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Jhansi: ई-रिक्शा चार्जिंग के दौरान बैटरी में धमाका, चपेट में आया चालक...23 दिन बाद अस्पताल से आई दर्दनाक खबर
Sun, 24 Aug 2025 08:42 AM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Sun, 24 Aug 2025 08:42 AM IST
सार
इलाज के दौरान 23 दिन बाद उसकी भोपाल में दर्दनाक मौत हो गई। मौत की खबर से परिवार में कोहराम मच गया है।
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चालक नीरज
- फोटो : संवाद
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विस्तार
रिक्शा चार्जिंग के दौरान स्पार्किंग के साथ बैटरी में तेज धमाका हुआ जिसकी चपेट में चालक आकर बुरी तरह झुलस गया। इलाज के दौरान 23 दिन बाद उसकी भोपाल में दर्दनाक मौत हो गई। मौत की खबर से परिवार में कोहराम मच गया है।
मोंठ थाना क्षेत्र में ग्राम बमरौली स्टेशन के पास विगत में 29 जुलाई को हुए हादसे में झुलसे ई-रिक्शा चालक नीरज कुमार (पुत्र बाबूलाल) की 20 अगस्त को 23 दिन बाद भोपाल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
नीरज कुमार रेलवे स्टेशन के पास रहते थे और करीब तीन वर्ष से ई-रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। 29 जुलाई की रात वह रिक्शा चार्ज पर लगा रहे थे, तभी स्पार्किंग से चार्जर और बैटरी धमाके के साथ फट गए। हादसे में नीरज गंभीर रूप से झुलस गए। उन्हें पहले मोंठ सीएचसी, फिर झाँसी मेडिकल कॉलेज, उसके बाद एक निजी अस्पताल और अंत में भोपाल ले जाया गया, जहाँ 23 दिन तक चले इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया है। 21 अगस्त को शव पैतृक घर लाया गया और गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
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परिवार पर आर्थिक संकट
नीरज रिक्शा चलाकर किसी तरह अपने परिवार का पेट पाल रहा था। लेकिन उसकी मौत के बाद उसके परिवार पर आर्थिक संकट के बादल मंडराने लगे हैं। घर में पत्नी ललिता और दो बच्चों में शालिनी (16) व नीलेश (14) का सहारा टूट गया है। परिवार आर्थिक संकट में आ गया है और बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है।
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मोंठ थाना क्षेत्र में ग्राम बमरौली स्टेशन के पास विगत में 29 जुलाई को हुए हादसे में झुलसे ई-रिक्शा चालक नीरज कुमार (पुत्र बाबूलाल) की 20 अगस्त को 23 दिन बाद भोपाल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
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नीरज कुमार रेलवे स्टेशन के पास रहते थे और करीब तीन वर्ष से ई-रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। 29 जुलाई की रात वह रिक्शा चार्ज पर लगा रहे थे, तभी स्पार्किंग से चार्जर और बैटरी धमाके के साथ फट गए। हादसे में नीरज गंभीर रूप से झुलस गए। उन्हें पहले मोंठ सीएचसी, फिर झाँसी मेडिकल कॉलेज, उसके बाद एक निजी अस्पताल और अंत में भोपाल ले जाया गया, जहाँ 23 दिन तक चले इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया है। 21 अगस्त को शव पैतृक घर लाया गया और गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
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परिवार पर आर्थिक संकट
नीरज रिक्शा चलाकर किसी तरह अपने परिवार का पेट पाल रहा था। लेकिन उसकी मौत के बाद उसके परिवार पर आर्थिक संकट के बादल मंडराने लगे हैं। घर में पत्नी ललिता और दो बच्चों में शालिनी (16) व नीलेश (14) का सहारा टूट गया है। परिवार आर्थिक संकट में आ गया है और बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है।