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Jhansi: आग से खेल रहे 57 नर्सिंग होम और अस्पताल, संकरे रास्ते में चल रहे, नोटिस देने के बावजूद हो रहा संचालन

Sat, 06 Jun 2026 11:22 AM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Sat, 06 Jun 2026 11:22 AM IST
सार

अग्निशमन विभाग की ओर से ऐसे 67 नर्सिंग होम और अस्पतालों को नोटिस दिए जा चुके लेकिन, इसके बावजूद इनका संचालन धड़ल्ले से हो रहा है वहीं, कई नर्सिंग होम ऐसी संकरी गलियों में हैं जहां दमकल की गाड़ियां तक नहीं पहुंच सकतीं।

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Jhansi: 57 nursing homes and hospitals are playing with fire, operating in narrow streets despite notices.
संकरी गलियों में चल रहे नर्सिंग होम। - फोटो : संवाद

विस्तार

दिल्ली के जिन होटलों में कैद होकर 21 लोगों की आग लगने की वजह से जान चली गई, उसी तरह के असुरक्षित नर्सिंग होम और प्राइवेट अस्पताल झांसी में धड़ल्ले से चल रहे हैं। संकरी गलियों में असुरक्षित तरीके से चल रहे नर्सिंग होम में रोजाना हजारों मरीज पहुंचते हैं लेकिन, यहां आग जैसी हालत से निपटने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। अग्निशमन विभाग की ओर से ऐसे 67 नर्सिंग होम और अस्पतालों को नोटिस दी जा चुकी लेकिन, इसके बावजूद इनका संचालन धड़ल्ले से हो रहा है वहीं, कई नर्सिंग होम ऐसी संकरी गलियों में हैं जहां दमकल की गाड़ियां तक नहीं पहुंच सकतीं।
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दिल्ली के मालवीय नगर में आग लगने के बाद होटलों से बाहर जाने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था। अमर उजाला टीम ने शुक्रवार को जब कई नर्सिंग होम का जायजा लिया, तब यहां भी हालत तकरीबन वैसे ही मिले। मेडिकल कॉलेज के ठीक सामने स्थित करगुवा स्थित तकरीबन प्रत्येक नर्सिंग होम में आने और जाने का रास्ता एक है। विशेषज्ञों का कहना है आग लगने की स्थिति में सबसे अधिक खतरा तब पैदा होता है, जब भवन में केवल एक ही सीढ़ी हो, पर्याप्त वेंटिलेशन न हो और आपातकालीन निकास की व्यवस्था न हो।
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अग्निशमन विभाग ने दो साल पहले महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल अस्पताल में हुए अग्निकांड के बाद नर्सिंग होम एवं अस्पतालों का जायजा लिया। खामियां मिलने पर 78 संचालकों को नोटिस जारी किया गया। दोबारा निरीक्षण करने पर स्थिति जस की तस मिलने पर इनको फिर नोटिस जारी हुई। इनमें कुछ ने व्यवस्था ठीक की लेकिन, अधिकांश ने ध्यान नहीं दिया। चिन्हित नर्सिंग होम एवं प्राइवेट अस्पतालों को तीन बार नोटिस जारी हो चुकी। इसके बावजूद सुरक्षा उपाय न करने पर इनमें से किसी का लाइसेंस निरस्त नहीं हुआ वहीं, सीएफओ राजकिशोर राय का कहना है कि दमकल विभाग की ओर से सभी नर्सिंग होम का नियमित तौर पर जायजा लिया जा रहा है। नोटिस के बाद भी चलने पर इनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
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यह है अग्निशमन विभाग के मानक
इमारत 15 मीटर ऊंची होने के साथ उसका क्षेत्रफल 500 वर्गफीट से अधिक है तो फायर एनओसी लेना अनिवार्य है
संपर्क मार्ग का संपर्क मार्ग न्यूनतम 10 फीटा चौड़ा होना चाहिए
नर्सिंग होम एवं अस्पतालों में वैकल्पिक मार्ग और फायर फाइटिंग सिस्टम होना अनिवार्य है
स्मोक प्रेशर सिस्टम और वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था होनी चाहिए
मुख्य प्रवेश द्वार पर किसी तरह कोई अतिक्रमण नहीं होना चाहिए

यह व्यवस्थाएं होना जरूरी
वैध फायर एनओसी
अग्निशमन यंत्र और हाइड्रेंट
आपातकालीन निकास मार्ग
फायर अलार्म सिस्टम
पर्याप्त वेंटिलेशन
बिजली वायरिंग की नियमित जांच
कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण


झांसी में आग लगने की वजह से हो चुकीं बड़ी घटनाएं
15 नवंबर 2024 की रात महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के शिशु वार्ड में भीषण आग लग गई थी, जिसमें 10 नवजात शिशुओं की जलकर और दम घुटने से दर्दनाक मौत हो गई।
3 जुलाई 2023 को सीपरी बाजार थानाक्षेत्र स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम में भीषण आग लगने से पांच की झुलस जाने से मौत हो गई जबकि चार झुलसकर गंभीर रूप से घायल हो गए।

15 मई 2024 को सीपरी बाजार के कोहली स्टोर में भीषण आग भड़क उठी। इसमें करोड़ों रुपये का सामान जलकर नष्ट हो गया।

आग लगने से इस तरह से करें बचाव
सीएफओ राजकिशोर राय का कहना है कि गर्मियों में तापमान बढ़ने से आग लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। सूखी घास, तेज हवाएं, बिजली की ओवरलोडिंग और लापरवाही मिलकर बड़ी दुर्घटना का कारण बनती हैं।
एक ही सॉकेट में एसी, कूलर, फ्रिज, चार्जर एक साथ न चलाएं। गर्मी में तार गर्म होकर आग पकड़ लेते हैं।
सोते समय चार्जर, आयरन, गीजर का स्विच बंद करें।
मोबाइल रातभर चार्ज पर न छोड़ें।
हर साल गर्मी से पहले इलेक्ट्रीशियन से पुराने तार, एमसीबी चेक कराएं। लूज कनेक्शन चिंगारी का सबसे बड़ा कारण है।
एसी फ्रिज में वोल्टेज फ्लक्चुएशन से कंप्रेसर में आग लग सकती है।
गैस लीक चेक: रेगुलेटर बंद करने के बाद साबुन-पानी से पाइप चेक करें। बुलबुले दिखें तो तुरंत बदलें।
अग्निरोधक उपकरण: 2 बीएचके घर में कम से कम 2 किलो एबीसी टाइप रखें।
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