{"_id":"5fb972728ebc3e9b754417db","slug":"jhansi-every-house-identified-in-unique-code-jhansi-news-jhs181595681","type":"story","status":"publish","title_hn":"झांसी में हर घर का होगा अपना यूनिक कोड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
झांसी में हर घर का होगा अपना यूनिक कोड
विज्ञापन
झांसी। महानगर के घरों की पहचान के लिए अब ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। नगर निगम हर घर को अपना यूनिक कोड देने जा रहा है। इसके साथ ही भवन का पूरा रिकार्ड ऑनलाइन किया जाएगा। ऐसे में कभी भी एक क्लिक पर भवन की पूरी स्थिति का आकलन किया जा सकेगा। प्रमुख सचिव दीपक कुमार के निर्देश के बाद नगर निगम ने यूनिक कोड को लेकर कवायद तेज कर दी है।
महानगर में करीब 1.20 लाख मकान हैं। अब तक भवन की स्थिति पता करने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में शासन ने हर भवन को यूनिक कोड देने के निर्देश दिए हैं। 17 अंकों वाले यूनिक कोड के अंकों भी विशेषता होगी। यूनिक कोड देखकर यह पता चल सकेगा कि यह किस शहर के किस इलाके में कहां स्थित है? इसके लिए महानगर में संपत्तियों का जीआईएस सर्वे चल रहा है।
इसके बाद भवनों को यूनिक कोड आंवटित किए जा सकेंगे। यूनिक कोड की खासियत यह भी होगा कि इससे यह पता करना आसान होगा कि संपत्ति आवासीय है या व्यावसायिक। वहीं, गृहकर की चोरी भी नहीं हो सकेगी। अब तक महानगर में कई भवन स्वामी दो-तीन मंजिला भवन बनाने के बाद कर एक मंजिल का ही अदा करते हैं। सर्वे और यूनिक कोड के बाद ऑनलाइन टैक्स की गणना की जा सकेगी। इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
विज्ञापन
यूनिक कोड ऐसे होगा तैयार
कोड में प्रथम दो अंक लोकल गर्वनमेंट डायरेक्टरी के मुताबिक प्रदेश कोड, तीन से पांच अंक स्थानीय निकाय का कोड, छह से सात अंक स्थानीय निकाय का जोनल कोड, आठ से 10 अंक स्थानीय निकाय वार्ड का कोड, 11 से 16 अंक अचल संपत्ति का कोड होगा। जबकि 17 वें अंक में विशेष अक्षर होगा। जिसमें आर का अर्थ आवासीय, एन का अर्थ व्यावसायिक और एम का अर्थ मिश्रित संपत्ति होगा।
हर भवन और संपत्ति को 17 अंकों का यूनिक कोड जारी किया जाना है। जिसके बाद भवन और संपत्ति के बारे में कहीं से भी ऑनलाइन जानकारी मिल सकेगी। इसके लिए संपत्तियों का जीआईएस सर्वे चल रहा है।
अवनीश राय, नगर आयुक्त
विज्ञापन
महानगर में करीब 1.20 लाख मकान हैं। अब तक भवन की स्थिति पता करने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में शासन ने हर भवन को यूनिक कोड देने के निर्देश दिए हैं। 17 अंकों वाले यूनिक कोड के अंकों भी विशेषता होगी। यूनिक कोड देखकर यह पता चल सकेगा कि यह किस शहर के किस इलाके में कहां स्थित है? इसके लिए महानगर में संपत्तियों का जीआईएस सर्वे चल रहा है।
विज्ञापन
इसके बाद भवनों को यूनिक कोड आंवटित किए जा सकेंगे। यूनिक कोड की खासियत यह भी होगा कि इससे यह पता करना आसान होगा कि संपत्ति आवासीय है या व्यावसायिक। वहीं, गृहकर की चोरी भी नहीं हो सकेगी। अब तक महानगर में कई भवन स्वामी दो-तीन मंजिला भवन बनाने के बाद कर एक मंजिल का ही अदा करते हैं। सर्वे और यूनिक कोड के बाद ऑनलाइन टैक्स की गणना की जा सकेगी। इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
विज्ञापन
यूनिक कोड ऐसे होगा तैयार
कोड में प्रथम दो अंक लोकल गर्वनमेंट डायरेक्टरी के मुताबिक प्रदेश कोड, तीन से पांच अंक स्थानीय निकाय का कोड, छह से सात अंक स्थानीय निकाय का जोनल कोड, आठ से 10 अंक स्थानीय निकाय वार्ड का कोड, 11 से 16 अंक अचल संपत्ति का कोड होगा। जबकि 17 वें अंक में विशेष अक्षर होगा। जिसमें आर का अर्थ आवासीय, एन का अर्थ व्यावसायिक और एम का अर्थ मिश्रित संपत्ति होगा।
हर भवन और संपत्ति को 17 अंकों का यूनिक कोड जारी किया जाना है। जिसके बाद भवन और संपत्ति के बारे में कहीं से भी ऑनलाइन जानकारी मिल सकेगी। इसके लिए संपत्तियों का जीआईएस सर्वे चल रहा है।
अवनीश राय, नगर आयुक्त