं को पूरा किया जा सके।
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सिन्हा ने कहा कि वर्ष 2020 तक रेलवे का नेटवर्क पूरी तरह विकसित हो जाएगा। इसके बाद यात्री देश के किसी भी कोने से आरक्षित टिकट ले सकेगा। मालगाड़ियां भी टाइम टेबल से चलेगी। झांसी- बीना तीसरी रेल लाइन के सवाल पर उन्होंने कहा कि 1162 करोड़ ही यह योजना नीति आयोग के पास लंबित पड़ी है। नीति आयोग से स्वीकृति मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। मथुरा-झांसी तीसरी रेल लाइन के लिए 2488 करोड़ का कार्य स्वीकृत है।
उन्होंने बताया कि रेलवे की इमारतों की छतों पर से सौर ऊर्जा का दोहन करने के लिए नीति को अंतिम रूप दिया गया है। अगले दो-तीन वर्षों में सभी स्टेशनों पर एलईडी लाइटें लगाने का कार्य पूरा हो जाएगा। 2020 तक सभी मानवरहित रेलवे क्रासिंगों को हटा दिया जाएगा। यात्रियों की सहायता के लिए 138 व 182 हेल्पलाइनों के अलावा एक पोर्टल भी तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में रेल सुविधाओं के विस्तार और उसके माध्यम से इस पिछड़े क्षेत्र के विकास के लिए रेलवे निरंतर प्रयासरत है। इस मौके पर उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक एके सक्सेना, डीआरएम एसके अग्रवाल, सीनियर डीसीएम दुर्गेश दुबे मौजूद थे।
व्यापारियों की मुश्किलें होंगी दूर
ग्वालियर-इंदौर इंटरसिटी एक्सप्रेस के झांसी से संचालित होने से जहां यात्रियों को लाभ मिलेगा, वहीं व्यापारियों को माल मंगाने व भेजने में अब मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा। चूंकि, इंदौर व्यापार के दृष्टिकोण से बहुत बड़ा बाजार है। इस कारण बुंदेलखंड के व्यापारी बड़ी संख्या में इंदौर से माल मंगाते व भेजते हैं। अभी ट्रेन की उचित सुविधा नहीं होने के कारण व्यापारियों को सड़क मार्ग का ही सहारा लेना पड़ता है। इस ट्रेन का झांसी से संचालन शुरू होते ही व्यापारियों को व्यापार में काफी मदद मिल सकेगी।